यमुनानगर। बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं मिलने से नाराज 28 गांवों के 250 किसानों ने सोमवार को नवनिर्मित एनएच 344 कैल से कलानौर बाइपास पर श्रीगुरुद्वारा साहिब भंभौली के पास सुबह नौ बजे धरना शुरू कर दिया। किसानों के साथ भाकियू प्रदेशाध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह चढूनी भी धरने पर बैठे। किसानों ने जिला प्रशासन और एनएचएआई के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया। धरने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। मौके पर पुलिस की गाड़ियां व पुलिस फोर्स, वॉटर कैनन लेकर एसडीएम सतीश कुमार, सीटीएम सोनूराम और डीएसपी प्रदीप मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन शाम को छह बजे तक किसान नहीं माने। यानि नौ घंटे तक किसान धरने पर बैठे रहे। इस दौरान किसान नेताओं ने धरनारत किसानों को संबोधित भी किया। किसानों ने छह जून तक धरना जारी रखने का निर्णय लिया है। फिलहाल किसान छह जून तक सुबह नौ बजे से शाम को पांच बजे तक धरना देंगे। यदि फिर भी मसला हल नहीं हुआ तो किसान हाईवे पर आकर आंदोलन करेंगे और अपनी जमीन पर कब्जा लेकर ट्रैफिक रोक देंगे।
25 सदस्यीय किसानों की बनाई कमेटी
गुरनाम सिंह चढूनी की अध्यक्षता में 25 सदस्यीय किसानों की एक कमेटी का गठन किया गया। इसमें गधौला के गुरविंद्र सिंह, लंडौरा के हरमिंद्र सिंह, मिल्क माजरा के सुरजीत सिंह, गधौली के करनैल सिंह, गोलनपुर से रिखीराम, बहादरपुर मंगतराम कपूर, रोड छप्पर के दविंद्र सिंह, रूलाखेड़ी से जगबीर सिंह, सुढैल से गुरनाम सिंह, सुढल से संदीप, गुगलों से रोहताश, खंडवा से राजेश, हरगढ़ के जसविंद्र सिंह, रमनदीप, करहेड़ा खुर्द के दिलबाग सिंह, पांजूपुर के महीपाल सिंह, तिगरी के राजेश, हरिपुर कांबोज के चंद्रपाल, कलानौर अमरीक सिंह, मंडौली के अब्दुल रातार व हरनौल के गुरमीत सिंह के समेत चार और सदस्यों को कमेटी में शामिल किया गया। इसी कमेटी से मामले से जुड़े फैसलों पर चर्चा होने के बाद ही आगे की रणनीति तय होगी।
यह है पूरा मामला
भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी, प्रदेश सचिव हरपाल सुढल, बलकार सिंह व जसविंद्र सिंह आदि ने बताया कि कैल बाइपास के निर्माण के लिए जिले के करीब ढाई सौ किसानों की 427 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। साल 2013 में सरकान ने जमीन के हिसाब से किसानों को प्रति एकड़ 25 लाख, 30 लाख तथा 35 लाख रुपए का मुआवजा दिया था। लेकिन यह मुआवजा किसानों को नाकाफी लगा। जिस पर उन्होंने उचित मुआवजे की मांग की। इसके बाद यह आर्बिट्रेशन द्वारा 16 अक्तूबर 2018 को किसानों को बढ़ा हुआ देने का फैसला किया गया। इसके तहत प्रति एकड़ 42 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्णय था। कानूनी तौर पर सात दिन में पैसे देने का नियम है। परंतु फैसले के बाद छह माह बाद भी किसानों को उनका बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं दिया गया है।
शर्त को ठुकराया, आंदोलन करने का फैसला
दरअसल, कैल से कलानौर तक 23 किमी. लंबा बाइपास जून 2018 में बनकर तैयार हुआ था। किसानों ने मुआवजे बढ़ाने की मांग को लेकर आर्बिट्रेटर के पास केस किए थे। करीब छह माह पहले ही आर्बिट्रेटर ने किसानों की एक्वायर जमीन का प्रति एकड़ 17.50 लाख रुपए मुआवजा बढ़ाया है। यह बढ़ा हुआ मुआवजा एनएचएआई दे नहीं रहा और एनएचएआई इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में चला गया है। वहीं किसानों ने नलवी नहर में अधिग्रहित जमीन के मामले में हाईकोर्ट के आदेश और अन्य एरिया में अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को आधार बनाकर कोर्ट में याचिका दायर की है। वहीं आर्बिट्रेटर के फैसले के अनुसार बढ़ा मुआवजा देने के लिए किसानों ने एनएचएआई के अधिकारियों ने किसानों के सामने शर्त रखी थी कि अगर किसान कोर्ट केस वापस लेकर यह लिखकर दें कि ये कोर्ट में मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर नहीं आएंगे तो उन्हें आर्बिट्रेटर के फैसले के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। इस शर्त को किसानों ने ठुकरा कर आंदोलन करने का फैसला लिया है।
किसानों के इस मामले में मैंने उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया है। वहीं से निर्णय आना है। उम्मीद है किसानों की समस्या का समाधान हो जाएगा।
-सोनू राम, सीटीएम।