रोल नंबर नहीं मिलने से 35 बच्चे नहीं दे पाएं दसवीं का पेपर
मान्यता थी नहीं, दूसरे स्कूल से भिजवाएं बच्चों के डॉक्यूमेंट्स, सीबीएसई ने रोक लिए रोल नंबर
अभिभावक बोले-हमारे बच्चों का क्या कसूर, स्कूल प्रबंधन ने रखा धोखे में, बच्चों का एक साल कौन लौटाएगा
प्रबंधन ने कहा, कोर्ट में गुहार लगाई है, कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा
यमुनानगर। शहर के एक निजी स्कूल द्वारा मान्यता नहीं होने बावजूद 10वीं में बच्चों का एडमिशन कर लिया और दूसरे स्कूल के जरिए बच्चों के डॉक्यूमेंट्स सीबीएसई को भिजवा दिए। सीबीएसई के पास समय पर डॉक्यूमेंट्स नहीं पहुंचे, जिसके चलते 35 बच्चों के रोल नंबर जारी नहीं हुए। तीन दिन से बच्चे और उनके अभिभावक स्कूल के चक्कर काट रहे हैं। गुरुवार सुबह पेपर के समय तक बच्चों को रोल नंबर नहीं मिला तो अभिभावकों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। वहीं बच्चे रोल मिलने और परीक्षा देने की आस में पेपर खत्म होने तक केंद्र के बाहर बैठे रहे, लेकिन जब सभी बच्चे परीक्षा देकर चले गए तो वे भी मायूस होकर अभिभावकों के साथ घर लौट गए। शहर के स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल प्रबंधन की इस लापरवाही से ये सभी 35 बच्चे गणित का पेपर देने से वंचित रह गए। स्कूल प्रबंधन की तरफ से अब शुक्रवार शाम को परिजनों को बुलाया है।
प्रेम सिंह, जसमिंद्र सिंह, बलबीर सिंह, हरदीप सिंह, प्रीतपाल, राजेश दुग्गल, शिव शंकर, संदीप कुमार और रमेश चंद ने बताया कि उनके बच्चे काफी समय से स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल में पढ़ते हैं। गुरुवार को 10वीं कक्षा का गणित विषय का पहला पेपर था। परंतु स्कूल ने उनके बच्चों को रोल नंबर जारी नहीं किया, जिस कारण बच्चे 10वीं का पेपर नहीं दे पाए। दो दिन पहले इस बारे में स्कूल की प्रिंसिपल अनीता सरदाना और उनके पति प्रवीण सरदाना से बात हुई थी। जिन्होंने बुधवार शाम पांच बजे सभी अभिभावकों को रोल नंबर देने के लिए स्कूल में बुलाया था। काफी देर तक उनके साथ बातचीत होती रही, परंतु उन्हें बच्चों के रोल नंबर नहीं दिए गए।
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रोल नंबर की जगह दे दी दूसरे स्कूल की ड्रेस
अभिभावकों का कहना है कि कई दिन पहले बच्चों को एक अन्य स्कूल की ड्रेस और आईकार्ड दिए गए थे और कहा गया था कि ये ड्रेस पहनकर ही परीक्षा देने जानी है। गुरुवार को बच्चे अन्य स्कूल की ड्रेस पहनकर आएं। जहां उन्हें रोल नंबर नहीं दिया गया। अभिभावकों का आरोप है कि स्प्रिंग डेल्स स्कूल प्रबंधन ने यह परीक्षा एक अन्य स्कूल के माध्यम से दिलाई जा रही थी। उन्हें धोखे में रखकर स्कूल प्रबंधन ने बच्चों का एडमिशन ले लिया, जबकि उनके पास सीबीएसई से 10वीं कक्षा तक की मान्यता नहीं है। फिर भी स्कूल में 12वीं तक कक्षाएं लगाई जा रही हैं।
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दो जगह चल रहा है स्कूल
परिजनों के मुताबिक नर्सरी से छठी कक्षा तक स्कूल विष्णु नगर में नाले के पास चल रहा है, जबकि सातवीं से दसवीं कक्षा तक की कक्षाएं खेड़ी रांगड़ान में लगती हैं। वहां पर चार-पांच कमरे हैं। प्रेम सिंह और जसमिद्र सिंह ने बताया कि जब उनके बच्चों का 10वीं में दाखिला किया गया तो प्रिंसिपल ने आश्वासन दिया था कि वे बच्चों का पेपर दिलवा देंगे। उन्होंने एक अन्य स्कूल के साथ टाइअप कर रखा है।
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स्कूल प्रबंधन का पक्ष
स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल अनीता सरदाना के पति प्रवीण सरदाना ने बताया कि अगला पेपर 13 मार्च का है। शुक्रवार या शनिवार तक हम सभी 35 बच्चों को रोल नंबर दिलवा देंगे। दो दिन पहले हमने हाई कोर्ट में केस किया था कि सीबीएसई ने उनके स्कूल के बच्चों के रोल नंबर रोक दिए हैं। कोर्ट में अपील करेंगे कि जो बच्चे सात मार्च का पेपर नहीं दे सके उनका पेपर लिया जाए।
वर्जन
-परिजनों की तरफ से मामला संज्ञान में लाया गया है। मामले की जांच करवाई जाएगी। बच्चों के भविष्य के साथ अगर किसी स्कूल प्रबंधन की तरफ से खिलवाड़ किया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। दोबारा से इस तरह का मामला न हो इसके लिए नए सत्र से सभी स्कूलों की दोबारा से जांच भी करवाई जाएगी और उनके हरियाणा बोर्ड के अलावा किसी अन्य बोर्ड की मान्यता संबंधी कागजात भी चेक करवाएं जाएंगे।
-आनंद चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी
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