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यमुनानगर में मायका होने पर निरंकारी माता सविंदर का था विशेष लगाव, ब्रह्मलीन होने से हजारों अनुयायियों में शोक की लहर

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यमुनानगर में मायका होने पर निरंकारी माता सविंद्र का था विशेष लगाव, ब्रह्मलीन होने से हजारों अनुयायियों में शोक की लहर
-जगाधरी स्थित निरंकारी सत्संग भवन में माता सविंद्र के नाम पर खोला जाना था सिलाई कढ़ाई सेंटर
- यमुनानगर में 40 हजार से अधिक है निरंकारी अनुयायी
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। संत निरंकारी मिशन की पांचवी सदगुरु व पहली महिला प्रमुख माता सविंदर हरदेव का यमुनानगर से पारिवारिक रिश्ता था। उनका प्रोफेसर कॉलोनी में मायका है। इसलिए उनका यमुनानगर में आना-जाना लगा रहता था। जगाधरी के हुडा सेक्टर 18 स्थित संत निरंकारी भवन में सदगुरु माता सविंदर हरदेव के नाम से सिलाई कढ़ाई सेंटर खोला जाना था। जिसका उद्घाटन भी माता के कर कमलों से किया जाना था। निरंकारी माता सविंदर हरदेव के रविवार शाम को ब्रह्मलीन होने की जैसे ही खबर मिली तो यमुनानगर के हजारों श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ पड़ी। इसके बाद जहां पर भी निरंकारी सत्संग हुआ, उसमें केवल सिमरन किया गया।

25 फरवरी को अंतिम बार यमुनानगर आई थी माता सविंदर :
निरंकारी बाबा हरदेव सिंह महाराज के साथ माता सविंदर सालभर में तीन चार बार यमुनानगर आते थे। लेकिन बाबा हरदेव के निधन के बाद जिम्मेदारी बढ़ने पर व तबीयत सही नहीं होने पर आना कम हो गया था। अंतिम बार निरंकारी माता 25 फरवरी को यमुनानगर आई थी। उस समय तेजली खेल परिसर में विशाल निरंकारी समागम आयोजित किया गया था। जिसमें 80 हजार के करीब श्रद्धालु पहुंचे थे।
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प्रोफेसर कॉलोनी में है मायका
संत निरंकारी मंडल यमुनानगर के प्रेस प्रवक्ता जगजीत बांगा ने बताया कि माता सविंदर का प्रोफेसर कॉलोनी में मोदगिल गली में मायका है। 12 जनवरी 1957 को उनका जन्म दिल्ली में पिता मनमोहन सिंह व माता अमृतकौर के घर हुआ। इसके बाद पूरा परिवार यमुनानगर शिफ्ट हो गया। फर्रुखाबाद निवासी गुरमुख सिंह व माता मदन ने इन्हें गोद ले लिया। उनके पिता मनमोहन सिंह, माता अमृतकौर, भाई बिट्टी का कुछ साल पहले निधन हो चुका है। इस समय परिवार में उनकी भाभी डिंपल व भतीजा अमन व अमन की पत्नी रहते है। निरंकारी बाबा हरदेव सिंह व माता सविंदर हरदेव जब भी यमुनानगर आते थे, तो यहीं पर ठहराव करते थे। इसके अलावा नाहरपुर में फार्म हाउस में है। माता जब भी यहां आती थी तो फार्म हाउस पर जरूर जाती थी। माता सविंदर की 14 नवंबर 1975 में 28वें वार्षिक संत निरंकारी समागम में निरंकारी बाबा हरदेव से शादी हुई थी। निरंकारी बाबा हरदेव सिंह के साथ माता सविंदर ने कनाड़ा, अमेरिका, इटली, फ्रांस बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया, आस्टिया सहित कई विदेशों का दौरा कर मिशन का प्रचार किया।
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अंतिम दर्शनों को जाएंगे 20 हजार अनुयायी :
जिले में निरंकारी मिशन के 40 हजार से अधिक अनुयायी है। यमुनानगर में मिशन की जगाधरी, बुडिय़ा, छछरौली, खिजराबाद, लेदी, बिलासपुर, ढलौर, रादौर, जठलाना, भंभौली, साढौरा, मुस्तफाबाद, सहित अनेक शाखाएं है। जिसमें हजारों की संख्या में अनुयायी रहते है। निरंकारी माता सविंदर हरदेव के निधन से जिलेभर के अनुयायियों में शोक की लहर है। उनके निधन के बाद जहां भी सत्संग का आयोजन किया गया, वहां पर सिमरन व अरदास की गई। जिले से हजारों श्रद्धालु उनके दर्शनों को दिल्ली जा रहे हैं। बुधवार को निरंकारी माता के अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए भी 20 हजार से अधिक श्रद्धालु जाएंगे।
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