छछरौली। काला पीलिया ने गांव भगवानपुर को में 40 लोग ग्रस्त हो चुके हैं। इनमें एक की हालत गंभीर होने पर पीजीआई रेफर किया जा चुका है। रविवार को एक महिला जोगिंद्रो की मौत हो चुकी है। गांव दादूपुर और एरिया के अन्य गांव में भी कई मरीज पीलिया से पीड़ित है, जिन्हें काला पीलिया (हेपेटाइटिस-सी) बताया जा रहा है। उधर, काला पीलिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। विभाग ने फौरन डॉक्टरों की टीम गांव में भेजी। टीम ने यहां 25 लोगों के ब्लड सैंपल लेकर उन्हें दवाएं दी। टीम ने सैंपलों को जांच के लिए लैब में भेज दिया है, जिनकी रिपोर्ट आनी बाकी है।
जांच के लिए टीम का गठन
स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में गांव में बीमार लोगों के रक्त की जांच के लिए टीम का गठन किया है। गांव में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 25 लोगों के रक्त के सैंपल लिए, जिनमें से 6 पुरुष और 19 महिलाएं शामिल हैं। हालांकि विभाग की तरफ से गांव में काला पीलिया के लक्षण से इनकार किया जा रहा है, लेकिन गांव में फैली बीमारी का पता लगाने के लिए टीम ने सैंपल जांच के लिए करनाल भेज दिए हैं। गांव की सरपंच आशा ने बताया कि गांव में बीमारी ने अपने पांव पसार रखे हैं। इससे बीते दिनों एक महिला की मौत हो गई और उसी बीमारी से अन्य लोग भी ग्रस्त हैं।
पीलिया से गांव में 40 से अधिक लोग हैं ग्रस्त
बताया जा रहा है कि गांव भगवानपुर में गांव के पास लगी प्लाईवुड फैक्टरी से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी और गंदे पानी की वजह से गांव पीलिया की चपेट में आया है। गांव में इस समय पीलिया से ग्रस्त 40 मरीज हैं। कुछ दिन पहले गांव की एक महिला की पीलिया से मौत भी हो चुकी है। गांव के सरपंच व ग्रामीणों का कहना है कि गांव के साथ लगी फैक्टरियों के बारे में बीडीपीओ को भी शिकायत दे चुके हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दो माह से गांव में पीलिया पीड़ित बढ़े
भगवानपुर सरपंच आशा ने बताया कि दो माह से गांव में पीलिया के मरीज निरंतर बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव के पास तकरीबन एक साल से प्लाइवुड फैक्टरियां लग गई हैं। उनका गंदा और केमिकल युक्त पानी फैक्टरी द्वारा जमीन के अंदर ही दबाया जा रहा है। इसका खामियाजा सीधे तौर पर ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि भगवानपुर गांव को साफ-सफाई के मामले में सम्मानित भी किया जा चुका है। गांव में किसी भी गली में गंदगी देखने तक को नहीं मिलती। उधर, पीलिया को लेकर गांव के लोगों ने नारेबाजी कर अपना रोष भी जताया।
ये लोग हैं पीलिया से ग्रस्त
गांव के सुमित, मनीष, कपिल, वेद प्रकाश, जतिन, काजल, रीना, श्याम सिंह, मिथिलेश, रीना, निखिल व मामचंद पीलिया की चपेट में हैं। इनमें से कई मरीजों का बड़े अस्पतालों में इलाज भी चल रहा है। उन्होंने बताया कि इससे पहले कभी गांव में इस तरह की कोई भी बीमारी नहीं फैली। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जोगिंद्रो देवी की मौत होने से गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव के पास लगी इन प्लाईवुड फैक्टरी पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। डॉ. कपिल ने बताया गांव के पास लगी हुई फैक्टरियों के प्रदूषण की वजह से ग्रामीण बीमारियों की चपेट में हैं। फैक्टरियों से निकलने वाला केमिकल युक्त गंदा पानी जमीन में ही दबाया जा रहा है, जिससे गांव में सप्लाई होने वाला पेयजल पूरी तरह से दूषित हो रहा है। ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पेयजल में मिले केमिकल युक्त गंदे पानी का ही असर है।
गांव भगवानपुर में अब पीलिया कंट्रोल में है। सूचना मिलते ही डॉक्टरों की टीम को भेजा गया। टीम ने 25 लोगों के ब्लड सैंपल लिए हैं, जिनकी जांच के लिए लैब में भेजा चुका है। सभी सैंपल मुफ्त होंगे। लोग जब तक पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते टीम वहां काम करेगी।
-डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ।