जिंदगी में आए तूफान को दरकिनार कर जीता गोल्ड
-पहले कोटा हासिल करने के बावजूद रियो ओलंपिक टीम में नहीं मिला स्थान-
-एक साल पहले महिला शूटर ने लगाया था रेप का आरोप-
गुरदीप सिंह सोढी
यमुनानगर।
वर्ल्ड कप, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स सहित अन्य इंटरनेशनल चैंपियनशिप में 60 से अधिक मेडल जीत चुके संजीव राजपूत के लिए यह गोल्ड मेडल काफी खास है। पूर्व के दो कॉमनवेल्थ गेम्स में संजीव सिल्वर व ब्रॉन्ज मेडल अपनी झोली में डाल चुका है।
शूटिंग में 14 साल के स्वर्णिम कैरियर में संजीव को रियो ओलंपिक के बाद से गर्दिश भरे दिन देखने पड़े। रियो ओलंपिक क्वालिफाई करने के लिए दिल्ली में हुई एशियन चैंपियनशिप में संजीव ने कोटा हासिल कर लिया था। इसके बावजूद उसे रियो जाने वाली निशानेबाजी टीम में शामिल नहीं किया गया। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ ने संजीव की जगह मानवजीत सिंह संधू को रियो भेजा। संजीव राजपूत इकलौते ऐसे निशानेबाज थे, जो कोटा हासिल करने के बावजूद रियो ओलंपिक नहीं भेजे गए।
संजीव इंटरनेशनल चैंपियनशिप में 60 से अधिक मेडल जीत चुका है। बीजिंग और लंदन ओलंपिक में हिस्सा लेने के बावजूद उसकी झोली में ओलंपिक पदक नहीं आया है। रियो ओलंपिक से संजीव को काफी आशाएं थीं और इसके लिए उसने काफी प्रैक्टिस भी की। रियो ओलंपिक में हिस्सा न ले पाने के कारण संजीव को काफी मायूसी हुई।
एक साल पहले भी संजीव को दोबारा घोर मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी थी। दिल्ली की एक महिला निशानेबाज ने संजीव पर रेप का आरोप लगाया। उसकी शिकायत पर संजीव के खिलाफ रेप का मामला दर्ज किया गया। हालांकि संजीव ने खुद को बेकसूर बताया। इन दो घटनाओं ने संजीव के कैरियर में कुछ देर के लिए ब्रेक लग गया। गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर संजीव ने यह साबित कर दिया है कि उसकी पदकों की भूख अभी शांत नहीं हुई है।
फोन पर बोला- पापा, अब ओलंपिक मेडल जीतना है...
गोल्ड कोस्ट में गोल्ड मेडल जीतने के बाद संजीव ने अपने पिता किशनलाल से फोन पर काफी देर बात की। उसने कहा- पापा कॉमनवेल्थ में गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मिल गया। अब ओलंपिक में भी मेडल जरूर जीतूंगा।