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कलेसर नेशनल पार्क में दिखाई दिया यैलो थ्रोटिन हिमालयन

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अमर उजाला ब्यूरो
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खिजराबाद। कलेसर नेशनल पार्क में अन्य राज्यों से वन्य प्राणियों का आना जारी है। इसी क्रम में पार्क में यलो थ्रोटिन हिमालयन के आने का सूचना वन्य प्राणी विभाग को मिली है। यह प्रजाति एक हजार फुट की ऊंचाई पर पाई जाती है।
वन्य प्राणी विभाग के जिला निरीक्षक राजेश चहल ने बताया कि येलो थ्रोटिन हिमालयन भी एक दुर्लभ प्रजाति है जोकि कलेसर नेशनल पार्क में लगे कैमरा ट्रैप में कैद हुआ है। साथ लगते हिमाचल प्रदेश के राजा जी नेशनल पार्क से कलेसर नेशनल पार्क में वन्य जीवों के आने से साफ है कि कलेसर नेशनल पार्क में वन्य जीवों के अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो रहा है। वन्य जीवों के आने से वन्य प्राणी विभाग भी हरकत और खुशी में है। कलेसर नेशनल पार्क और इसके साथ लगते क्षेत्र में शिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखना विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। विभाग में स्टाफ की कमी के चलते शिकारियों पर नजर रखना और वन्य जीवों की चहलकदमी पर नजर रखना वन्य प्राणी विभाग के लिए समस्या पैदा कर रहा है। वन्य प्राणी विभाग में वन्य प्राणियों की संख्या में वृद्धि होने से वन्य प्राणी प्रमियों में भी खुशी की लहर है। वन्य प्राणियों के कलेसर नेशनल पार्क में प्रवेश करने पर और अधिक वन्य जीव आने की संभावना से भी इनकार नही किया जा सकता। वन्य प्राणियों के लिए सुरक्षित माहौल मुहैया करवाना विभाग के लिए एक चुनौती है। वन्य प्राणी विभाग के निरीक्षक राजेश चहल का कहना है कि विभाग में स्टाफ की कमी के चलते समस्याएं पैदा हो रही हैं। सर्दी के सीजन में शिकार की घटनाएं बढ़ जाती हैं और पूरे जिले में कम स्टाफ के चलते नजर रखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। कलेसर नेशनल पार्क में वन्य जीवों के प्रवेश उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ये विभाग के लिए अच्छी बात है कि अन्य राज्यों और दुर्लभ प्रजाति के प्राणी कलेसर नेशनल पार्क में नजर आना अच्छी बात है। विभाग की ओर से पूरी कोशिश की जा रही है उनको उनके माहौल के हिसाब से माहौल मुहैया करवाया जाए।
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रविवार को आते हैं अधिक पर्यटक-
कलेसर नेशनल पार्क में वन्य जीवों और जंगल को निहारने के लिए शनिवार व रविवार को अधिक पर्यटक देखने आते हैं। वन्य प्राणी विभाग के द्वारा चलाए गए इस प्रायोजन से वन्य प्राणी विभाग को भी अच्छी आय होने लगी है। वन्य प्राणी विभाग में जंगल में घूमने जाने के लिए स्थानीय लोगों को भी रोजगार मुहैया हुआ है। जंगल में घूमने जाने के लिए स्थानीय निवासियों की कई कारे लगाई गई हैं। जिससे वहां के लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। हालांकि गांव वालों को रोजगार देने के लिए स्वयं सहायता समूह की औरतों द्वारा वन्य प्राणी विभाग के प्रांगण में एक कैंटीन भी खोली गई थी जिसे अब बंद कर दिया गया है। इसका कारण जंगल में घूमने आने वाले पर्यटकों की कम संख्या है।
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