बढ़ते प्रदूषण के साथ बढ़ रहा टीबी का मर्ज
यमुनानगर। टिवन सिटी में चल रही मेटल और प्लाइवुड इंडस्ट्री का खतरनाक प्रदूषण शहरवासियों को टीबी जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में ले रहा है। इन इंडस्ट्री से निकलने वाला जहरीला धुुआं और अवशेष हवा में घुलकर लोगों के फेफड़े कमजोर कर रहा है जो टीबी होने की सबसे बड़ी वजह है। पिछले दस साल में मरीजों का यह आंकड़ा तीन गुणा तक बढ़ चुका है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम अभी नाकाफी है और अधिकतर लोगों को इलाज के लिए चंडीगढ़ पीजीआई व दिल्ली के बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
समय के साथ बढ़ता जाता है रोग
टीबी स्पेशलिस्ट डॉ. अनूप गोयल ने बताया कि टीबी माइक्रोबैक्टीरियम नाम के जीवाणु से होती है। यह आमतौर पर फेफड़ों पर हमला करता हैं, लेकिन समय के साथ फेफड़ों से हड्डी, लिम्फ ग्रंथि, आंत, प्रजनन तंत्र, त्वचा और मस्तिष्क के ऊपर की झिल्ली में भी फैल जाता है। टीबी के माइक्रोबैक्टीरियम सांस के जरिए शरीर के अंदर पहुंचते हैं। जब टीबी से ग्रस्त व्यक्ति खांसता या बोलता है तो यही जीवाणु हवा के जरिए किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर देते हैं।
बनाई गई टीमें
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुुताबिक रोजाना 10 टीबी मरीज आ रहे हैं। पिछले साल 2200 मरीज टीबी के मिले थे। जिनमें 1400 का इलाज हो चुका है, बाकी 800 का इलाज चल रहा है, जबकि इस साल के 400 केस हैं। यानी अब कुल 1200 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। टीबी के मरीजों की संख्या बढऩे से स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी के प्रति जागरूकता के लिए टीमों का गठन भी किया है।
रोग अलग, इलाज अलग
टीबी तीन तरह का होता है, फुफ्सीय टीबी, पेट का टीबी, हड्डी का टीबी। इन तीनों की पहचान और इलाज भी अलग-अलग तरह से किया जाता है। टीबी के जीवाणुओं को मारने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है।
टीबी के लक्षण
लगातार कई हफ्तों से खांसी
बार-बार बुखार आना
बलगम के साथ खून आना
भूख न लगना
वजन घटना
सीने में दर्द रहना
जिले में जांच के 17 केंद्र
जिले में टीबी की जांच और इलाज के लिए 12 केंद्र बने हैं। इसके अलावा जिले के सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की मुफ्त दवा मिलती है। वहीं 28 पीएचआई सेंटर व सीबी मेट हैं जहां टीबी की जांच करने वाली आधुनिक मशीन हैं जहां पर इलाज किया जाता है। इसके अलावा टीबी के मरीजों का इलाज के साथ-साथ उनकी काउंसलिंग भी की जाती है।
इस समय 1200 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। मरीज को दवाई के अलावा उसकी काउंसलिंग भी की जाती है तथा विभाग की तरफ से कई टीमें बनाई गई जो अलग-अलग एरिया में जाकर जागरूकता काम कर रही है। टीबी के मरीज को 500 रुपये भी पोषण के लिए दिए जा रहे हैं।
-डॉ. विजय दहिया, कार्यवाहक सिविल सर्जन।