फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Yamuna Nagar News: मरम्मत के इंतजार में 41 सड़कें, लोग परेशान

विज्ञापन
विज्ञापन
जिला परिषद को ट्रांसफर हुई 136 में से 41 सड़कें बजट मिलने से मरम्मत को तरस गई हैं। जिला परिषद ने सभी सड़कों की मरम्मत के लिए करीब 18 करोड़ रुपये मांगे थे। 95 सड़कों की रिपेयर के लिए करीब 1.30 करोड़ रुपये के टेंडर लग चुके हैं, लेकिन 41 सड़कों पर अभी कोई फैसला नहीं हो सका है। इन सड़कों की हालत काफी खस्ता हो चुकी है। लोग टूटी सड़कों के गड्ढों में हिचकोले खाने को मजबूर हैं। कई बार पत्राचार होने के बाद आश्वासन तो मिल रहे हैं, लेकिन बजट नहीं मिल रहा। अब सर्दी पड़ने लगी है। तापमान में गिरावट आने व कोहरा छाने के दौरान सड़कें नहीं बन पाएंगी। ऐसे में लोगों को अभी सुहाने सफर के लिए कई माह का इंतजार करना पड़ेगा। टूटी सड़कों को लेकर लोगों में रोष पनप रहा है।
विज्ञापन

प्रदेश सरकार के आदेशों के बाद पिछले दिनों मार्केटिंग बोर्ड की कई सड़कें जिला परिषद को ट्रांसफर कर दी गई थी। इन सड़कों की मरम्मत और निर्माण अब जिला परिषद ही करेगी। मार्केटिंग बोर्ड ने कुल 138 सड़कें जिला परिषद को हैंडओवर की दी। इनमें से दो सड़कों को जिला परिषद ने मार्केटिंग बोर्ड को वापस कर दिया। जिसके बाद कुल 136 सड़कें जिला परिषद के पास चली गई। 136 में से 95 सड़कें ऐसी हैं जिनकी वार्षिक मरम्मत होती है। मरम्मत के लिए करीब एक करोड़ 30 लाख रुपये के टेंडर लगाए गए हैं। बाकी बची 41 सड़कों की विशेष मरम्मत करवाई जानी है। परंतु प्रदेश सरकार से इनके लिए अभी तक बजट नहीं मिला है।



136 सड़कों की कुल लंबाई 225 किलोमीटर है। 95 सड़कें 133 किलोमीटर लंबी तथा 41 सड़कों की लंबाई 92 किलोमीटर है। शहर से लेकर गांवों तक के लोग इन सड़कों का इस्तेमाल सफर के लिए करते हैं। परंतु काफी समय से सड़कों की हालत ज्यादा खराब होने से लोग काफी परेशान हैं। इस बार तो बारिश भी ज्यादा हुई जिससे 200 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी घुसा था। बाढ़ के पानी ने इस बार सड़कों को काफी नुकसान पहुंचाया। ऐसे में सड़कों की मरम्मत काफी पहले हो जानी चाहिए थी।
विज्ञापन


जिला परिषद के पार्षद धर्मपाल तिगरा व गुरजीत कौर का कहना है कि चुनावों के बाद से जिला परिषद ने अब तक कोई काम नहीं किया। लोग छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला पार्षदों के पास चक्कर काट रहे हैं। मानसून में हुई बारिश के बाद सड़कों का टूट कर बुरा हाल हो चुका है। पता नहीं कब बजट आएगा और कब टेंडर लगने के बाद इनका काम शुरू होगा। टूटी सड़कों पर चलने से लोग परेशान हो गए हैं।

जिला परिषद के चेयरमैन रमेश ठसका ने बताया कि मार्केटिंग बोर्ड से जो सड़कें जिला परिषद को हैंडओवर हुई थी उनके लिए करीब 18 करोड़ रुपये का बजट सरकार से मांग रखा है। कुछ सड़कों की मरम्मत हो गई है। जो बची हैं बजट मिलते ही उनकी भी मरम्मत करवा दी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें