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खाद्य वस्तुएं बेचने वालों को बनवाना होगा लाइसेंस, नहीं तो पांच लाख जुर्माना के साथ होगी छह माह की सजा
जिले में 10 हजार से ज्यादा खाद्य पदार्थ विक्रेता, अब तक मात्र 206 ने लिया लाइसेंस
स्वास्थ्य विभाग ने एक अप्रैल तक दिया समय, उसके बाद होगी कार्रवाई शुरू
केवल 511 ने ही करवाया अब तक रजिस्ट्रेशन।
सुरेश सैनी
यमुनानगर। खाद्य वस्तुएं बेचने वालों पर स्वास्थ्य विभाग सख्त हो गया। विभाग ने इन्हें एक अप्रैल तक पंजीकरण करवाने व लाइसेंस बनवाने का समय दिया है। इसके बाद फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2011 के तहत खाद्य एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जाएगी। इसमें बिना पंजीयन कारोबार करने पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना और बिना लाइसेंस कारोबार करने पर छह माह तक की सजा हो सकती है। विभाग ने इसमें एक अप्रैल तक का समय दिया है उसके बाद कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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अब तक मात्र 206 ने लिया लाइसेंस
विभाग के अनुसार केवल 206 दुकानदारों ने ही पांच साल में लाइसेंस लिया। और 511 ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। पूरे जिले में 10 हजार से ज्यादा खाद्य पदार्थ विक्रेता इकाईयां हैं। इस तरह से निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री बेचते हुए कई विक्रेता लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
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इनके लिए जरूरी है लाइसेंस
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे में सभी तरह के खाद्य सामग्री निर्माता एवं विक्रेता हैं। इनमें खानपान का सामान बेचने वाले, दूध विक्रेता, चाय-नाश्ता की दुकानें, आईस्क्रमी पार्लर, अंडे-मीट की दुकान, पान गुमटी, सब्जी बेचने वाले, वेयर हाउस, रेस्टोरेंट, क्लब हाउस, केंटीन, ढाबा व होटल संचालक सहित खाद्य सामग्री के रिटेलर डीलर, होलसेलर शामिल हैं को लाइसेंस बनवाना जरूरी है।
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12 लाख रुपये से कम टर्नओवर वाले दुकानदार को रजिस्ट्रेशन जरूरी
12 लाख रुपये से कम टर्नओवर वाले दुकानदारों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। वहीं 12 लाख से अधिक का कारोबार करने वाले रिटेलर, होलसेलर, डिस्ट्रीब्यूटर, फूड ट्रांसपोर्टर्स, फूड गोदाम के लिए खाद्य लाइसेंस जरूरी है। इतना ही नहीं जिन्होंने लाइसेंस रिन्युअल नहीं करवाया तो उन्हें पेनाल्टी वसूली जाएगी। लाइसेंस नहीं होने पर चालान के बाद 6 माह का कारावास और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
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लाइसेंस को दुकान, फैक्ट्री या ठेले पर लटकाना भी जरूरी
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिले लाइसेंस को दुकान, फैक्ट्री, ढाबा, रेस्टोरेंट आदि जगहों पर लटकाना भी जरूरी है ताकि जांच के दौरान सामने टंगा हुआ दिखाई दे। लेकिन कई संचालक ऐसा नहीं करते हैं। ऐसे में विभाग कार्रवाई के दौरान जुर्माना लगाया जाता है।
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दस हजार से अधिक खाद्य पदार्थ विक्रेता
जिले भर में करीब 10 हजार से अधिक खाद्य पदार्थ विक्रेता इकाईयां चल रही हैं। व्यापारियों के लाइसेंस न लेने से विभाग को अब तक लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। विभाग की ओर से एक्ट के तहत सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ विक्रेताओं को लाइसेंस लेने के लिए समय दिया गया है। इसमें होटल, ढाबे, फास्ट फूड कार्नर, सभी भोजनालय, किरयाणा की दुकान, मिठाई, फल और सब्जी विक्रेता, खाद्य पदार्थों की रेहड़ी लगाने वालों सहित सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ विक्रेतओं को अपना रजिस्ट्रेशन करवाना है।
वर्जन
सभी खाद्य सामग्री बेचने वालों को रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस बनवाना अनिवार्य है। इसके लिए एक अप्रैल तक का समय दिया गया है। उसके बाद कार्रवाई की जाएगी। जिनके पास लाइसेंस नहीं होगा। उन पर पांच लाख रुपये जुर्माना तथा छह माह की सजा हो सकती है। अभी तक 206 दुकानदारों ने ही लाइसेंस लिया है जोकि बहुत कम है। इसके अलावा जिनके लाइसेंस रिन्युअल होना है वे जल्दी से करवा लें।
-डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ।
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