विद्यार्थी ग्रीष्मावकाश में होमवर्क के साथ सीखेंगे जीवन कौशल के गुण
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। शिक्षा विभाग ने ग्रीष्मावकाश के दौरान ज्वॉयफुल एक्टिविटी के अंतर्गत सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक होमवर्क के अतिरिक्त जीवन कौशल से संबंधित गतिविधि आधारित होमवर्क देने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में शिक्षा निदेशालय ने सभी डीइओ, बीईओ समेत तमाम प्रिंसिपल को पत्र जारी किया है। पत्र में बताया गया है कि 1 जून से 30 जून के मध्य होने वाले ग्रीष्मावकाश में अध्यापकों द्वारा जो गृहकार्य दिया जाता है वो अधिकतर पाठ्यक्रम पर आधारित होता है जबकि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थी का चहुंमुखी विकास करके उसे आत्मनिर्भर, कुशल तथा सभ्य नागरिक बनाना है। इसलिए होमवर्क इस प्रकार दिया जाए जिसके माध्यम से विद्यार्थी जीवन कौशल भी सीख सकें। वह पर्यावरण और जीव जंतुओं के प्रति संवेदनशील हो, परिवारों के प्रति उसकी सोच अधिक से अधिक व्यापक बनाते हुए व्यापक तथा प्रायोगिक बन सके तथा माता पिता और अभिभावक उनके साथ अपना जुड़ाव और रिश्तों को अधिक व्यापक बनाते हुए मजबूत करें।
पेरेंट्स के साथ मिलकर करेंगे होमवर्क
यह होमवर्क माता पिता के साथ मिलकर किया जाना है। जिसकी 6 से 8 पेज की रिपोर्ट विद्यार्थी अपने कक्षा अध्यापक को प्रस्तुत करेंगे। ग्रीष्मावकाश में गांव व परिवार का इतिहास, भोजन का उपयोग एवं पाक कला, मेहनत के प्रति सम्मान, पुस्तकों का अध्ययन, दादा-दादी, नाना-नानी से वार्तालाप, कार्य स्थल का भ्रमण, पेड़-पौधों का संरक्षण एवं पशु पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता, टीवी, मोबाइल से दूरी, डाकघर बचत खातों का संचालन, स्वच्छ भारत अभियान के तहत आस-पास की सफाई।
होमवर्क पर डाइट करेगा रिसर्च वर्क
इसके साथ-साथ अभिभावक बच्चों को अधिक से अधिक समय प्रदान करें। उनके साथ खेले हंसी मजाक करें, चुटकुले सुनाए व उनके मन की बात जानने का प्रयास करें। छुट्टियों के दौरान उपर्युक्त में से चुने गए किसी एक या एक से अधिक प्रोजेक्ट को 6 से 8 पृष्ठों की रिपोर्ट विद्यार्थी अपने कक्षा अध्यापक को सौंपेंगे तथा प्राप्त रिपोर्ट में से श्रेष्ठ रिपोर्ट अपने अपने जिले की डाइट को रिसर्च वर्क के लिए दी जाए।
शिक्षा विभाग की यह अच्छी पहल है। इससे बच्चे शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी एक्टिव होंगे। उनकी बौद्घिक क्षमता भी बढ़ेगी।
-महेंद्र सिंह कलेर, हेड टीचर, रामपुरा स्कूल