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Yamuna Nagar News: संपत्ति कर के बकायेदारों पर लगेगा 18 फीसदी ब्याज

Wed, 02 Apr 2025 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। नए वित्त वर्ष 2025-26 में संपत्ति कर के साथ बकायेदारों को 18 फीसदी ब्याज की मार झेलनी पड़ेगी। साथ ही बड़े बकायेदारों को संपत्ति सीलिंग की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। चूंकि नगर निगम की ओर से 18 फीसद ब्याज से बचने के लिए 31 मार्च तक संपत्ति कर जमा करने की मोहलत दी गई थी, पर इस अवधि में मालिकों ने संपत्ति कर जमा नहीं कराया।
ऐसे ही लंबे समय से संपत्ति कर न देने पर बड़े बकायेदारों को भी संपत्ति सीलिंग के नोटिस जारी हुए थे, उनमें भी अधिकांश ने संपत्ति कर का भुगतान नहीं किया। अब नए वित्त वर्ष में संपत्ति कर की रिकवरी के लिए नगर निगम अफसर सख्ती बरतने जा रहे हैं। एक ओर बकायेदारों से 18 फीसदी ब्याज सहित संपत्ति कर वसूलने की योजना है, वहीं बड़े बकायेदारों की संत्तियाें को सीलिंग करने की तैयारी है।
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नगर निगम की आय का सबसे बड़ा स्रोत संपत्ति कर है। इससे शहर के विकास कार्य व नगर निगम के खर्चे सिरे चढ़ पाते हैं। नगर निगम अफसरों ने वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में संपत्ति कर से करीब 25 करोड़ आय का लक्ष्य रखा था, पर 31 मार्च को वित्त वर्ष के आखिरी दिन तक 15 करोड़ 52 लाख रुपये संपत्ति कर जमा हो पाया। बजट लक्ष्य से कम आय की वजह इस साल में आए तीन चुनाव भी रहे। हालांकि वित्त वर्ष की शुरुआत में नगर निगम अफसरों ने बकायेदारों को कई बार नोटिस जारी किए।
इसमें बकाया व जवाब न देने पर सीलिंग कार्रवाई के चेतावनी दी, पर लोकसभा फिर विधानसभा चुनाव के चलते बकायेदारों पर सीलिंग कार्रवाई नहीं हो पाई। नवंबर-दिसंबर में 94 करोड़ रुपये के बकायेदार 2621 संपत्ति धारकों को अंतिम नोटिस में सीलिंग कार्रवाई की चेतावनी दी। इनमें संपत्ति कर के बकायेदारों से बकाया या जवाब न आने पर 15 जनवरी से सीलिंग कार्रवाई शुरू हुई। इसमें 20 दिन में संपत्ति कर के 26 बकायेदारों की संपत्तियां सील हुई।
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ये कार्रवाई भी चार फरवरी को निकाय चुनाव की घोषणा पर लगी आचार संहिता के कारण रुक गई। मार्च में निकाय चुनाव संपन्न होने पर निगम अफसरों ने बकायेदारों को 31 मार्च तक संपत्ति कर जमा कराने की मोहलत दी। साथ ही एक अप्रैल से 18 फीसदी ब्याज सहित संपत्ति कर वसूलने और बड़े बकायेदारों पर संपत्ति सीलिंग की कार्रवाई की चेतावनी दी। इसका असर यह रहा कि वित्त वर्ष के अंतिम सप्ताह में करीब तीन करोड़ 35 लाख रुपये संपत्ति कर जमा हुआ। लेकिन अभी भी सैकड़ों बकायेदारों पर करोड़ों रुपये का संपत्ति कर बकाया है।
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