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Yamuna Nagar News: 94 में से 66 डॉक्टर रहे हड़ताल पर, आज भी नहीं देखेंगे मरीज

Tue, 09 Dec 2025 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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सिविल अस्पताल की ओपीडी में लगी लोगों की भीड़। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। स्वास्थ्य विभाग में एसएमओ (सीनियर मेडिकल ऑफिसर) की सीधी भर्ती के विरोध में सरकारी डॉक्टरों सोमवार को दो दिन की हड़ताल पर चले गए। जिलेभर में 94 में से कुल 66 डॉक्टर हड़ताल पर रहे। हड़ताल को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र सिंह ने आयुष विभाग, ईएसआई अस्पताल जगाधरी व एमएम मेडिकल कॉलेज मुलाना से कुल 49 डॉक्टर बुलाए गए थे। इससे ओपीडी का कार्य आंशिक रूप से प्रभावित रहा।
हालांकि जो डॉक्टर बाहर से आकर ओपीडी देख रहे थे। उन्हाेंने मरीजों को पहले से लिखी दवा ही अगले दो से पांच दिनों के लिए रिपीट करवा दी। ऐसे में मरीज दवा लेकर वापस चले गए। जिला नागरिक अस्पताल के 44 में से 25 डॉक्टर, उप जिला अस्पताल जगाधरी में 16 में से 14 डॉक्टर हड़ताल पर रहे। हड़ताल की वजह से आज जिले में मेडिकल, ऑपरेशन का कार्य बंद रहा। वहीं हड़ताल पर रहे 66 डॉक्टरों की छुट्टी का प्रार्थना पत्र रद्द कर दिया गया। वहीं 16 डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
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इमरजेंसी भी हड़ताल का असर देखने को मिला। काउंटर पर बैठे कर्मचारी मरीजों की पर्ची काटने से बचते रहे। कर्मचारी पहले तीमारदारों से पूछते की मरीज कहां पर है। मरीज ट्रामा सेंटर में स्ट्रेचर पर था, फिर भी कर्मचारी उन्हें यह कहते रहे कि पहले डॉक्टर से पूछ कर आओ की पर्ची बनानी है या नहीं। डॉक्टर के हां करने के बाद ही मरीजों की पर्ची बनाई गई।
नागल निवासी राजकुमार को उसका पिता अपने परिजनों लेकर आया था। राजकुमार का दो साल पहले एक्सीडेंट हो गया था। अब तबीयत खराब होने पर परिजन उसे अस्पताल में लेकर आए। परंतु काउंटर पर महिला कर्मचारी ने उसकी पर्ची नहीं बनाई। उसे पहले तीन बार डॉक्टर के पास भेजा गया वहां से हां होने पर पर्ची बनी। इसे लेकर डॉक्टर व कर्मचारी में कहासुनी भी हो गई।
डॉक्टर ने कहा कि मेरे कहने के बाद भी पर्ची क्यों नहीं बनाई। डॉक्टर ने चेकअप के बाद उन्हें हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास भेज दिया। डॉक्टर हड़ताल पर होने की वजह से उनकी जगह दूसरे चिकित्सक थे। जिन्होंने परिजनों से कहा कि अब तो इसकी जितनी हो सके सेवा कर लो या फिर पीजीआई ले जाओ।
डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में ऑपरेशन का कार्य भी प्रभावित रहा। मरीज सुबह से ही ऑपरेशन थियेटर के बाहर बैठे रहे, लेकिन डॉक्टर नहीं आया। जो विशेषज्ञ डॉक्टर आए थे केवल उन्होंने ही कुछ मरीजों की सर्जरी की।
सुबह से डॉक्टर का इंतजार
तिलक नगर की संजोगता का कहना है कि उसके माथे में रसौली है। पांच दिसंबर को वह चेकअप कराने के लिए डॉक्टर के पास आई थी। आज उसकी सर्जरी होनी थी। वह सुबह नौ बजे ही अस्पताल में आ गई थी, लेकिन डॉक्टर नहीं आए। वह जब भी स्टाफ से पूछती तो हर बार एक ही जवाब मिलता कि डॉक्टर थोड़ी देर तक आएंगे, परंतु कोई नहीं आया।
आज होनी थी सर्जरी
शादीपुर के राजन कुमार का कहना है कि उसकी कमर में गांठ बनी हुई है। इसकी सर्जरी के लिए उसे डॉक्टर ने आज सर्जरी की तारीख दी थी। परंतु आज हड़ताल की वजह से उसकी सर्जरी नहीं हो पाई। इसलिए अब वह घर लौट रहा है। अब दो से तीन दिन के बाद ही आएगा।
डॉक्टरों के हित में नहीं है सीधी भर्ती : डाॅ. कालरा
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (एचसीएमएसए) के जिला प्रधान डाॅ. पुनीत कालरा ने बताया कि एसएमओ (सीनियर मेडिकल आफिसर) की सीधी भर्ती डॉक्टरों के हित में नहीं है। जितने डॉक्टर कार्यरत हैं उनमें से करीब 10 को छोड़ कर बाकी सभी हड़ताल में शामिल रहे। हम मरीजों को बेवजह परेशान करना नहीं चाहते, परंतु डेढ़ साल से उनकी मांगे लंबित हैं। कई दौर की बैठक होने के बाद भी उनकी मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। हड़ताल पूरी तरह से सफल रही। हालांकि मुख्यमंत्री मांगों को लेकर सकारात्मक रूख अपनाए हुए हैं।
जितने डॉक्टर हड़ताल पर गए हैं, उनकी जगह आयुष विभाग, ईएसआई और एमएम मेडिकल कॉलेज मुलाना से डॉक्टर बुलाकर ओपीडी को सुचारू रखा गया। किसी भी मरीज को परेशानी नहीं होने दी गई। हड़ताल का जिले में कोई असर नहीं है। - डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।
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डीसी ने अस्पतालों में लगाई धारा 163
डाॅक्टरों की हड़ताल को देखते हुए डीसी प्रीति ने अप्रिय घटना को रोकने तथा शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 लगा दी है। इन आदेशों के तहत सभी सरकारी अस्पतालों के आसपास न तो कोई जनसभा करेंगे और न ही चार या चार से अधिक व्यक्ति एक स्थान पर एकत्रित होंगे। जिला के सभी सरकारी अस्पतालों के आसपास के क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के घातक हथियार जैसे अग्रि शस्त्र, तलवार, बरछा, भाला, लाठी, चाकू व अन्य किस्म के हथियार (सिख समुदाय के प्रतीक कृपाण को छोड़कर) लेकर चलने पर पूर्णरूप से आठ व नौ दिसंबर तथा हड़ताल समाप्ति तक प्रतिबंध रहेगा। यह आदेश पुलिस व अन्य ड्यूटी पर तैनात अधिकारी व कर्मचारियों पर लागू नहीं होंगे।

सिविल अस्पताल की ओपीडी में लगी लोगों की भीड़। संवाद

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