जगाधरी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश बंसल की कोर्ट ने पत्नी की हत्या में दोषी रादौर के गांव अलीपुरा निवासी सुरेंद्र कुमार को उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। कोर्ट में करीब दो साल चली सुनवाई के दौरान 16 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सुरेंद्र को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
सितंबर 2011 में मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हुई थी। सुनवाई के दौरान फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रजनीश बंसल ने दोनों पक्षों की दलीलों व गवाहों के बयानों को सुना। इसके बाद कोर्ट ने सुरेंद्र कुमार को पत्नी की हत्या का दोषी करार दिया।
यह है मामला
19 सितंबर 2011 को रादौर पुलिस को दी शिकायत में गांव अलीपुरा निवासी मजरूबा पौली ने कहा था कि करीब तीन साल पहले उसकी शादी सुरेंद्र से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद उसके जेठ मांगेराम, किरण पाल, ज्ञानचंद व जेठानी रेना ने उसे तंग करना शुरू कर दिया। 18 सितंबर 2011 की रात को सभी ने उसके साथ झगड़ा किया। मांगेराम ने उस पर मिट्टी का तेल छिड़क दिया, जबकि अन्य ने माचिस के साथ आग लगा दी। आग लगने के बाद उसने शोर मचा दिया। जब वह बुरी तरह से झुलस गई, तो उसके पति सुरेंद्र ने उसे अस्पताल पहुंचा दिया। जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे चंडीगढ़ पीजीआई में रेफर कर दिया। पीजीआई चंडीगढ़ में पीड़ित महिला ने जज के समक्ष अपने बयान कलमबद्ध करवाए। 24 सितंबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में महिला की शिकायत पर पति सुरेंद्र कुमार व अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था, लेकिन महिला की मौत के बाद पुलिस ने इसमें धारा 302 भी जोड़ दी। पुलिस ने 25 सितंबर को मृतका के पति सुरेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। रिमांड के दौरान पुलिस ने मृतका को जलाने में इस्तेमाल मिट्टी के तेल की कैनी, घटना के समय पहने कपडे़, जो जल गए थे और माचिस की डिब्बी बरामद की। 27 सितंबर को पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। मामले की तफ्तीश के दौरान पुलिस ने पाया कि इस मामले में मृतका के जेठ, जेठानी का कोई हाथ नहीं है, इसलिए उन्हें केस से बाहर निकाल दिया गया। पुलिस के मुताबिक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही झुलसी महिला ने कहा कि 21 सितंबर को मृत बच्चे को जन्म दिया। इसके उपरांत पुलिस ने इस मामले में धारा 316 को जोड़ दिया। पुलिस के मुताबिक जब पीड़िता ने अस्पताल में मरे बच्चे को जन्म दिया, तो सभी की आंखें नम हो गईं।