संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। स्वच्छ सर्वेक्षण में पिछड़ न जाए, इसके लिए शहर में कूड़ा उठान व्यवस्था को लेकर नगर निगम ने एजेंसी ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने कूड़ा उठान में लगी एजेंसी पर 48.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जीपीएस और ऑनलाइन मॉनिटरिंग के जरिए की गई जांच में एजेंसी की कई खामियां उजागर हुईं, जिसके बाद यह कार्रवाई की।
पुराना ठेका खत्म होने के बाद घरों से कूड़ा एकत्रित करने, शहर से उठाने और कैल स्थित प्लांट में निस्तारण का कार्य इसी साल सितंबर माह से पूजा कंसलटेशन एजेंसी द्वारा किया जा रहा है। निगम द्वारा करीब 21 करोड़ 60 लाख रुपये में एजेंसी को ठेका दिया गया है। कूड़ा उठाने वाली एजेंसी पर जीपीएस से नजर रखी जाती है। जीपीएस से ही पता चलता है कि कूड़ा उठाने के लिए एजेंसी की गाड़ी गली में गई या नहीं।
इसके अलावा मौके पर कूड़ा मिलना, समय पर कूड़े का उठान न होने, कर्मचारियों का वर्दी में न होना, ठीक से कूड़ा नहीं उठाना, पोर्टल पर गलत एंट्री, मौके पर गए बिना ही कूड़ा उठाने की रिपोर्ट अपलोड करना आदि कई कारणों से एजेंसी पर कार्रवाई की गई है। वहीं निगम ने शहर में प्रत्येक 10 घरों के बाद आरएफआईडी टैग सिस्टम लगा रखा है।
जैसे ही एजेंसी का वाहन इनके आगे से जाता है तो मैसेज ऑटोमेटिक पोर्टल पर पहुंच जाता है। यदि टैग स्कैन नहीं होता तो इसका मतलब साफ है कि गाड़ी उस एरिया में नहीं जा रही है। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए नगर निगम ने एजेंसी पर पेनल्टी लगाई।
रोजाना निकलता है 250 से 280 मीट्रिक टन कूड़ा
जगाधरी व यमुनानगर शहर से रोजाना 250 से 300 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। घरों से निकलने वाले कूड़े को टिप्पर के माध्यम से कैल स्थित ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट में ले जाया जाता है। जहां पर कूड़े को उसकी श्रेणी के हिसाब से अलग-अलग किया जाता है। इसके लिए एजेंसी ने 173 से ज्यादा वाहनों की व्यवस्था कर रखी है। साथ में 375 कर्मचारी भी लगाए गए हैं।
वर्जन
शहर की सफाई व कूड़ा उठान व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में लगी एजेंसी पर टेंडर की शर्तें पूरी नहीं करने पर विभिन्न मद में जुर्माना लगाने का प्रावधान है। कूड़ा उठान पर ऑनलाइन और जीपीएस मॉनिटरिंग लगातार जारी है। शहरवासियों से अपील है कि यदि कहीं कूड़ा नहीं उठाया जाए तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।