यमुनानगर। सूरत अग्निकांड के बाद भी नगर निगम ने अभी तक शहर में नियमों के खिलाफ चल रहे कोचिंग सेंटर व एजुकेशन एकेडमी चलाने पर ढील बरत रही है। नियमों को ताक में रखकर चल रहे ऐसे शिक्षण संस्थानों का जिम्मेदार नगर निगम है। शहर में छोटे बड़े मिलाकर करीब सवा सौ कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। किसी भी कोचिंग सेंटर व एजुकेशन एकेडमी के पास इसके लिए परमिशन नहीं है, न ही नगर निगम के पास इसका कोई रिकार्ड है।
चूंकि नगर निगम अधिनियम की धारा 331 के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। शहर में चल रहे सभी कोचिंग सेंटर व एजुकेशन एकेडमी किसी के पास रजिस्ट्रेशन नहीं है। या यूं कहीं कि भविष्य बनाने के चक्कर में बच्चों का जीवन दांव पर लगा हुआ है और इसका जिम्मेदार सीधे-सीधे नगर निगम है। जिस तरह शहर में कोचिंग सेंटर व एजुकेशन एकेडमी चल रही हैं ऐसे में सूरत जैसा हादसा हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी आखिर लेगा कौन। जिन पर इसकी जिम्मेदारी है वे तो उदासीन बैठ सिर्फ ड्यूटी का वक्त का काट रहे है। यही कारण है कि एक सप्ताह बाद भी प्रशासन आंख मूंदे यह सब होते देख रहा है। अभी तक प्रशासन ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि उनके पास शहर में चल रहे ऐसे संस्थानों की कोई जानकारी नहीं है।
संस्थानों में नहीं किसी तरह के सुरक्षा उपकरण
कोचिंग सेंटर व एजुकेशन एकेडमी संचालक आपके बच्चों का भविष्य बनाने का दावा करके उनका जीवन किसी तरह दांव पर लगा रहे हैं। इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि किसी भी कोचिंग सेंटर में अग्निश्मन यंत्र सहित अन्य सुरक्षा यंत्रों का इंतजाम नहीं है।
संर्कीण जगह में चल रहे 40-40 बच्चों के बैच वाले सेंटर
कोचिंग सेंटर व एजुकेशन एकेडमी चलाने के लिए नगर निगम के तहत नियम तय है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के चलते है। दूसरों को सिद्धांतों का पाठ पढ़ाने वाले स्वयं इन्हें रौंद रहे हैं। संर्कीण गलियों में ऐसे कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जिनके एक एक बैच में 40-40 बच्चे कोचिंग लेते हैं। ऐसे में यहा आपात के समय सहायता पहुंचाना बेहद मुश्किल होगा।
आपात के समय निकलने के लिए केवल एक ही रास्ता
आग लगने, भूकंप आने जैसी आपदा के समय बच कर निकलने के लिए भी पर्याप्त बंदोबस्त नहीं है। शहर में चल रहे किसी भी संस्थान में आपदा के समय बचकर निकलने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है। केवल एक ही रास्ता, सीढ़ी है। जिसका प्रयोग किया जा सकता है। ऐसी परिस्थितियों में स्वयं व दूसरों के बचाव में ही काफी नुकसान हो जाएगा।
सवा सौ से ज्यादा कोचिंग सेंटर व एकेडमी, अभिभावकों को भी नहीं सुध
शहर में छोटे बड़े कोचिंग सेंटर व एजुकेशन एकेडमी की संख्या करीब सवा सौ है। इसका सटीक संख्या प्रशासन के पास भी नहीं है। वहीं यहां कोचिंग ले रहे स्टूडेंट्स के अभिभावकों ने भी कभी सेंटर व एकेडमी के ढांचे व यहां सुरक्षा बंदोबस्त के बारे कभी न तो पूछताछ की और न ही इसे लेकर कभी चिंता जाहिर की। जिस कारण संचालक सिर्फ अपने फायदे के लिए मासूम बच्चों की जिंदगियों से खिलवाड़ कर रहे हैं।
कुछ ऐसा रहा नगर निगम कमिश्नर का जवाब
इस बारे जब नगर निगम कमिश्नर पूजा चांवरिया से जब बात करनी चाही, तो उनका रवैया बेहद ही उदासीन मिला। पहले तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। जब फोन उठाया तो बोलीं कि उनके सरकारी नंबर पर बात करें। जब लैंड नंबर डॉयल किया, तो वह नहीं लगा। जिसके बाद शाम फिर उनके निजी नंबर पर बात की, तो मैडम ने वहीं बात दोहराई। जब इस बारे पूछा गया, तो बेहद गंभीर मुद्दा उन्होंने कुछ इस तरह चलता कर दिया।
कमिश्नर से बातचीत के अंश
सवाल- नगर निगम ने कभी ऐसे संस्थानों की जांच नहीं की क्यूं?
जवाब- फायर वीक में हमारी टीम हर जगह गई थी। वहां भी गई थी, हम दोबारा फिर भेज देंगे।
सवाल- नगर निगम में कितने कोचिंग सेंटर चल रहे हैं?
जवाब- देखो जी, जो शहर में हैं उनका तो पता ही है।
सवाल- नगर निगम के अधिनियम 331 के तहत परमिशन लेकर ही ऐसे संस्थान चलाए जाते हैं?
जवाब- इसका पता नहीं है, पता करवा लिया जाएगा।
सवाल- कितने संस्थान ऐसे हैं, जिन्हें नगर निगम परमिशन है?
जवाब- पता नहीं, इसका पता करवाया जाएगा।