संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गणपति बप्पा की भक्ति में डूबे शहर में इस बार आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी नजर आ रहा है। गणेश महोत्सव के तहत विभिन्न क्षेत्रों में सजे पंडालों में सुबह-शाम आरती, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण हो रहा है। वहीं, कई आयोजकों ने पीओपी की प्रतिमाओं के बजाय मिट्टी और गोबर से बनी गणेश प्रतिमाओं को प्राथमिकता दी है।
श्रद्धालु इन प्रतिमाओं का जल स्रोतों में विसर्जन करने के बजाय घर में ही विसर्जन कर पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने की पहल कर रहे हैं। विसर्जन का समय नजदीक आने के साथ श्रद्धालुओं में बप्पा की विदाई को लेकर भावुकता भी है। उनका कहना है कि विदाई का क्षण भावुक करने वाला होता है, लेकिन अगले वर्ष गणपति के फिर आने की उम्मीद के साथ उन्हें विदाई दी जाएगी।
शहर के मॉडल टाउन में पिछले दो वर्षों से लगाए जा रहे गणेश पंडाल में इस बार 24 इंच की मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है। कॉलोनी निवासी सीपी छिब्बर, हेमंत शर्मा, आरती बतरा, अर्जन सैनी, इंद्रजीत सिंह मक्कड़ और बिट्टू नागपाल ने बताया कि प्रतिमा का विसर्जन घर में रखे बड़े टब में किया जाएगा। इससे जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा। विसर्जन के बाद प्रतिमा से बनी मिट्टी का घर में छिड़काव के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
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सरनी चौक पर भाईचारे की मिसाल
सरनी चौक पर वैष्णवी ग्रुप की ओर से पिछले छह वर्षों से गणपति पंडाल लगाया जा रहा है। यहां गणपति महोत्सव के दौरान भाईचारे की मिसाल भी देखने को मिल रही है। इस्तखार अहमद उर्फ चिंटू श्रद्धालुओं की सेवा के साथ पंडाल की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जाति और धर्म से बढ़कर इंसानियत है। सभी धर्मों के लोगों को मिलजुलकर त्योहार मनाने चाहिए। ग्रुप संचालकों जयंत, रामशीष राजभर, राजन गुप्ता, हरिंद्र राजभर, राजू गाबा, राहुल राजभर और मयंक ने बताया कि पंडाल लगाने की तैयारियां करीब एक माह पहले शुरू कर दी गई थीं। गली को आकर्षक लाइटों से सजाया गया है। सुबह-शाम आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है।
वीना नगर कैंप में स्थापित की गई मिट्टी से बनी गणेश की मूर्ति। स्वयं