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माइनिंग कांट्रेक्टर 46 हजार रुपए प्रति एकड़ देने को तैयार, अगले साल और ज्यादा रेट बढ़ाने का आश्वासन देकर शुरू किया खनन

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46 हजार रुपये प्रति एकड़ देने का आश्वासन देकर शुरू किया खनन
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-विरोध करने वाले कुछ किसान नहीं पहुंचे मीटिंग में। -किसानों ने सरंपच पर छोड़ी जिम्मेदारी, बोले- अभी रेट क्लियर नहीं।
अमर उजाला ब्यूरो
रादौर। गुमथला में किसान और माइनिंग कांट्रेक्टर के बीच चल रहे विवाद को लेकर रविवार को दोनों पक्षों के बीच मीटिंग हुई। दिनभर चली मीटिंग के बाद माइनिंग कांट्रेक्टर किसानों को प्रति एकड़ 46 हजार रुपये देने को तैयार हो गए हैं। साथ ही किसानों को अगले साल और ज्यादा रेट बढ़ाने का आश्वासन देकर खनन खुलवाने के लिए राजी कर लिया। शाम को सभी ठेकेदारों ने यमुना में खनन शुरू कर दिया। तीन दिन पहले किसानों ने ये कहते हुए माइनिंग बंद करवा दी थी कि ठेकेदारों ने एग्रीमेंट रिन्यू किए बिना ही काम शुरू कर दिया है। मीटिंग में कांट्रेक्टर जोगिंद्र, सचिन शर्मा ,विक्रम और किसानों की ओर से सोम बत्तरा, शिवदयाल, पारूल, भीम सेतिया, हरबंस व रमेश शामिल रहे।

कुछ किसान नहीं पहुंचे, सरपंच को दी जिम्मेदारी
पहले तय मीटिंग में कुछ किसान नहीं पहुंचे। इन किसानों ने मामले को पेंडिंग बताया है और आगे की बातचीत के लिए सरपंच कृष्ण मेहता पर जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि किसानों ने मीटिंग के बाद खनन का विरोध बंद कर दिया है। किसान मनोज ने बताया कि वह किसी कारण से बैठक में शामिल नहीं हो पाया। किसानों व ठेकेदारों से मध्यस्थता कर उनकी बातचीत को सिरे चढ़ाने की जिम्मेदारी सरपंच को दी है। किसान चाहते है कि उन्हें पिछले वर्ष के मुकाबले ज्यादा पेमेंट मिले। क्योंकि जो जमीन यमुना में चली जाती है, वहां खेती नहीं हो पाती। यह जमीन किसानों की आजीविका का साधन है।
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किसानों को बरगला रहे हैं कुछ लोग
कांट्रेक्टर जोगिंद्र सिंह व सचिन शर्मा का कहना है कि रेत ठेकेदार इस स्थिति में नहीं है कि वह नाजायज मांगों को पूरा कर सकें। सभी ठेकेदार किसानों को प्रति एकड़ 46 हजार रुपये देने को तैयार है। अगले साल इसमें और ज्यादा बढ़ोतरी की जाएगी। इस पर किसान भी सहमत हैं। लेकिन कुछ लो उन्हें बरगला रहे हैं। वे अपने स्वार्थ के लिए किसानों व रेत के ठेकेदारों के बीच विवाद बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। ठेकेेदार क्षेत्र में किसी प्रकार का विवाद नहीं चाहते। खनन कार्य सहमति से हो और किसानों को भी खनन से लाभ पहुंचे। खनन बंद होगा तो किसानों को एक रुपये का भी फायदा नहीं होगा। इसके अलावा जिन किसानों की भूमि यमुना नदी में कटाव के कारण समा गई है उन किसानों की भूमि से रेत उठाने के लिए भी परमिशन मांगी जाएगी।
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ये था मामला
वीरवार की रात किसानों ने बिना एग्रीमेंट बढ़ाए किसानों की जमीन से रेत खनन करने का विरोध किया था। रात के समय ही खनन कर रही मशीनें रोक दी थीं। साथ ही ठेकेदारों के खिलाफ धरना प्रदर्शन भी शुरू कर दिया था। इसको लेकर शुक्रवार को किसानों व ठेकेदारों के बीच बातचीत हुई थी लेकिन वह सिरे नहीं चढ़ पाई थी।
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