संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार इस समय कुल 59,514 केस विचाराधीन हैं। इनमें 24,441 सिविल और 35,073 आपराधिक (क्रिमिनल) मामले शामिल हैं। इनमें से 41,851 केस ऐसे हैं जो एक साल से अधिक समय से अदालतों में लंबित हैं, जो न्याय में देरी की गंभीर तस्वीर पेश कर रहे हैं।
सिविल मामलों की स्थिति पर नजर डालें तो कुल 24,441 मामलों में से 7,374 केस एक साल से कम समय से विचाराधीन हैं, जबकि 17,067 सिविल केस एक साल से ज्यादा पुराने हो चुके हैं।
इनमें सबसे अधिक 9,075 केस एक से तीन साल के बीच लंबित हैं। इसके अलावा तीन से पांच साल पुराने 4,942 केस, पांच से 10 साल पुराने 2,969 केस और 10 साल से ज्यादा समय से अदालतों में अटके 81 केस शामिल हैं।
वर्षों तक चलने वाले सिविल विवादों के कारण पक्षकारों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आपराधिक मामलों की स्थिति भी चिंताजनक है। जिला अदालतों में 35,073 क्रिमिनल केस विचाराधीन हैं। इनमें से 10,289 केस एक साल से कम अवधि के हैं, जबकि 24,784 केस एक साल से अधिक समय से लंबित चल रहे हैं।
क्रिमिनल मामलों में सबसे ज्यादा 14,400 केस एक से तीन साल पुराने हैं। इसके अलावा तीन से पांच साल पुराने 7,124 केस, पांच से 10 साल पुराने 3,223 केस और 10 साल से अधिक समय से लंबित 37 केस शामिल हैं। लंबे समय तक चलने वाले आपराधिक मामलों का सीधा असर पीड़ितों, गवाहों और आरोपियों सभी पर पड़ता है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि मामलों के तेजी से निपटारे के लिए अदालतों में जजों की संख्या बढ़ाने, तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग और वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। जब तक लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की ठोस व्यवस्था नहीं होती, तब तक हजारों लोग न्याय की प्रतीक्षा करते रहेंगे।
अदालतों में दिसंबर में दर्ज हुए 2,321 मामले
दिसंबर 2025 माह के आंकड़े अदालतों में कामकाज की स्थिति को भी दर्शाते हैं। इस दौरान जिला न्यायालयों में कुल 2,321 नए केस दर्ज किए गए। इनमें 739 सिविल और 1,582 क्रिमिनल मामले शामिल हैं। वहीं अदालतों ने इसी अवधि में कुल 2,213 केसों का निपटारा किया, जिनमें 798 सिविल और 1,415 क्रिमिनल केस रहे। हालांकि निपटाए गए मामलों की संख्या नए मामलों के करीब रही, लेकिन कुल लंबित केसों की संख्या अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।