रादौर। करीब 18 हजार की आबादी वाले रादौर शहर में राशन वितरण व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। शहर में इस समय मात्र दो राशन डिपो ही कार्यरत हैं, जबकि कुछ वर्ष पहले तक यहां करीब 10 राशन डिपो संचालित होते थे। धीरे-धीरे आठ डिपो बंद हो जाने से अब हजारों राशन कार्डधारकों का दबाव सिर्फ दो डिपो पर आ गया है, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि इन दोनों डिपो पर हर महीने राशन लेने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगती हैं। भयंकर सर्दी हो या अन्य प्रतिकूल मौसम, महिलाएं और बुजुर्ग देर रात तक लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। कई बार तो घंटों इंतजार के बाद भी लोगों को राशन नहीं मिल पाता। डिपो धारकों की कमी के कारण शहर की राशन वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
शहर निवासी रामकुमार, भयंकर, प्रवीण, संदीप, सुरेश, सुंदर लाल, कुलदीप, राकेश व सरोज ने बताया कि पहले शहर के अलग-अलग हिस्सों में डिपो होने से लोगों को सुविधा मिलती थी। लेकिन कुछ डिपो धारकों के काम छोड़ने और कुछ की मृत्यु के बाद नए डिपो आवंटित नहीं किए गए। इससे आज हालात यह हैं कि दो डिपो पर ही पूरे शहर का भार है। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा कुछ दिन पहले छह हजार नए राशन डिपो खोलने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक इसका लाभ जमीन पर नजर नहीं आया है। नए डिपो न खुलने से उपभोक्ताओं को समय पर राशन नहीं मिल पा रहा।
उधर, क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में भी डिपो धारकों की भारी कमी है। कई गांवों में डिपो न होने के कारण ग्रामीणों को राशन लेने के लिए दूसरे गांवों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द नए राशन डिपो खोल कर व्यवस्था को सुचारु किया जाए, ताकि जनता को राहत मिल सके।
इस बारे में विभाग के इंस्पेक्टर का कहना है कि डिपो की कमी के बारे में डीएफएससी को अवगत कराया हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही गांव में नए डिपो लोगों को अलॉट होंगे।