हत्या के प्रयास के आरोपी पूर्व मंत्री निर्मल सिंह की 21 दिन बाद जमानत हुई मंजूर, आज होगी रिहाई
- कागजी कार्रवाई पूरी न होने पर नहीं मिल पाया रिलीज आर्डर
24-25 अप्रैल की रात बेलगढ़ में पूर्व मंत्री व स्क्रीन प्लांट संचालकों में हुई थी बहस, मंत्री पर गोली चलाकर हत्या करने के प्रयास का था आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/खिजराबाद। बेलगढ़ गोलीकांड मामले में जेल में बंद कांग्रेस के पूर्व मंत्री निर्मल सिंह की बुधवार को 21 दिन बाद जमानत मंजूर हो गई। कागजी कार्रवाई पूरी न होने पर उन्हें रिलीज आर्डर नहीं मिल पाए। जमानत के मुचलके वीरवार को बिलासपुर अदालत में जमा करवाएं जाएंगे। जिसके बाद पूर्व मंत्री जमानत पर जेल से रिहा होंगे। पूर्व मंत्री पर आरोप है कि 24-25 अप्रैल की रात को उन्होंने बेलगढ़ में कुछ खनन संचालकों पर गोली चलाई थी। तब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। उसके बाद वीडियो कांफ्रेंस के द्वारा उन्हें कोर्ट में पेश किया जाता था। जहां से उन्हें 17 मई तक फिर जेल में भेज दिया गया था।
निर्मल सिंह के अधिवक्ता डीएस खुराना ने बुधवार को सेशन जज विमलेश तंवर की अदालत में जमानत के लिए याचिका लगाई थी। कागजी कार्रवाई पूरी न होने के कारण रिलीज आर्डर तैयार नहीं हो सके। ऐसे में रिहाई के लिए उन्हें गुरुवार तक इंतजार करना पड़ेगा। उधर जैसे ही उनके समर्थकों को उनकी जमानत की सूचना मिली तो वे जगाधरी जेल के बाहर जमा होना शुरू हो गए। जब उन्हें पता चला कि निर्मल सिंह आज जेल से रिहा नहीं होंगे तो उनमें मायूसी भी देखी गई। जिला जेल अधीक्षक रतन सिंह ने बताया कि उन्हें जमानत संबंधी अदालत के कोई भी आदेश नहीं मिले हैं।
अपनी जमीन में खुदाई रोकने पर पूर्व मंत्री के घोड़ा फार्म रकबा में हुआ झगड़ा
पूर्व मंत्री निर्मल सिंह के वकील दिग्विजय सिंह खुराना ने अदालत को बहस के दौरान कहा कि शिकायतकर्ता ने झगड़ा सरकारी गोहर में होना बताया है, जबकि ये गलत है। उनका कहना है कि जिस खसरा नंबर का जिक्र किया गया है। उस खसरा नंबर में पूर्व मंत्री का घोड़ा फार्म है। यानी ये सरकारी रास्ता नहीं है। उनका कहना है कि जब पुलिस ने मौका किया तो शिकायतकर्ता मौके पर था जबकि एफआईआर में डरकर भाग जाने का जिक्र है। इसी तरह एफआईआर में कहा गया है तीन-तीन लोगों ने डंडे और गंडासी से वार किया। वकील का कहना है कि फिर किसी को चोट क्यों नहीं आई। इसी तरह पैर पर गोली के निशान के बारे में उनका कहना है कि यह मारने की नियत नहीं थी। बल्कि अपनी जमीन में खुदाई को रोकने की कोशिश थी।
जमानत के रूप में मिली पहली कामयाबी, आगे भी जारी रहेगी कानूनी लड़ाई : चित्रा
जगाधरी सेशन कोर्ट में पूर्व मंत्री को जमानत मिलने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटी। पूर्व मंत्री की बेटी चित्रा सरवारा ने कहा कि उनके पिता पर जो केस हुआ है वह पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है और उनके पापा को झूठे केस में फंसाया गया है। उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। पिता की जमानत मंजूर होने के रूप में उन्हें पहली कामयाबी मिली है। आगे भी वह अपने केस को कानूनी रूप से लड़ते रहेंगे। चित्रा सरवारा ने बताया कि इस केस की हर पहलू से जांच करेंगे और सभी साक्ष्य जुटाएंगे। पापा के बाहर आने पर वह हर पहलू पर बातचीत और आगे की रणनीति पर विचार विमर्श भी करेंगे।
ये था मामला :
बेलगढ़ में पूर्व मंत्री निर्मल सिंह के लगभग 700 एकड़ में घोड़ों का फार्म है और निर्मल सिंह के जमीन के आसपास अवैध खनन करने वालों ने काफी एरिया खोद डाला था। 25 अप्रैल को बेलगढ़ में अवैध खनन को लेकर कांग्रेस के पूर्व मंत्री और बेलगढ़ में कुछ स्क्रीन संचालकों के बीच रास्ते को लेकर कहासुनी हो गई थी। जिसको लेकर बेलगढ़ में फायरिंग हुई। इस मामले को लेकर खिजराबाद पुलिस में पूर्व मंत्री निर्मल सिंह समेत 12 लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। खिजराबाद पुलिस ने अगले ही दिन निर्मल सिंह के मुंशी छोटा असलम को गिरफ्तार कर लिया था उससे अगले दिन पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने एसपी के समक्ष पेश होकर आत्मसमर्पण कर लिया था। जेल जाने से पहले निर्मल सिंह ने बताया था कि अवैध खनन करने वाले उसकी जमीन में से होकर गुजरने वाले रास्ते में से अवैध खनन से भरी सामग्री से भरे वाहन निकाल रहे थे। जिस पर उन्होंने एतराज जताया था। उसने अपनी जमीन में से निकलने वाले रास्ते को जेसीबी मशीन से खाई खोदकर बंद कर दिया था लेकिन कुछ स्क्रीन प्लाट संचालकों ने वह रास्ता दोबारा से चालू कर दिया था। इसी बात को लेकर उसमें और स्क्रीन प्लाट संचालकों में कहासुनी हुई थी। मंगलवार को इस मामले में तीन आरोपियों ने बिलासपुर कोर्ट में सरेंडर किया था।
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