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लंपी वायरस की चपेट में आए 2000 गोवंश, पशुपालकों में हड़कंप

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जिले में पशुओं में लंपी वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इससे पशुपालक दहशत में हैं। पशुपालन विभाग के रिकॉर्ड में ही लंपी वायरस के 2000 केस ट्रेस हो चुके हैं, वहीं इससे अलग भी कई मामले हो सकते हैं। इस तरह गोवंश में तेजी से फैल रहे लंपी वायरस ने पशुपालन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
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लंपी वायरस को लेकर विभाग की 25 टीमें गठित कर दी गई हैं। विभागीय अधिकारी की मानें तो ये टीमें वायरस की रोकथाम के लिए प्रभावित क्षेत्रों में नियमित विजिट कर रही हैं। जबकि कई पशुपालकों का आरोप है कि लक्षण ग्रस्त गोवंश के इलाज में प्रशासन से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।
लंपी वायरस के लक्षण गायों में ज्यादा मिल रहे हैं। पशुपालक संदीप, बलविंदर सिंह ने बताया कि उन समेत रादौर क्षेत्र में कई गांवों में कई गायों में बुखार होने के बाद पैर से शुरू होकर पूरे शरीर पर गांठ जैसे नरम छाले पड़ गए। ये छाले फटने पर जख्म बन गए। कई गायों के आंख व नाक से स्राव, मुंह से लार बहने लगी। इन सभी लक्षणों को चिकित्सक लंपी वायरस का बता रहे हैं। चिकित्सकों की सलाह पर ऐसे लक्षणों वाली गायों को अलग रख रहे हैं, ताकि अन्य गाय पशु सुरक्षित रहें। इस तरह के लक्षणों के बाद कई गायोें की मौत भी हो चुकी है, पर उसमें विभाग ने लंपी वायरस के बजाए अन्य बीमारी को मौत की वजह माना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी अधिक गायों के वायरस के लक्षणों से पीड़ित होने के बाद भी प्रशासन से इलाज में कोई मदद नहीं मिल रही। इसी मांग में भाकियू (चढूनी) डीसी को ज्ञापन भी दे चुकी है, पर फिर भी पीड़ित गोवंशों की जांच करने टीमें नहीं आ रही हैं।
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दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स के उपप्रधान जितेंद्र लांबा ने बताया कि अकेले दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स की तीन डेयरियों में पांच गायें लंपी वायरस के लक्षणों से ग्रस्त हैं। बबलू व राहुल की दो-दो, राजू की एक गाय है। इन गायों से बाकी गाय व भैंसों से अलग कर अपने स्तर पर चिकित्सक बुलाकर इलाज व रोकथाम के उपाय कर रहे हैं। ऐसे ही रायपुर, कैल, औरंगाबाद कॉम्प्लेक्स में कई गायों में लक्षण पता चले हैं। लेकिन चारों कॉम्प्लेक्स में सरकारी स्तर पर किसी विभाग की टीम जांच को नहीं पहुंची है। शुक्रवार को दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स में जलभराव व अन्य दिक्कतों को लेकर डीसी को ज्ञापन देने के साथ लंपी वायरस की रोकथाम के लिए चारों डेयरी कॉम्प्लेक्स में विभागीय टीमें भेज मदद की मांग भी की गई।
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रोकथाम के प्रयास में लगी हैं विभागीय टीमें
पशुपालन विभाग से उपनिदेशक डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि जिले में विभाग लंपी वायरस से ग्रस्त 2000 केस ट्रेस कर चुका है। एक्शन मोड पर 25 विभागीय टीमें गठित कर दी गई हैं, जो प्रभावित क्षेत्रों में रेगुलर विजिट कर वायरस की रोकथाम के प्रयास में लगी हैं। क्योंकि वायरस होने पर वैक्सीनेशन नहीं कर सकते हैं, इसलिए पीड़ित गोवंश को अन्य पशुओं को अलग रखने की सलाह दी जा रही है, ताकि वायरस से स्वस्थ गोवंश व अन्य पशुओं को सुरक्षित रखा जा सके। साथ ही विभाग के पास जो दवाई उपलब्ध हैं, वो दे रहे हैं। लंपी वायरस से मौत का प्रतिशत एक से पांच प्रतिशत ही रहता है, इसलिए इससे पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है। जिन गोवंश की मौत हुई भी हैं, वह पहले से लीवर, लंग्स या अन्य किसी बीमारी से पीड़ित रहे हैं।
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