बिना बजट 20 वार्डों में गड्ढे भरने के लिए टेंडर, दो महीने बाद भी काम शुरू नहीं, पार्षदों में रोष
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। नगर निगम के अधिकारी भ्रष्टाचार में इस कदर डूबे हुए हैं कि कमीशन के चक्कर में बिना बजट के ही विकास कार्यों के टेंडर लगा देते हैं। 20 वार्डों की सड़कों के गड्ढे भरने के लिए टेंडर कर दिए गए, लेकिन दो महीने बाद भी काम शुरू नहीं किया गया। जिसके चलते वार्ड पार्षदों में रोष बनता जा रहा है। नगर निगम चुनाव सिर पर हैं, पार्षदों को चिंता है कि अधिकारियों के भ्रष्टाचार की वजह से उन्हें चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है। हाउस की बैठक में भी यह मुद्दा उठ चुका है। इसके बावजूद शहरवासी टूटी हुई सड़कों पर चलने को मजबूर हैं।
वार्ड वाइज खर्च की योजना : वार्ड नंबर-1 में 28 लाख 92 हजार, वार्ड-2 में 27 लाख 3 हजार, वार्ड-3 में 26 लाख 88 हजार, वार्ड-4 में 26 लाख 88 हजार, वार्ड-5 में 26 लाख, 88 हजार, वार्ड-6 में 26 लाख 88 हजार, वार्ड-7 में 25 हजार, वार्ड-8 में 26 लाख 90 हजार, वार्ड-9 में 26 लाख 94 हजार, वार्ड-10 में 27 लाख 16 हजार, वार्ड-11 में 25 लाख 54 हजार, वार्ड-12 में 16 लाख 10 हजार, वार्ड-13 में 22 लाख 35 हजार, वार्ड-14 में 21 लाख 64 हजार, वार्ड-15 में 18 लाख 89 हजार, वार्ड-16 में 16 लाख 38 हजार, वार्ड-17 में 19 लाख 52 हजार, वार्ड नंबर-18 में 20 लाख 82 हजार, वार्ड-19 में 16 लाख 40 हजार व वार्ड नंबर-20 16 लाख 15 हजार रुपये खर्च किए जाने की जाने की योजना नगर निगम ने बनाई थी।
हरपथ एप के तहत पहली बार हुए थे टेंडर : नगर निगम के इलाके की सड़कों की मरम्मत के लिए हरपथ एप लांच किया गया था। इस एप पर क्षतिग्रस्त सड़क की कोई भी फोटो अपलोड की जा सकती है। फोटो अपलोड होते ही संबंधित क्षेत्र अधिकारियों तक पहुंचेगी और उस सड़क की मरम्मत करना सुनिश्चित किया जाना था। नगर निगम ने इस योजना के अंतर्गत पहली बार सभी वार्डों में टेंडर किए हैं।
अधिकारी नहीं देते संतोषजनक जवाब
-वार्ड-14 की पार्षद निर्मल चौहान का कहना है कि बिना तैयारी के अधिकारी टेंडर लगा देते हैं। पहले बजट आना चाहिए, उसके बाद ही टेंडर किए जाने चाहिए, लेकिन यमुनानगर-जगाधरी नगर निगम में इसके विपरीत काम किया जा रहा है। यहां पहले टेंडर हो रहे हैं, उसके बाद बजट मांगा जाता है। अधिकारी अपना फायदा पहले देखते हैं। हाउस की मीटिंग में भी यह मुद्दा उठाया गया था।
-वार्ड नंबर-4 से पार्षद मौजी सेठी का कहना है कि हरपथ एप योजना के तहत अधिकारियों ने अपनी मर्जी से ही टेंडर लगाए थे। किसी भी पार्षद से कोई सलाह मशवरा नहीं किया गया। ना ही हाउस की बैठक में यह प्रस्ताव लाया गया है। अपने लालच में अधिकारी मनमर्जी से टेंडर लगा रहे हैं। मेरे वार्ड में तमाम सड़कें टूटी पड़ी हैं। अफसरशाही के खिलाफ अब हम डीसी से मुलाकात करेंगे। कुछ अधिकारी अपने लालच में काफी समय से यहां जमे हुए हैं।
फोटो नंबर 32, 33