ओवरलोड : कांजनू पुल में दरार, ग्रामीणों ने नारेबाजी कर जताया रोष
अमर उजाला ब्यूरो
रादौर। यमुना से अवैध खनन कर सड़कों पर दौड़ने वाले ओवरलोड वाहनों से स्थानीय लोगों का सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है। इन अवैध वाहनों से जहां सड़कें टूट चुकी हैं, वहीं अब पुल भी क्षतिग्रस्त होने लगे हैं। खनन के ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से पश्चिमी यमुना नहर के कांजनू पुल में दरारें आ गई हैं। जिससे पुल के गिरने का खतरा बढ़ गया है।
रविवार की सुबह जब गांव कांजनू के लोगों ने पुल के ऊपर दरारें देखी तो गांव के लोग दंग रह गए। लोगों ने मामले की सूचना प्रशासन के अधिकारियों को दी, लेकिन दोपहर तक भी प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जिससे लोगों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने पुल पर खड़े होकर प्रशासन के नारेबाजी की। लोगों ने इस पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद करने की मांग करते हुए दरारों के मामलों की जांच करने की मांग की है।
अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप : जयप्रकाश कांबोज, रोशनलाल, शिवकुमार, पवन कुमार सरपंच कांजनू, साहब सिंह, अखिल कांबोज, सचिन, विनीत, गगन, कमल, ईश्वर, राजीव, बिटटू, अशोक, मानसिंह, रमेश, बाबूराम आदि ने बताया कि जब से सरकार ने रेत खनन का कार्य शुरू करवाया है, तब से कांजनू पुल के ऊपर से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ओवरलोडेड वाहन गुजर रहे हैं। इन वाहनों से कुछ वर्षों पहले बनाया गया कांजनू गांव के पुल में जगह-जगह दरारें पड़ गई है। प्रशासन के अधिकारियों की मिलीभगत से ओवरलोडेड वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। पुल पर दरारें पड़ने से पुल कभी भी ढह सकता है।
ग्रामीण रोकेंगे ओवरलोड : ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन के अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए है। गांव के लोगों ने प्रशासन के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि खस्ता हालत कांजनू पुल के ऊपर से ओवरलोडेड वाहन चलाना बंद नहीं किया गया तो गांव के लोग ओवरलोडेड वाहनों को पुल से ऊपर से गुजरने नहीं देंगे। जिसके लिए सरकार व प्रशासन के अधिकारी जिम्मेवार होंगे।
10 वर्ष पुराना है पुल : कांबोज सभा रादौर के कोषाध्यक्ष जयप्रकाश कांजनू व अखिल कांबोज ने बताया कि लगभग 10 वर्ष पहले करोड़ों रुपये की लागत से पश्चिमी यमुना नहर का कांजनू पुल बनाया गया था। यह पुल रादौर क्षेत्र को खादर व यूपी से जोड़ता है। यह पुल क्षेत्र की जीवन रेखा है। पुल के कारण ही लगभग 30 गांव रादौर क्षेत्र से जुडे़ हुए हैं। इससे पहले बना पुराना पुल अंग्रेजों द्वारा लगभग 100 वर्ष पहले बनाया गया था। पुल खस्ता हाल में पहुंचने के बाद नया पुल लगभग 10 वर्ष पहले सरकार द्वारा लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था। पुल का इस्तेमाल लोग अपने खेतों में जाने व दूसरे गांव जाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
ओवरलोड को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी। साथ ही पुल की जांच करवा कर इसकी मेंटेनेंस करवाई जाएगी।
-श्याम सिंह राणा, विधायक, रादौर
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