यमुनानगर। छठ महापर्व को लेकर स्थानीय प्रशासन की ओर से खामियों पर प्रशासनिक लीपापोती की जा रही है। यमुना नहर घाट के किनारे मनाए जाने वाले पर्व के अवसर पर यहां लाखों की संख्या में लोग जमा होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की ओर से औपचारिकताएं तो पूरी की जा रही है, परंतु घाटों पर फैली अव्यवस्था का सही ढंग से निराकरण नहीं किया जा रहा है। दीपावली के छह दिन बाद मनाए जाने वाले छठ महापर्व को मात्र एक दिन शेष बचा है, परंतु प्रशासन की ओर से अब तक यमुना के घाटों की सफाई की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। आलम यह है कि यमुना के घाटों पर गंदगी जमा है और त्योहार के दिन भी फैलने वाले कूड़े कर्कट के निस्तारण का भी कोई प्रबंध नहीं किया गया है। सिटी सेंटर पार्क के पीछे स्थित बॉडी माजरा पुल के समीप घाटों पर छठ के दिन लाखों की तादात में लोग जुटते हैं और यमुना में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं।
यह है घाटों की वर्तमान स्थिति
घाटों की वर्तमान स्थिति अत्यंत दयनीय है। कालोनियों का गंदा पानी व गंदी छोटे नालों के जरिये यमुना में गिर रहा है, वहीं घाटों के किनारे काई व गंदगी जमी है। इस कारण वहां दुर्गंध फैली हुई है, वहीं आने वाले रास्ते पर फैली मिट्टी व गंदगी भी परेशानी का सबब बनने के लिए तैयार है।
यह काम किए जा रहे
स्थानीय प्रशासन की ओर से बॉडी माजरा पुल के पास के घाट पर बाउंड्री वॉल बनाई जा रही है और समय सीमा को देखते हुए इस पर रंग की पुताई भी साथ के साथ की जा रही है। मुख्य घाट होने के कारण यहां भीड़ भी अधिक होती है, जिसे देखते हुए घाट को पक्का किया जा रहा है।
यातायात व्यवस्था बन सकती है समस्या
बॉडी माजरा का पुल अत्यंत व्यस्त मार्ग है। इस मार्ग का प्रयोग लोग उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जाने के लिए शॉर्ट कट के रूप में किया जाता है, वहीं पुल के पार शहरी आबादी का लगभग 10 हिस्सा रहता है, जो इसी रास्ता का प्रयोग आने जाने के लिए करता है। छठ महापर्व के कारण दो दिन यमुना के दोनों ओर घाटों पर भारी भरकम भीड़ रहेगी। ऐसे में यातायात का गुजरना श्रद्धालुओं व अन्य लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। पुलिस की ओर से न तो अब तक यातायात व्यवस्था को लेकर कोई प्रबंध किए गए हैं और न ही ऐसे दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि इन दो दिनों में आने वाले श्रद्धालु अपने वाहन कहां पार्क करेंगे और राहगीर कहां से गुजरेंगे।
पिंडियों का निर्माण हो रहा
छठ के दिन श्रद्धालुओं द्वारा पिंडियों की पूजा-अर्चना की जाती है, परंतु बरसात के दिनों में हुए भूमि कटाव के कारण व पर्व की महत्ता को देखते हुए यहां पिंडियों की संख्या कम हो गई है, जिसके चलते लोगों द्वारा पिंडियों का निर्माण करवाया जा रहा है, जिससे पूजा के लिए आने वाले भक्तों को परेशानी न झेलनी पड़े।