रादौर। शहर के एसके रोड पर लगे डिवाइडर के पोल लाइटों पर प्रशासन द्वारा लगभग 50 लाख रुपये खर्च किए गए। पहले तो इनको लगाने के चार महीने बाद इनकी शुरुआत की गई। इसे अभी एक महीना भी मुश्किल से हुआ होगा। शहरवासियों को लगा था कि प्रशासन विकास करवा रहा है। लेकिन यहां 80 प्रतिशत लाइटें बंद हैं। जब लाइटें जलती ही नहीं तो इस काम पर 50 लाख रुपये खर्च करने का क्या औचित्य है।
जेएमआइटी चौक से लेकर शहीद कांबोज धर्मशाला तक लाइटें बंद हैं। एचडीएफसी बैंक से लेकर बुबका चौक तक लाइटें चालू हैं। फिर बुबका चौक से लेकर गोल्डी ढाबे तक लाइटें बंद हैं। घनश्याम दास, सुरेश कुमार, अर्जुन सिंह ने बताया कि 50 लाख लगाकर सरकार से शहर की सजावट के लिए डिवाइडर पोल लाइटें लगवाई हैं। इनमें लाइट आई या नहीं इस बारे में किसी को कुछ लेना देना नहीं है। लगता है प्रशासन इस बात से अंजान है या फिर ये सोची समझी साजिश है। वहीं इस बारे में जब नगरपालिका मेयर से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि दो बिजली के मीटर जल गए थे। नए मीटर लगाने के लिए बिजली बोर्ड में लेटर दिया गया है। ऑनलाइन प्रक्रिया होने के कारण वक्त लग रहा है।
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