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सरकारी स्कूल में एडमिशन के लिए मारामारी

Tue, 09 Apr 2013 05:30 AM IST
Yamuna Nagar
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बिलासपुर। जहां एक ओर निजी स्कूल संचालकों को स्कूल में बच्चों के एडमिशन के लिए गांव-गांव भटकना पड़ता है, वहीं बिलासपुर के राजकीय आदर्श संस्कृति विद्यालय में बच्चों के दाखिले के लिए मारा मारी हो रही है। विद्यालय में अभिभावकों को अपने बच्चों को दाखिला दिलाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। अप्रैल माह शुरू होते ही विद्यालय में दाखिला लेने के लिए अभिभावकों की होड़ सी लग गई है।
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उपमंडल बिलासपुर का राजकीय आदर्श संस्कृति मॉडल स्कूल अपने बेहतर परिणाम और अनुशासन के लिए जाना जाता है। इसके कारण बिलासपुर उपमंडल के सढौरा, छछरौली, खिजराबाद, रणजीतपुर क्षेत्र के बच्चों का दाखिला लेने के लिए तांता लगा है। विद्यालय के कार्यकारी प्रधानाचार्य रामपाल ने बताया कि अधिकतर बच्चे आसपास के गांवों से आ रहे हैं। उन्हाेंने बताया कि प्राइमरी स्तर पर 1000 से अधिक बच्चों का दाखिला हो चुका है। लेकिन विद्यालय के पास इन बच्चाें के बैठने के लिए और पढ़ाने के लिए समुचित भवन व अध्यापक नहीं है। उन्हाेंने बताया कि अगर अधिक संख्या में बच्चों का दाखिला हो जाता है तो पूूर्ण सुविधाएं न होने पर बच्चाें की पढ़ाई पर भी विपरीत असर पड़ेगा। प्राइमरी हेड अध्यापक सुधीर कुमार का कहना है कि एक तो गांवों के स्कूलों में पहले ही बच्चों की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है । अगर आसपास के गांवों से इसी तरह बच्चों का दाखिला होता रहा तो उन गांवों के स्कूल पूरी तरह से खाली हो जाएंगे। उन्हाेंने कहा कि अगर इसी तरह से बच्चों की संख्या में बढ़ती जाएगी तो बच्चाें को उत्तम शिक्षा प्रदान करना नाम मात्र रह जाएगा।

मनमानी फीस वसूल रहे प्राइवेट स्कूल
बच्चों को मॉडल स्कूल में दाखिला दिलाने आए अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में समुचित जगह और व्यवस्था नहीं है। इसके कारण अधिकांश बच्चे स्कूल में दाखिला लेने से वंचित रह रहे हैं। बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिला लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जहां प्राइवेट स्कूल बच्चों के दाखिले के नाम पर मनमाना फीस वसूल कर रहे हैं।
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कोट
बीईओ धर्म सिंह राठी का कहना है कि मॉडल स्कूल में प्राइमरी स्तर पर अब तक 1000 से ज्यादा बच्चों का दाखिला हो चुका है। खंड के दूसरे स्कूलों से भी बच्चे स्कूल में दाखिला लेने के लिए पहुंच रहे हैं। कुछ बच्चे अंग्रेजी मीडियम में चलने के लायक नहीं हैं, तो कुछ बच्चे स्कूल द्वारा तय मापदंड पूरे नहीं करते। उनके अभिभावकों को समझाकर दाखिल लौटा दिया जाता है।
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