मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से 48 लाख 40 हजार रुपये से ज्यादा की ठगी हो गई। 15 युवाओं व महिलाओं को अस्पताल में कंप्यूटर ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन, स्टाफ नर्स, एंबुलेंस ड्राइवर व ग्रुप डी के पदों पर स्थायी व डीसी रेट पर रखे जाने का झांसा दिया गया। आरोप जिला अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स पर है।
पीड़ित मंगलवार को भी सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंचे। वहां उन्हें कोई अधिकारी नहीं मिला। लोगों का आरोप है कि अकेले स्टाफ नर्स का नहीं हो सकता। उन्हें शक है कि नर्स के साथ इसमें स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी भी मिले हो सकते हैं। इसलिए इसकी जांच होनी चाहिए। पीड़ितों का आरोप है कि शिकायत देने के बाद भी पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
गांव उन्हेड़ी के सतीश कुमार, मॉडर्न कॉलोनी के सुरेश, ज्योति, सविता, सौरव, गौरव, संदीप, प्रीति, हितेश, रजत, सचिन व परमजीत ने बताया कि सिविल अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स के पास एक युवती काम पर लगी थी। उसे उन्हें बताया था कि उसे पता चला है कि अस्पताल का नया भवन बन रहा है. जिसमें बड़ी संख्या में विभिन्न पदों पर पक्के कर्मचारी रखे जाने हैं।
इस पर वह अस्पताल की स्टाफ नर्स से मिले। नर्स ने उन्हें बताया कि नौकरी के लिए रुपये देने होंगे। इसके लिए 15 लोगों से 50 हजार रुपये से सात लाख रुपये तक लिए गए। बाद में उन्हें पता चला कि अस्पताल में तो कोई वेकेंसी निकली ही नहीं। इसकी शिकायत उन्होंने 19 अप्रैल को एसपी को भी दी थी। पुलिस ने अभी तक इसमें कोई कार्रवाई नहीं की।
पीड़ितों ने बताया कि रुपये लेने के बाद पांच-छह लोगों को अस्पताल में काम पर भी बुलाया गया। किसी को सुबह नौ बजे तो किसी को दोपहर दो बजे अस्पताल में ड्यूटी पर बुलाया जाता था। उनसे फाइलें एक कमरे से दूसरे में लाने ले जाने का काम कराया गया। कुछ दिन बाद उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
स्टाफ नर्स के लिए ज्योति से 5.50 लाख रुपये, एंबुलेंस ड्राइवर के लिए शाहरुख खान से 3.50 लाख रुपये, ग्रुप डी के लिए सविता से 3.30 लाख, कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए सौरव से 4 लाख, गौरव से 3.70 लाख, मदन से 4.25 लाख, ग्रुप डी के लिए बिंदिया से 7 लाख, कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए संदीप सैनी से 1.75 लाख, ग्रुप डी में डीसी रेट के लिए संदीप से 50 हजार, डीसी रेट पर स्टाफ नर्स के लिए प्रीति से 70 हजार, फॉर्मेसी में सतीश कुमार से 4.50 लाख, इलेक्ट्रिशियन के लिए हितेश स 2.25 लाख, कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए रजत से 4 लाख, डीसी रेट पर ग्रुप डी में सचिन से 40 व परमजीत से 50 लाख रुपये हड़पने का आरोप है।
सिविल अस्पताल की पीएमओ डॉ. पूनम चौधरी ने बताया कि यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। यह मुझसे पहले का मामला होगा। इस बारे में सिविल सर्जन ही कुछ बता सकते हैं।
सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से रुपये ठगने का मामला संज्ञान में आया है। इस बारे में उन्होंने आरोपी नर्स से भी बात की है। वह रुपये लेने की बात से साफ इंकार कर रही है। अब पुलिस ही इस मामले की जांच करेगी. जिसने भी रुपये लिए हैं उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।