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स्मारक बनवाने के लिए भटक रहा शहीद रॉकी का परिवार, मां बोली, साढे तीन साल से फाइलों में घूम रही सीएम की घोषणा

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स्मारक बनवाने के लिए भटक रहा शहीद रॉकी का परिवार,
मां बोली- साढे़ तीन साल से फाइलों में घूम रही सीएम की घोषणा
रॉकी की शहादत को न भूले इसलिए स्मारक व गेट बनवाने के लिए परिवार कर रहा जद्दोजहद
मुख्यमंत्री के ओएसडी से मिलने के बाद नवनियुक्त डीसी से मिला शहीद का परिवार, मिला केवल आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जम्मू कश्मीर के उद्यमपुर में पांच अगस्त 2015 को जान देकर बीएसएफ के 44 जवान को बचाने वाले गांव रामगढ़ माजरा के शहीद रॉकी की शहादत को बेशक लोग भूल गए हों। शहीद रॉकी के परिवार को आज भी उसका बलिदान याद है। शहादत के बाद शहीद रॉकी के घर आकर सीएम मनोहर लाल खट्टर ने 12 अगस्त 2015 को गांव में उसकी याद में गांव की सड़क का नाम शहीद रॉकी करने, गांव में स्मारक बनवाने व उनकी प्रतिमा लगाने की घोषणा की थी। लेकिन उनकी शहादत के बाद की गई घोषणा साढ़े तीन साल से फाइलों में ही घूम रही है। इस घोषणा को पूरा करवाने व शहीद रॉकी की शहादत को जिंदा रखने के लिए परिवार जद्दोजहद कर रहा है। लेकिन स्मारक बनाने की जगह केवल आश्वासन ही मिल रहा है। जिससे परिवार में सरकार व प्रशासन के प्रति गहरा गुस्सा है। बीते गुरुवार को शहीद रॉकी का भाई रोहित जहां चंडीगढ़ मुख्यमंत्री से मिलने गया था, वहीं सोमवार को शहीद रॉकी का पूरा परिवार नवनियुक्त डीसी आमना तस्नीम से मिला। डीसी ने उन्हें मामले में त्वरित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
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दो विभागों में फंसकर रह गई स्मारक बनवाने की फाइल :
बता दे कि पंचायती राज ने स्मारक और गेट निर्माण के लिए 34 लाख 50 हजार का बजट बनाया था। इसके लिए 2016 में पंचायती राज के अधिकारियों ने डायरेक्टर को पत्र लिखा था, लेकिन एक साल तक फाइल वहीं फंसी रही। वहां से फाइल पीडब्ल्यूडी के पास गई तो इसके एसीएस ने ये कहकर फाइल को लौटा दी कि उनका विभाग इसे डील नहीं करता। यह स्मारक पंचायती राज विभाग ही बनाएगा। अब दो विभागों में यह फाइल फंसकर रह गई है।
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तीन बार सीएम से मिले, हर बार जल्द समाधान का मिला आश्वासन :
सोमवार को डीसी से मिलने पहुंची शहीद रॉकी की मां अंग्रेजों देवी, भाई रोहित, बहन ने बताया कि सात अगस्त 2015 को रॉकी के शहीद होने के बाद 12 अगस्त को सीएम मनोहर लाल गांव में आए थे। तब उन्होंने परिवार को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी विभाग में नौकरी देने, शहीद रॉकी का स्मारक व गेट बनवाने, सड़क का नाम शहीद रॉकी करने की घोषणा की थी। आर्थिक सहायता व सरकारी नौकरी देने की घोषणा पूरी कर दी गई है। लेकिन साढ़े तीन साल बीतने पर भी स्मारक व गेट नहीं बनाया गया। इसके लिए वे अगस्त 2017 में यमुनानगर आए सीएम से मिले थे। इसके बाद दो बार चंडीगढ़ में सीएम आवास पर मिले। बीते गुरुवार को भी सीएम से मिलने गए थे, लेकिन सीएम के विधानसभा सत्र में होने के कारण उनके ओएसडी से मिले। लेकिन अभी तक शहीद रॉकी का स्मारक व गेट बनाने के बारे में कुछ नहीं किया गया। सीएम की ये घोषणा अभी तक फाइलों में ही घूम रही है। जिससे परिवार के लोगों में गुस्सा है।
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आतंकवादियों से मुकाबला कर खुद कुर्बान होकर बचाई थी 44 जवानों की जान :
बता दें रामगढ़ माजरा निवासी रॉकी बीएसएफ की 59 बटालियन का जवान था। पांच अगस्त 2015 को बीएसएफ के 46 जवान बस में सवार होकर जम्मू से कश्मीर जा रहे थे। बस में रॉकी गार्ड में रूप में तैनात था। रास्ते में जब बस जम्मू से करीब 50 किमी दूर उधमपुर में पहुंची तो दो आतंकवादियों ने उनकी बस पर फायरिंग शुरू कर दी। रॉकी चालक शुभेंद्र राय के बगल की सीट पर बैठा हुआ था। फायरिंग में चालक शुभेंद्र को गोलियां लगी। जिससे वह शहीद हो गए। एक गोली रॉकी को भी लगी, लेकिन उसने जख्मी होते हुए भी बस में चढ़ने का प्रयास कर रहे एक आतंकवादी को गोली मार के मौत के घाट उतार दिया। अगर वह बस में चढ़ने में सफल हो जाता तो बड़ा विस्फोट कर देता, क्योंकि उसके पास काफी मात्रा में विस्फोटक और ग्रेनेड थे। इसके बाद रॉकी ने दूसरे आतंकवादी को वहां से भागने पर मजबूर किया था। इस लड़ाई में रॉकी को कई गोलियां लगी। लेकिन उसने अपनी जान देकर अपने साथियों की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की। इसके बाद कई दिन तक सीएम मनोहर लाल सहित पक्ष व विपक्ष के कई मंत्रियों ने शोक जताया था और सरकार ने कई घोषणाएं की थी।
फोटो : 51
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