अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। छछरौली के पूर्व विधायक रोशन लाल आर्य को यमुनानगर पुलिस ने धोखाधड़ी के एक मामले में कोर्ट में पेश कर तीन दिन की रिमांड पर लिया है। उन पर दिल्ली के विशाल अग्रवाल ने गुड़गांव में उसकी प्रापर्टी का सीएलयू दिलवाने का आरोप लगाया है। रोशनलाल आर्य को कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस की ओर से दलील दी कि गई सीएलयू करवाने के एवज में लिए गए 30 लाख रुपये की रिकवरी करनी है।
शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे जिला पुलिस पूर्व विधायक रोशन लाल आर्य को जिला कोर्ट लेकर आई। उनके साथ डीएसपी हेडक्वार्टर आदर्शदीप सिंह भी थे। कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस उनकी तीन दिन की रिमांड लेने में कामयाब रही। यमुनानगर पुलिस के अनुसार दिल्ली निवासी विशाल अग्रवाल ने शिकायत दी है कि तीन साल पहले रोशन लाल आर्य ने खुद को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का करीबी बताते हुए उसकी गुड़गांव की प्रापर्टी का सीएलयू दिलवाने का भरोसा दिया। इसके एवज मेें रोशनलाल आर्य ने उससे 30 लाख रुपये ले लिए जो कि वापस नहीं किए।
मुझे फंसाया गया है : रोशनलाल आर्य
रिमांड मिलने के बाद रोशनलाल आर्य ने कहा कि पुलिस ने उन पर झूठा मामला दर्ज किया है। पूरा प्रदेश जानता है कि 2010 के बाद से मेरे भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ 36 का आंकड़ा है। मुझ पर 30 लाख रुपये जम्मू में छिपाने का आरोप लगा है। भला मैं रुपये जम्मू में क्यों छिपाऊंगा। अब तक तो उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते में मैने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय लिया है। रिमांड के बाद मैं मोदी जी से मिलकर उन्हें प्रदेश के सारे हालात के बारे में बताऊंगा।
बलि का बकरा बनाने का आरोप
रोशनलाल के बेटे जितेंद्र आर्य ने प्रदेश सरकार पर उनके पिता को जाट आरक्षण को लेकर प्रदेश में हुई हिंसा के मामले में बलि का बकरा बनाने का आरोप मढ़ा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने सुनियोजित तरीके से उनके पिता को फंसाने का षड़यंत्र रचा। गत 26 अप्रैल 2014 को सुबह पुलिस ने उनके माडल टाउन स्थित निवास पर पुलिस ने पूरे लाव लश्कर के साथ रेड की। इस दौरान रोशन लाल आर्य घर पर नहीं थे। रेड के करीब डेढ़ घंटे बाद ही फिरोजपुर झिरका और फिर शाम को रेवाड़ी मेें उनके पिता के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया। इसी दिन देर शाम को यमुनानगर पुलिस ने उनके पिता के खिलाफ दिल्ली के विशाल अग्रवाल की शिकायत पर 30 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया गया। लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। यह शिकायत आईजी करनाल को लिखित में दी गई थी। गत 18 मई को माननीय हाईकोर्ट ने फिरोजपुर झिरका व रेवाड़ी मेें दर्ज मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। उस दिन प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि रोशनलाल आर्य के खिलाफ प्रदेश में तीन जगह (कैथल, रेवाड़ी व फिरोजपुर झिरका) में आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस समय यमुनानगर में दर्ज किए गए धोखाधड़ी के मामले का कोई जिक्र नहीं किया गया था।
रोशनलाल आर्य का राजनीतिक कैरियर
आपातकाल के दौरान रोशनलाल आर्य 19 महीने जेल में रहे थे। इस कारण प्रदेश सरकार की ओर से कुछ महीने पहले उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। आपातकाल के दौरान रोशनलाल आर्य कुरुक्षेत्र युनिवर्सिटी में हरियाणा छात्र संघर्ष समिति के जरनल सेक्रेटरी थे। 80 के दशक में वह चौ. चरण सिंह की पार्टी बीएलडी के साथ जुड़े। वर्ष 1982 में वह इस पार्टी से छछरौली से विधायक चुने गए। वर्ष 2000 में वह कांग्रेस से जुड़ गए। प्रदेश में हुड्डा शासन के दौरान उनकी तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से नजदीकियां रही। वर्ष 2006 से 2008 तक वह हरियाणा सीड डेवलेपमेंट कारपोरेशन के चेयरमैन रहे। वर्ष 2010 में जाट आरक्षण का मुद्दा उठने पर रोशनलाल आर्य ने जाट आरक्षण का विरोध किया। इसके बाद से उनकी भूपेंद्र सिंह हुड्डा से दूरियां बढ़ती चली गई। वर्ष 2011 में रोशनलाल आर्य के खिलाफ एक बिजनेस मैन ने शिकायत दी कि उन्होंने उसके एक लाख रुपये नहीं लौटाए। इस पर सिटी थाने में रोशनलाल के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।