संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में वीरवार को ब्लॉक-ए में एक महिला अपने 11 वर्षीय बेटे के साथ लिफ्ट में फंस गई। दवा लेने अस्पताल आई मंडी गांव निवासी नौशिदा बेटे नौशाद के साथ ग्राउंड फ्लोर से द्वितीय तल पर जा रही थी, लेकिन लिफ्ट ऊपर जाने के बजाय अचानक नीचे की ओर चली गई और बेसमेंट व ग्राउंड फ्लोर के बीच अटक गई।
अचानक लिफ्ट रुकने से मां-बेटे डर गए। वहीं अस्पताल का स्टाफ भी दौड़ा-दौड़ा आया और लिफ्ट के बाहर लगे फोन से अंदर मां-बेटे से बात कर उन्हें जल्द बाहर निकालने का आश्वासन दिया। लिफ्ट के भीतर मोबाइल नेटवर्क बेहद कमजोर होने के कारण महिला को काफी मशक्कत के बाद अपने घर फोन मिल पाया।
घर वालों ने तुरंत अस्पताल के आईसीयू में ही कार्यरत अपने एक परिचित कर्मचारी को सूचना दी। कर्मचारी ने अस्पताल स्टाफ को मामले से अवगत कराया। इसके बाद काफी देर की मशक्कत के बाद चाबी की मदद से लिफ्ट को खोला गया और करीब पौना घंटा बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाहर निकलते ही महिला और बच्चा घबराए हुए नजर आए।
जिला नागरिक अस्पताल में इससे पहले भी मरीजों और तीमारदारों के लिफ्ट में फंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद लिफ्ट संचालन और सुरक्षा को लेकर ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। अस्पताल में लिफ्ट चलाने के लिए कोई प्रशिक्षित स्टाफ तैनात नहीं है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीज और उनके परिजन अनजाने में लिफ्ट के गलत बटन दबा देते हैं, जिससे लिफ्ट फंसने की घटनाएं बार-बार हो रही हैं।
लोगों का कहना है कि जिला स्तर के चार मंजिला 100 बेड के सरकारी अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज आते हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे लिफ्ट का उपयोग करने को मजबूर हैं, लेकिन सुरक्षा इंतजाम न होने से उनकी जान जोखिम में पड़ रही है। लोगों ने मांग की है कि लिफ्ट की नियमित जांच कराई जाए और हर समय एक प्रशिक्षित कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
वर्जन
लिफ्ट चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी देने के लिए मुख्यालय को लिखा है। मां-बेटे को चाबी से लिफ्ट का दरवाजा खोल कर बाहर निकाल दिया गया था। - डाॅ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन यमुनानगर।
लिफ्ट में फंसे मां-बेटे से फोन पर बात करता कर्मचारी। संवाद