दिव्यांग महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए किए जा रहे प्रयास
यमुनानगर। जिले की दिव्यांग महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए शहर के विश्वकर्मा मोहल्ले में आरोहण थेरेपी एवं पुर्नवास केन्द्र चलाया जा रहा है। जिसमें दिव्यांग महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के टिप्स दिए जाते है ताकि वो आने वाले समय में आत्मनिर्भर हो सके, अपना काम अपने आप कर सकें। अपने लिए कुछ आजीविका कमा सके। ऐसी महिलाओं के शारीरिक विकास के लिए उनकी थेरेपी निशुल्क की जाती है। अक्षम महिलाओं के लिए अक्षम महिलाओं द्वारा ही अरोहण थेरेपी एवं पुर्नवास केन्द्र चलाया जा रहा है। इसका उद्घाटन तीन सितंबर को किया था। केन्द्र को लेकर सोसायटी से डॉ. रीतू सोनी, भारती कांबोज, डॉ. शलिनी गुगलानी, अंजू शर्मा, विद्या, मिनाक्षी और उषा द्वारा ऐसी महिलाओं के घरों तक जाकर जागरूक किया जा रहा है। ये सारी महिलाएं खुद दिव्यांग हैं। ऐसी महिलाएं घरों की चार दीवारों से बाहर निकल कर दुनिया देख सके इसके लिए केन्द्र सदस्य प्रयास कर रहे है। केन्द्र में असक्षम महिलाएं सुबह दस बजे आ जाती है। यहां जरूरत के अनुसार उनकी फिजियों थेरेपी की जाती है। उनको व्यवसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। शाम को पांच बजे सभी अपने घरों को लौट जाती है।
लाने व छोड़ के आने की भी दी जा रही व्यवस्था
केन्द्र में दिव्यांग महिलाओं को लाने व छोड़ने की भी व्यवस्था की गई। ऐसी महिलाएं जो चल नहीं सकती या फिर जिनकी घर वाले उन्हेें पुर्नवास केन्द्र में पहुंचाने में भी असमर्थ है। उनको अध्यक्षा की गाड़ी में ही सुबह केन्द्र तक लाया जाता है और शाम को उन्हें वापिस छोडकर आया जाता है।
निशुल्क दी जा रही थेरेपी
अध्यक्षा ने बताया कि केन्द्र में दिव्यांग महिलाओं के लिए विशेष रूप से वैकल्पिक थेरेपी, शारीरिक थेरेपी, तनाव कम करने के लिए थेरेपी और अनुकूलित व्यवसायिक थेरेपी करवाई जाती है। जिसको जैसी जरूरत होती है उसको उसी प्रकार की थेरेपी दी जा रही है। जिसके लिए केन्द्र में किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।
अक्षम लोगों को ही नौकरी
केन्द्र में केवल असक्षम लोगों को ही नौकरी देने की व्यवस्था की गई है। केन्द्र अध्यक्षा ने बताया कि केेन्द्र में ऐसे लोगों को ही नौकरी देना हमारा उद्देश्य है ताकि उनमें आत्म सम्मान पैदा हो, कुछ करके उन्हें खुशी मिले, कोई भी ऐसी महिला कभी भी आकर केन्द्र को ज्वाइन कर सकती है। सबकों उनकी काबलियत के अनुसार केन्द्र में काम सौंप दिया जाता है जिनकों करके उन्हें खुशी मिलती है और हमें करवाकर।
फिलहाल होली के लिए कर रही, हर्बल कलर तैयार
डॉ. सोनी ने बताया कि केन्द्र में आने वाली लड़कियों में घर से बाहर निकल कुछ कर गुजरने की भावना जगी है, इनका आत्म विश्वास जगा है। पहले घर से बाहर निकलने में हिचकिचाती थी, पर अब नहीं। अभी हाल हीं में दिवाली पर सभी ने मिलकर मिट्टी के दिए सजाए थे और उनकी प्रदर्शनी भी लगाई थी। जिससें इनमें उत्साह बढ़ा और अभी होली के लिए फूलों से हर्बल कलर तैयार कर रही है।
बॉक्स
-लालद्वारा के पास से आती है। उसे सुबह केन्द्र से गाड़ी सुबह ले आती है और शाम को वापिस छोड आती है। पहले घर में ही रह जाते थे। बाहर निकलते नहीं थे। अब रोज इसी बहाने घर से निकल आते है। यहां आकर बहुत अच्छा लगता है-अनामिका।
-रादौर ब्लॉक के जयपुर गांव से आती है। उसे उसका भाई सुबह छोड़ जाता है और शाम को ले जाता है। यहां सबका अच्छे से ध्यान रखा जाता है। हमें व्यवसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। पहले सोचते थे कि केवल हम ही दुखी है, लेकिन यहां आकर लगता है कि हम तो बहुत सुखी है-अंजलि।
-गांधीनगर से आती है। उसे यहां आना बहुत अच्छा लगता है। यहां आकर हम हर दिन कुछ नया ही सीखते है। यहां आकर मुझे ऐसा लगता है कि हम भी कुछ करने लायक है। सुरक्षित स्थान है। घर वालों को भी किसी प्रकार की कोई चिंता नहीं होती है। पहले घर वाले भेज नहीं रहे थे। जबसे मै यहां आने लगी हूं, खुश रहती हूं, मेरे घर वाले मुझसे ज्यादा खुश रहते है।-रजनी।
-डीएवी कॉलेज से फिजियो थेरेपिस्ट का कोर्स कर रही है। इसके साथ साथ उसे यहां इन सबकी सेवा का मौका भी मिला है, जिसके लिए मैं अपने आप को लक्की मानती हूं। यहां आना इनकी थैरेपी करना अच्छा लगता है।-मनदीप सिहाज, फिजियो थेरेपिस्ट।
-केन्द्र को चलाने का हमारा उद्देश्य असक्षम महिलाओं को घरों की चारदिवारी से बाहर निकालना है। ताकि उनका जीवन घर में कैद होकर ना रह जाए। समय बदल चुका है, उनको भी बाहर की दुनिया दिखानी है। अभी तो सिर्फ तीन ही महीने हुए हैं, आत्मविश्वास देखा है हमने इन महिलाओं में खुलकर हस्ते देखा है इन्हें। ऐसे लड़कियों के माता पिता को बिना डरे, केन्द्र द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ उठाएं।-डॉ. रीतू सानी, अध्यक्षा, आरोहण वेलफेयर सोसायटी।
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