संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में साध्वी सुयशा भारती ने मानव जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए गुरु की आवश्यकता और महत्व के बारे में विस्तार से समझाया।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जीवित रहने के लिए प्राणवायु आवश्यक है, उसी प्रकार मानवता को जीवित रखने के लिए जीवन में गुरु का होना अनिवार्य है। अज्ञानता के अंधकार से मनुष्य को बाहर निकालने वाली शक्ति को ही गुरु कहा जाता है। गुरु के सान्निध्य से ही मानव जीवन को वास्तविक गौरव प्राप्त होता है। केवल मानव रूप में जन्म लेना ही पर्याप्त नहीं है, जब तक जीवन में मानवता के गुण प्रकट न हों।
भारती ने कहा कि गुरु ज्ञान के प्रखर सूर्य हैं, जिनके जीवन में उदय होने से अज्ञानता रूपी अंधकार का सर्वनाश हो जाता है। गुरु के मार्गदर्शन से मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप से जुड़कर मानव जीवन के परम लक्ष्य को प्राप्त करता है। साध्वी ने कहा कि जीवन के छोटे से छोटे कार्य के लिए हम श्रेष्ठ शिक्षक की तलाश करते हैं, लेकिन ज्ञान और भक्ति जैसे विराट क्षेत्र में आज मानव बिना गुरु के ही आगे बढ़ने का प्रयास करता है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि जब आत्मा में संसार के प्रति वैराग्य और परमात्मा को जानने की तीव्र इच्छा उत्पन्न होती है, तभी सच्ची प्रार्थना उसे पूर्ण गुरु तक ले जाती है। ब्रह्मनिष्ठ गुरु ही आत्म कल्याण का माध्यम होते हैं, क्योंकि जन्म-मरण से मुक्ति की विधि वही जानते हैं जो स्वयं मुक्त हैं। साध्वी ने कहा कि गुरु अपने शिष्य को निजी सेवा में नहीं, बल्कि जनकल्याण और समाज उद्धार का माध्यम बनाते हैं। गुरु सत्संग, सेवा, साधना और सुमिरन के माध्यम से शिष्य के जीवन को पावन बनाकर समाज के लिए आदर्श स्थापित करते हैं।