अवैध खनन रोकने के लिए तमाम प्रयास फेल होने के बाद अब हाईटेक तरीके से निगरानी का फैसला लिया गया है। इसके तहत सैटेलाइट मैपिंग, जीपीएस, माइनिंग सर्विलांस सिस्टम और ड्रोन का प्रयोग किया जाएगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों पर सहारनपुर और यमुनानगर के अधिकारियों की मीटिंग में हाइटेक तरीकों पर विस्तृत चर्चा हुई और फैसला लिया गया कि दोनों राज्यों के अधिकारी डिजीटलाजेशन के तमाम तरीके अपनाकर अवैध खनन रोकने का काम करेंगे। इसमें ड्रोन एप्लीकेशन, एमएसएस, जीपीएस आदि अत्याधुनिक सिस्टम से जुड़े सर्विलांस को शामिल किया जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा दो साल पहले लांच किए गए एमएसएस एप के सहारे कोई भी व्यक्ति अपने एंड्रायड फोन के जरिए अपनी शिकायत अधिकारियों तक भिजवा सकता है। हालांकि इस एप पर अभी यमुनानगर की लाइव लोकेशन अपडेट नहीं है, लेकिन इसके कॉर्डिनेट सिस्टम पर खनन विभाग द्वारा काम किया जा रहा हुआ।
कारगर है एमएसएस एप
भारतीय खनन ब्यूरो व भास्कराचार्य इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशंस ने करीब दो साल पहले माइनलिंग सर्विलांस सिस्टम तैयार किया था। इससे स्वीकृत खदान के 500 मीटर घेरे में किसी भी प्रकार के खनन की सैटेलाइट के माध्यम से जांच ही जा सकती है। गड़बड़ी मिलने पर ब्यूरो संबंधित जिलों के अफसरों को कार्रवाई के लिए ऑनलाइन पत्र भेजता है। इसका कंट्रोल रूम आईबीएम के मुख्यालय में है। केंद्र सरकार के माइनिंग सर्विलांस सिस्टम यानि एमएऋसएस एप के बाद राज्य सरकार ने भी इसी तरह को-ऑर्डिनेट सॉफ्टवेयर की सहायता से मैपिंग सिस्टम पर काम शुरू किया है। इसके बनने के बाद खनन, पंचायत और सिंचाई विभाग को जिले में खनन की प्रत्येक एक्टिविटी पर नजर रखना आसान हो जाएगा।
अवैध खनन की मिलेगी लाइव जानकारी
अत्याधुनिक सिस्टम के तहत प्रत्येक खनन प्वाइंट का एक निश्चित चिन्ह मैप पर लगाया जाएगा। इन प्वाइंट्स पर खनन की सीमा के 500 मीटर के अंदर अवैध माइनिंग गतिविधियों को पकड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही खनन विभाग को हर महीने सभी जगहों की सैटेलाइट तस्वीरें भी हासिल होगी। यानी अधिकारी अपने ऑफिस में बैठे-बैठे ही अवैध खनन का पता लगा सकेंगे।
यमुना में अवैध खनन लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पर रोक के लिए तमाम तरह के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अवैध माइनिंग रुक नहीं रही है। यूपी और हरियाणा के अधिकारियों की मीटिंग में प्रस्ताव रखा था कि ड्रोन और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाएं तो अवैध माइनिंग की लाइव लोकेशन पता चल सकती है और समय रहते इस पर कार्रवाई की जा सकती है। दोनों राज्यों के अधिकारियों ने इस पर सहमति जताई है और सरकार के पास प्रस्ताव को भेजने का फैसला लिय है।-हरिदेव कंबोज, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से अवैध खनन के बारे में समय रहते पता चल सकता है। विभागीय स्तर पर एमएसएस एप के कॉ-आर्डिनेट सिस्टम तैयार किया जा रहा है। फिलहाल मैनुअल शिकायतें मिलती हैं, जिन पर कार्रवाई की जाती है।
संजय सब्बरवाल, जिला खनन अधिकारी