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अवैध माइनिंग का दर्द

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किसानों ने जमीन खोने का मनाया शोक, एसडीएम को दिया अवैध खनन का सबूत, कहा-अब खुद ही निपटेंगे
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15 सितंबर से खुलेगा कानूनन खनन तो किसान करेंगे निगरानी, अधिकारी मिलीभगत करता मिला तो उससे मौके पर ही निपटेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। अवैध खनन की वजह से जमीन गंवाने वाले किसानों का दर्द छलकने लगा है। सुबह पीड़ित किसान अपनी जमीन देखने जाते हैं तो उनके आंसू निकल आते हैं। शुक्रवार को किसानों ने यमुना किनारे बैठकर जमीन जाने का शोक मनाया। किसानों ने कहा कि खनन माफिया ने उनकी जमीन को जेसीबी का पंजा चलाकर मार दिया। बारिश में यमुना के पानी ने अपने अंदर समाकर उनकी जमीन का अंतिम संस्कार कर दिया। अब हम जमीन की तेरहवीं करने को तैयार हैं। हम अब अपनी जमीन खो चुके हैं, लेकिन अपने इलाके में अब खनन माफिया से हम खुद ही निपटेंगे। अगर किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी अवैध खनन में मिलीभगत करता पकड़ा गया तो उसके खिलाफ मौके पर ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 15 सितंबर से खनन का काम कानूनन रूप से खुलेगा। इसके लिए किसानों ने दस खनन मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया है। प्रत्येक कमेटी में 100 किसान शामिल होंगे, जो खनन की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे।

एसडीएम को सौंपे अवैध खनन के सबूत
गुमथला व संधाला गांव के किसानों ने तीन पेज के शिकायती पत्र के साथ 15 पेज के पत्राचार के सबूत और एक सीडी सौंपी है। इसमें बताया गया है कि उनकी गुमथला व नगली क्षेत्र में करीब 200 एकड़ जमीन यमुना में समा गई है। इसकी वजह अवैध खनन है।
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नया घाट न खुले और पुराने की मॉनिटरिंग हो
किसान जसमेर सिंह, सोमनाथ, रमेश, जनेश कुमार, सिंह राम, विजय कुमार, महाबीर, राजकुमार, रोशनलाल, जयचंद, ठाठ सिंह, अनिल कुमार आदि ने बताया कि अब एक नया घाट मौजा नगला रड़ान में खुलने वाला है। जनहित में इस घाट को खुलने से रोका जाएं। इसके अलावा जो पुराने घाट चल रहे हैं, उनकी सख्ती से मॉनिटरिंग होनी चाहिए।
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किसानों की खनन मॉनिटरिंग कमेटी करेगी ये काम
-खनन पर नजर रखने के लिए फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जाएगी।
-यमुना के किनारे या किसानों की जमीन के पास खनन रोका जाएगा।
-तय क्षेत्र से बाहर खनन करने वाले ठेकेदार की शिकायत होगी।
-क्षेत्र से एक भी ओवरलोड ट्रक नहीं निकलने दिया जाएगा।
-कोई अधिकारी अगर मिलीभगत करता है उसकी शिकायत करेंगे।
-अधिकारी नहीं माना तो मौके पर पकड़े जाने पर किसान करेंगे पिटाई।
-क्षेत्र में नाके लगवाए जाएंगे, प्रत्येक नाके पर कमेटी के सदस्य भी नजर रखेंगे।
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-बेहद उपजाऊ जमीन गंवाने के बाद किसान अब चुप बैठने वाले नहीं हैं। न पुलिस साथ देती और न ही अधिकारी। अब किसान अपनी लड़ाई खुद लड़कर अपनी जमीन बचाने का प्रयास करेंगे। दिन रात नजर रखने के लिए खनन मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जा रही है।
-एडवोकेट वरयाम सिंह, हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता

-किसानों ने अपना पक्ष रख दिया है। संबंधित विभाग के अधिकारियों से भी उनका पक्ष मांगा गया है। सभी पक्षों को ध्यान में रखकर रिपोर्ट डीसी को सौंपी जाएगी।
-बीबी कौशिक, एसडीएम, जगाधरी
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