यमुनानगर। रेलवे व टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के इंजीनियरों और विशेषज्ञों की टीम यमुनानगर में रेलवे पुल के निर्माण में कमाल करने जा रही है। यहां टीम पश्चिमी यमुना नहर पर बिना नीचे कोई सपोर्ट दिए लोहे का 1200 टन वजनी 100 मीटर लंबा पुल टिकाने में लगी है। इस काम में लगे प्रोजेक्ट अफसरों की मानें तो हरियाणा में इतनी लंबाई का यह एकमात्र पुल है, जिससे नीचे बिना कोई स्पोर्ट होने पर भी माल गाड़ियों का आवागमन होगा।
पुल का काम ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (माल गाड़ियों के अलग ट्रैक) प्रोजेक्ट के तहत हो रहा है। पहले पुल की लंबाई 80 मीटर थी, पर सिंचाई विभाग के ऑब्जेक्शन पर लंबाई सौ मीटर की गई। इसके डिजाइन फाइनल करने से लेकर साइट पर पुल के अलग-अलग हिस्सों को 70 हजार नट बोल्ट से जोड़ने व अन्य सभी इंस्पेक्शन वर्क में महज छह माह का समय लगा। इसमें 40 फील्ड वर्कर्स ने 20 इंजीनियर और विशेषज्ञ दिन-रात लगे रहे। इसके अलावा रेलवे अफसर और इंजीनियर भी लगातार साइट विजिट पर रहे। ऐसे टीम वर्क से कम समय में पुल तैयार हुआ, जो चार दिन में खिसका कर नहर के एक से दूसरे किनारे तक पहुंचा दिया जाएगा। इसके बाद पुल पर रेल ट्रैक बिछेगा, जिससे माल गाड़ियों का आना-जाना हो सकेगा।
पुल में खास बात ये भी है कि इसके एक तरफ साइड में अलग से रेल कर्मियों के आने-जाने का रास्ता है, जिसे वह रेल ट्रैक की जांच व मरम्मत जैसे कामों में इस्तेमाल कर सकेंगे। जबकि पुराने पुलों में ऐसा रास्ता नहीं है, जहां रेल कर्मियों को पुल के बीच रेल ट्रैक से आना-जाना पड़ता है।
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के अंबाला से चीफ जनरल मैनेजर पंकज गुप्ता ने बताया कि पुल असेंबल करने में करीब छह माह का समय लगा। अब चार दिन में पुल खिसका कर पश्चिमी यमुना नहर के एक से दूसरे किनारे तक पहुंचा दिया जाएगा। इसके बाद इस पर मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक बिछेगा व ट्रायल की प्रक्रिया पूरी होगी। हरियाणा में सौ मीटर लंबाई का यह एकमात्र रेलवे पुल होगा, जिस पर नीचे बिना किसी स्पोर्ट के भी माल गाड़ियों का आवागमन होगा। संवाद
पुल पर एक नजर
लंबाई - 100 मीटर।
वजन- 1200 टन।
नट बोल्ट- 70 हजार।
साइट टीम- 20 इंजीनियर व विशेषज्ञ और 40 वर्कर्स।
रेलवे पुल के साइड में इस तरह से दिया गया है रेलिंग सहित रास्ता। संवाद- फोटो : Yamuna Nagar