यमुना नदी पर पुल बनने से बहेगी विकास की गंगा
-112 करोड़ की लागत से नगली घाट पर बनेगा पुल-
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/रादौर। यमुना नदी के नगली घाट पर लगभग 112 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले एक किलोमीटर लंबे पुल से जठलाना क्षेत्र के गांव में विकास की नई राह खुलने जा रही है। पुल बनने से जठलाना क्षेत्र के यमुना नदी किनारे बसे गांव के हजारों लोगों को इसका लाभ मिलेगा। दशकों से जठलाना क्षेत्र बाढ़ प्रभावित क्षेत्र रहा है। इस कारण जठलाना क्षेत्र विकास की दृष्टि से बुरी तरह पिछड़ा हुआ है।
पुल बनने से किसानों की बंजर भूमि होगी आबाद, बढे़गा फसलों का उत्पादन
जठलाना क्षेत्र के गांव संधाला, संधाली, माजरी, गुमथला, एमटी करहेडा, जठलाना, उन्हेडी, बागवाली, पौबारी, निकुंभ आदि गांवों के किसानों की यमुनानदी पार लगभग 5 हजार एकड़ भूमि है। इस पर किसान खेती कर रहेे हैं। यमुनानदी में बाढ़ आने पर किसान महीनों-महीनों यमुनानदी पार अपने खेतों में नहीं जा पाते। उन्हें खेतों में जाने के लिए कलानौर के रास्ते उत्तरप्रदेश के नसरूलागढ़ व टाबर गांव से होकर अपने खेतों में जाना पड़ता है। इससे किसानों को अधिक धन व समय खराब करना पड़ता है। संधाला गांव के पूर्व सरपंच डॉ. सुखबीर कांबोज, पूर्व सरपंच शिवकुमार संधाला ने बताया कि पुल बनने से किसान कुछ ही देर में अपने खेतों में पहुंच सकेंगे। पहले किसान यमुना नदी पार नाव या गुमथला घाट के अस्थाई पुल से खेतों में जाते रहे हैं। लेकिन अब पुल बनने पर किसान यमुना नदी पार अपने खेतों में हर रोज जाकर अपनी फसलों की सही देखभाल कर सकेंगे।
किसानों की भूमि के बढेेे़ंगे दाम
यमुना नदी के नगली घाट पर पुल बनने की घोषणा होते ही जठलाना क्षेत्र मेें जमीनों के दाम बढ़ने की संभावनाएं जताई जा रही है। आम तौर पर यमुना नदी पार की जमीन के दाम कम रहे हैं। इसका कारण किसानों ने यमुना पार जाने के लिए रास्तों की कमी को बताया है। वहीं अधिक दूर होने पर किसान फसलों की अच्छी देखभाल नहीं कर पाते। इससे फसलों के उत्पादन पर असर पड़ता है। अब पुल बनेगा तो किसान पुल के रास्ते अपने खेतों में आसानी से जा सकेंगे। इससे किसानों की भूमि के दाम भी बढ़ना तय है। किसान जगमालसिंह, जगमोहन, नीटू संधाली ने बताया कि नगली घाट पर बनने वाला पुल क्षेत्र के लोगों की जीवन रेखा बनेगा। पुल बनने से ही क्षेत्र का विकास होगा। सरकार जल्द से जल्द पुल बनाए।
बाढ़ग्रस्त क्षेत्र कहलाने से ग्रामीणों को रिश्ते करने में हो रही दिक्कत
जठलाना क्षेत्र लंबे समय से बाढ़ग्रस्त क्षेत्र रहा है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों को अपने बच्चों के रिश्ते करने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। अब यदि पुल बना तो पुल के साथ पटरी भी बनेगी। इससे बाढ़ आने की संभावना नहीं रहेगी। ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके गांव को बाढ़ प्रभावित गांव कहकर लोग यमुना किनारे बसे गांव में रिश्ता करना पसंद नहीं करते। लेकिन अब पुल बनने की घोषणा हुई है तो इसमें सुधार आएगा। उत्तर प्रदेश के गांव नसरूलागढ़ निवासी अशोक राणा, सतपाल राणा, परमजीत राणा, सरपंच नसरूलागढ़ सतपाल सैनी ने बताया कि पुल बनने से दोनों राज्यों के लोग एक दूसरे के क्षेत्र में आसानी से आ जा सकेंगे। इससे आपसी भाईचारा बढे़गा।
मिल में गन्ना डालने में किसानों को होगी सुविधा
यमुना नदी पार हरियाणा के किसानों की हजारों एकड़ भूमि है। अधिकतर भूमि पर गन्ने की खेती हो रही है। यमुना पार से गन्ने की फसल को शुगर मिल तक लाने के लिए किसानों को मशक्कत करनी पड़ती है। किसानों को अपनी गन्ने की फसल या तो गुमथला घाट के अस्थायी पुल से या उत्तर प्रदेश के रास्ते शुगर मिल में लानी पड़ती है। शुगर मिल की ओर से यमुना नदी पार गांव प्रहलादपुर में गन्ना सेंटर भी लगाया गया है। पुल बनने के बाद यमुना नदी पार से किसान पुल के रास्ते आसानी से अपनी गन्ने की फसल को शुगर मिल ला सकेंगे।
पुल के साथ पटरी बनने से नहीं होगा भूमि कटाव
नगली घाट पर पुल बनने से आसपास के गांव की पटरी पक्की होगी। इससे बाढ़ आने पर भूमि कटाव नहीं होगा। हर वर्ष बाढ़ आने से भूमि का काफी कटाव होता है। इससे किसानों को फसलों व भूमि से हाथ धोना पड़ता है। किसान सुखबीर, रणपाल, ऋषिपाल ने बताया कि भूमि कटाव से किसानों की सैकड़ों एकड़ भूमि यमुना नदी में समा चुकी है। पुल बनने से किनारे पक्के होंगे तो भूमि कटाव नहीं होगा।
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