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जान पर आफत न बन जाए सकून की डुबकी, प्रतिबंध के बाद नहर में नहा रहे युवा

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प्रतिबंध के बाद भी नहर में नहा रहे युवा, केवल चेतावनी बोर्ड लगा भूला प्रशासन
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- पश्चिमी यमुना नहर में नहाते हुए डूबने से तीन माह हो चुकी पांच मौत, नहर के घाट और किनारों पर नहीं सुरक्षा के कोई प्रबंध

अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। गर्मी से सुकून की चाहत के लिए लोग पश्चिमी यमुना नहर में सुबह-शाम डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं, लेकिन सुकून की यह डुबकी उनके लिए जान पर आफत बन रही है। क्योंकि प्रशासन की ओर से नहर से लगते घाटों और किनारों पर सुरक्षा के मद्देनजर कोई प्रबंध नहीं किए गए। प्रशासनिक उदासीनता और अभिभावकों के जागरूक न होने से हर साल गर्मी के सीजन में दर्जनों युवाओं की नहर में डूब जाने से मौत हो जाती है। बीते वर्ष भी अप्रैल से मई माह के बीच नहर में डूबने की पांच घटनाएं हुईं, इनमें आठ की मौत हो गई थी। हाल ही में पश्चिमी यमुना के दड़वा घाट पर नहाते हुए तीर्थ नगर टपरी के दो युवकों की मौत हो गई। सीजन में अब तक नहाते हुए नहर में डूबने से पांच लोगों की मौत हो चुकी है।
घाटों व किनारों की नहीं हुई मरम्मत : चिट्टा मंदिर घाट, दड़वा, श्रीशनि मंदिर, चिट्टा मंदिर और बाडीमाजरा पुल के समीप हनुमान मंदिर, बुड़िया पुल घाट, फतेहपुर पुल घाट और रेलवे पुल के समीप जमना गली घाट है। इनके अलावा नहर से लगते अन्य घाटों व किनारों की दशकों से मरम्मत नहीं हुई। घाटों के चारों ओर न तो कोई स्थान है और न ही नहाते समय पकड़ने को जंजीरें ही हैं। कई जगह खतरे के साइन बोर्ड भी नहीं लगे हैं। ऐसे में नहर में पानी के तेज बहाव के कारण हर समय हादसे की आशंका रहती है। इन्हीं कमियों के बीच नहर में नहाते समय लोग डूब जाते हैं।
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पाबंदी के चेतावनी बोर्ड लगा कर दी इतिश्री : यहां प्रशासन की ओर से चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, जिस पर लिखा है कि यहां कपड़े धोना और नहाना सख्त मना है। जबकि इसकी पालना कराने के लिए मौके पर कोई कर्मी तैनात नहीं है। घाटों पर कम उम्र के बालक और किशोर भी नहाते दिखाई दे रहे हैं।

खनन माफिया ने बना दिए गहरे कुंड :
पश्चिमी यमुना नहर ताजेवाला से छछरौली, जगाधरी, यमुनानगर व रादौर होते हुए करनाल की तरफ बहती है। सफाई व देखरेख के अभाव में नहर समतल नहीं रही। खनन माफिया द्वारा खनन सामग्री निकालने से इसमें जगह-जगह कुंड बने हुए हैं। नहर से सैकड़ों लोगों को डूबने से बचाने वाले और सैकड़ों शवों को बाहर निकाल चुके गोताखोर सुखराम व अमर पहलवान नहर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। उनकी मानें तो नहर में बने कुंडों से भंवर आने पर प्रशिक्षित गोताखोर का भी बचना मुश्किल है। इन कुंडों को बंद किया जाना जरूरी है।

पांच युवकों की जा चुकी है जान
केस एक :
25 फरवरी को चिट्टा मंदिर घाट पर गांव तेजली निवासी सरबजीत (14) अपने दोस्त गधौली निवासी विष्णु उर्फ विशू (15) के साथ नहाने के लिए गया था। नहर में नहाते समय दोनों गहराई में चले गए। दो दिन बाद दोनों लड़कों के शव नहर से गोताखोरों ने निकाल लिए थे।
केस दो :
छह मई को दड़वा घाट पर चार पांच दोस्तों के साथ नहाते हुए तीर्थ नगर टपरी निवासी विनय उर्फ बाबू (19) उसके दोस्त कॉलोनी के ही नवीन उर्फ नब्बू (18) डूब गए थे। तीन दिन बाद दोनों के शवों को गोताखोरों ने नहर से निकाला था। इस दौरान गोताखोरों को एक अज्ञात व्यक्ति का भी शव मिला था।
केस तीन :
19 मई को अपने तीन साथियों के साथ फतेहपुर पुल के पास नहा रहा रायपुर निवासी नदीम नहर में डूब गया था। दो दिन बाद युवक का शव नहर से बरामद किया गया।
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पश्चिमी यमुना नहर में नहाते हुए डूबने का मामला गंभीर है। प्रशासन द्वारा नहर में नहाने पर पहले से ही प्रतिबंध लगाया गया था। इसके लिए चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए है। पुलिसकर्मी भी गश्त करते रहते हैं। फिर भी युवा नहाते हैं। इसके लिए पुलिस को गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए जाएंगे।
- गिरीश अरोड़ा, डीसी, यमुनानगर।
फोटो : 01 से 05
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