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ंगल के दो किलोमीटर पथरीले रास्ते से जंगली जानवरों के ख्रौफ के बीच पानी लाने को मजबूर फैजपुर की महिलाएं व बच्चें

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जंगल के दो किलोमीटर पथरीले रास्ते से जंगली जानवरों के खौफ के बीच पानी लाने को मजबूर फैजपुर की महिलाएं व बच्चे
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-हरियाणा में हिमाचल से लगते अंतिम गांव फैजपुर में आजादी के 70 साल बाद भी बिजली व पेयजल किल्लत
-150 घरों की 700 की आबादी झेल रही पेयजल किल्लत-
-प्यास बुझाने व दैनिक कार्यों के लिए जंगल से लाना पड़ता है चोये का पानी-
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/खिजराबाद।
जंगल में दो किलोमीटर पथरीले रास्ते पर जंगली जानवरों के खौफ बीच से होकर 150 परिवारों की महिलाओं को रोज पानी लाना पड़ रहा है। ये नजारा हरियाणा की सीमा में हिमाचल से लगते अंतिम गांव फैजपुर का है। यहां आजादी के 70 साल बाद भी ग्रामीण बिजली के साथ-साथ पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों की मानें तो 150 घरों में से 110 घरों में ट्यूबवेल का पानी आता है, लेकिन अक्सर बिजली न आने के कारण उन्हें ट्यूबवेल का पानी नहीं मिल पाता है। शेष 40 घर ऊंचाई पर होने के कारण वहां ट्यूबवेल का पानी नहीं पहुंच पाता है। ऐसे में इन परिवारों को प्यास बुझाने व दैनिक कार्यों के लिए जंगल में जमीन से रिसने वाले पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि गांव में पेयजल सप्लाई के लिए दो ट्यूबवेल हैं। इनमें से एक काफी समय से खराब है और दूसरे ट्यूबवेल का पानी ऊंचाई वाले 40 घरों तक नहीं पहुंच पाता है। पेयजल की समस्या के निदान के लिए प्रशासन की ओर से बीते तीन वर्षों में दूसरे ट्यूबवेल का दो बार बोर कराया गया, लेकिन वाटर लेवल नीचे चले जाने से पानी की सप्लाई नहीं हो पाई।
जंगल की तलहटी में बसे गांव फैजपुर निवासी असगरी, मनीषा, रहमत, अफसाना व फिरदोस ने बताया कि गांव में बिजली व पेयजल की समस्या से ग्रामीण कई दशकों से जूझ रहे हैं। गांव में बने 150 घरों पर एक ट्यूबवेल है। इस ट्यूबवेल का पानी गांव के दूसरे छोर पर ऊंचाई में बने 40 घरों मेें नहीं पहुंच पाता। गांव में बिजली भी अकसर गुल रहती है, जिस कारण निचले घरों को भी पानी की सप्लाई नहीं हो पाती। ग्रामीणों की मांग पर करीब तीन वर्ष पहले दूसरे ट्यूबवेल का काम लगाया गया, लेकिन दो बार बोर करने पर भी उसमें वाटर लेवल न होने के कारण वह नहीं चल पाया। महिलाओं ने बताया कि बिजली आने पर गांव के 110 घरों को पानी मिल जाता है, लेकिन बिजली न रहने पर इन परिवारों की महिलाओं को भी गांव के अन्य 40 परिवारों की तरह मजबूरन गांव से करीब दो किलोमीटर दूर जंगल में चोये (जमीन से रिसने वाले पानी) से भरकर पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में उनकी ओर से सरपंच से लेकर संबंधित विभागों को कई बार शिकायत की, लेकिन वर्षों बाद भी उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।
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पथरीले रास्ते पर कई बार गिर चोटिल हो जाती हैं महिलाएं:
शकीला, जुलिया, महरूना ने बताया कि गांव से दो किलोमीटर जंगल का रास्ता पथरीला है। पानी के लिए जाते और आते समय कई बार महिलाएं गिरकर चोटिल भी हो चुकी हैं। महिलाएं अपने साथ बच्चों को भी पानी भरने के लिए लेकर जाती हैं। ऐसे में उन्हें अपनी व बच्चों की चिंता सताती रहती है। लेकिन पानी की खातिर उन्हें अपनी व बच्चों की जान खतरे में डालनी पड़ती है।
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बूस्टर टेक्नीक से गांव में पेयजल सप्लाई की है योजना: जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियांत्रिकी विभाग के जेई दीपक चौहान ने बताया कि गांव की ऊंचाई काफी अधिक है। दूसरे ट्यूबवेल के लिए दो बार बोर कराने पर भी वाटर लेवल नहीं मिला। विभाग की ओर से बूस्टर टेक्नीक से गांव में पेयजल सप्लाई करने की योजना है। इसमें कुछ दूरी पर कलेसर के आसपास भू-जल मिलने पर उसे पाइपलाइन से बूस्ट कर गांव तक पहुंचाया जाएगा। इससे पेजयल दिक्कत दूर हो पाएगी। इसको लेकर एस्टीमेट बनाकर भेजा है, जिस पर पास होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।

गांव फैजपुर में पेयजल समस्या बारे में जानकारी नहीं है। वह ग्राम सचिव को गांव में समस्या का जायजा लेकर समाधान को लेकर निर्देश देंगे।
राजकुमार, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, खिजराबाद।
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