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सुबह 10:06 बजे से अष्टमी व कंजका पूजन का मुहूर्त..

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सुबह 10:06 बजे से अष्टमी व कंजक पूजन का मुहूर्त
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- नवमी तिथि का क्षय होने से अष्टमी पर कंजक पूजन को लेकर दुविधा में हैं लोग
24 मार्च को 10:06 से शुरू होकर 25 मार्च की सुबह 8:03 तक रहेगी अष्टमी
ज्योतिषों के अनुसार अष्टमी व कंजक पूजन 24 मार्च को करना ही रहेगा शुभ
यमुनानगर। नवरात्र पर दुर्गा अष्टमी व कंजक पूजन को लेकर लोगों दुविधा में हैं। इसका कारण इस बार नवरात्र के नौ दिन न होकर आठ दिन का होना है, ऐसा नवमी तिथि का क्षय होने से हो रहा है। ज्योतिषों की मानें तो अष्टमी व कंजक पूजन 24 मार्च को सुबह 10:06 के बाद करना शुभ रहेगा। इसी समय से अष्टमी प्रारंभ होगी, जो 25 मार्च को सुबह 8 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ होगा। 25 मार्च को अष्टमी-नवमी पर सूर्योदय होने से इस दिन भी सुबह आठ बजे से पहले कंजक पूजन किया जा सकता है।
नवरात्र के छठे दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मां भगवती के छठे स्वरूप माता कात्यायनी की पूजा अर्चना की। घरों व मंदिरों में सुबह व देर शाम श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी दिखी। वहीं, श्रद्धालुओं में अष्टमी व कंजक पूजन को लेकर भी खुमार नजर आया। दुर्गा अष्टमी की पूर्व संध्या पर कंजक पूजन के लिए बाजार में लोगों ने पूजन सामग्री और कन्याओं को देने के लिए उपहार की खरीदारी की। दिनभर सबसे ज्यादा भीड़ शहर के रेलवे रोड स्थित गीता भवन मंदिर के समीप और मीराबाई बाजार, खेड़ा बाजार व न्यू मार्केट में रही। जहां श्रद्धालुओं में विशेषकर महिलाओं ने कंजक पूजन के लिए चूनरी, चूड़ी, नारियल, थाली, कटोरी, धूपबत्ती, फूल आदि सामग्री समेत उपहार में देने को गिफ्ट खरीदे। गिफ्ट शॉप पर खरीदारी करने पहुंची बिमला, रजनी, मनीशा ने बताया कि उन्होंने कंजकों के लिए महंगे गिफ्ट खरीदे हैं और साथ ही बाजार से पूजन की सामग्री में चूनरी, धूपबत्ती, पलेट्स आदि सामान खरीदा है।
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श्रद्धाभाव से किए कंजक पूजन से होती मां गौरी की अटूट कृपा:
पंडित संजय चतुर्वेदी ने बताया कि इस बार नवरात्र आठ दिन के हैं। ऐसा नवमी तिथि का क्षय होने से हुआ है। 24 मार्च को सप्तमी तिथि सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। इसके बाद से अष्टमी प्रारंभ होगी, जो 15 मार्च को सुबह 8:03 तक रहेगी। नवरात्रों के हिसाब से सीधे तौर पर आठवां नवरात्र 25 मार्च को बनता है, परंतु तिथियों और चौघड़िया की गणना अनुसार अष्टमी तिथि का कंजक पूजन 24 मार्च को करना ही शुभ है, क्योंकि 25 मार्च को अष्टमी तिथि केवल तीन घड़ी और 53 पल के लिए ही बनती है।
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