पहले लगा किसान ट्रैक्टर लेकर पुलिस के पीछे दौड़े, जांच में नहीं हुई पुष्टि
किसानों पर लगाई गई धारा 307 हटाई,
पुलिस अधीक्षक ने किसानों पर रबड़ की गोलियां चलने से इनकार किया
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। रादौर में स्टेट हाईवे जाम करने पर किसानों पर लगाई गई आईपीसी की धारा 307 मंगलवार को पुलिस द्वारा हटा ली गई, लेकिन अन्य धाराओं के तहत मामला चलता रहेगा। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में किसानों पर यह धारा लगाई गई थी, लेकिन जांच में इसकी पुष्टि नहीं हो पाई, जिस कारण यह हटा दी गई।
पुलिस अधीक्षक राजेश कालिया ने पत्रकारवार्ता में रादौर में जाम लगाने वाले किसानों पर रबड़ की गोली चलाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों पर आईपीसी की धारा 307 समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। तब पता चला था कि किसानों ने पुलिस कर्मियों पर ट्रैक्टर ट्रॉली चढ़ाने का प्रयास किया है। अपने वाहन लेकर पुलिस कर्मियों का पीछा किया है, लेकिन जांच में ये साबित नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि नामजद किसानों के अलावा किसी अन्य को कोई दिक्कत नहीं आएगी। उन्हीं किसानों से पूछताछ होगी जिनकी पहचान हुई है। जो वाहन जब्त किए थे वो थानों में खड़े हैं। किसान उन्हें छुड़वा सकते हैं। धारा 307 हटने के बाद किसान जमानत के लिए कोर्ट जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों पर कोई गोली नहीं चलाई गई है। मौके से एक भी खोल नहीं मिला है।
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आरोपी पुलिस कर्मियों पर हो कार्रवाई :
किसानों पर केस दर्ज होने के बाद दादूपुर-नलवी नहर संघर्ष समिति भी आगे आ गई है। समिति के प्रधान कश्मीरी लाल ढिल्लों ने कहा कि शांतिपूर्वक अपनी बात रखने वाले किसानों पर पुलिस ने लाठियां भांजीं। झूठे मुकदमे दर्ज किए, इसलिए किसानों पर दर्ज झूठे मुकदमों को रद किया जाए। केस की न्यायिक जांच करवाकर दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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41 किए थे नामजद, 35 को गिरफ्तार कर जेल भेजा
22 फरवरी को रादौर में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस ने 41 लोगों को नामजद करते हुए 150 के करीब अन्य किसानों के विरुद्ध मामले दर्ज किए थे। 41 किसानों में से 35 को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें कोर्ट में पेश कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। लाठीचार्ज के दौरान पुलिस ने 40 से अधिक ट्रैक्टर ट्रालियों, एक पानी का टैंकर व दो अन्य वाहन कब्जे में लिए थे।
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ये लगाई थीं धाराएं
पुलिस ने आईपीसी की धारा 148, 149, 283, 341, 307, 332, 188, 120बी व 8ए एनएच एक्ट के तहत किसानों पर मारपीट, हत्या के प्रयास, रोड जाम करने, सरकारी काम में बाधा डालने व षड्यंत्र रचने का मामला दर्ज किया था।
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इन्हें किया गया था गिरफ्तार
पुलिस ने भाकियू प्रदेश सचिव हरपाल सुढल, भाकियू जिला प्रधान संजू गुंदियाना, रादौर ब्लॉक प्रधान कर्ण बुबका के अलावा सीटू नंबरदार, ईश्वर टोपरा, रामरतन टोपरा, अनिल लोपो, ईश्वर टोपरा कलां, सुखबीर सिपियांवाला, बलदेव दौलतपुर, प्रेम दौलतपुर (दोनों थाना छप्पर) प्रेम औरंगाबाद, संजू गुंदयाना, मेहम सिंह संधाय, पूर्णचंद गुंदयाना, सुभाष बड़ी खजूरी, पम्मी ससौली, विक्रम लोपो, तेजबीर लोपो, रणबीर लेदी, अमर सिंह पाबनी, तारा सिंह पाबनी, इंद्रपाल पाबनी, जसबीर बदनपुरी, रविंद्र पाबनी, रमेश महेश्वरी, बृजपाल महेश्वरी, शिवकुमार, गुरमीत अमली, गुरदयाल दौलतपुर व हरदयाल रांगडान दौलतपुर आदि को गिरफ्तार किया था।
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इनसर्ट-
सभी मामले वापस हों वरना किसान नहीं करवाएंगे जमानतें
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि हत्या के प्रयास का मामला वापस लिए जाने पर भी किसान अपनी जमानतें नहीं करवाएंगे। रोष प्रकट करने के लिए जेलों में ही रहेंगे। साथ ही किसान थानों में खड़ी ट्रैक्टर ट्रालियों की कोर्ट से सुपुर्दगी नहीं करवाएंगे। उन्होंने कहा कि जब तक अधिकारी अपने आप ट्रैक्टर ट्रालियों को ले जाने के आदेश नहीं देंगे तब तक वह ट्रैक्टर ट्रालियां वापस नहीं लाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलन के दौरान बनाए गए सभी मामले वापस ले। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने व किसानों का पूरा कर्ज माफ करवाने को लेकर 28 फरवरी को सुबह 10 बजे नई अनाज मंडी रादौर से चंडीगढ़ तक पदयात्रा की जाएगी। पांच मार्च को यात्रा नाडा साहब गुरुद्वारा पंचकूला पहुंचेगी, 6 मार्च को किसान अपनी मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव करेंगे।
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हत्या के प्रयास का मामला वापस होने पर किसानों के चेहरे खिले
रादौर। मंगलवार को प्रशासन ने हत्या के प्रयास का मामला वापस लिया, जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। किसान जसविंद्र सिंह, संदीप सैनी, धीरपाल सैनी, रामनाथ, कर्ण बुबका, धर्मबीर ने बताया कि किसानों पर हत्या के प्रयास का मामला झूठा बनाया गया था। ऐसे में प्रशासन द्वारा मामला वापस लेना सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन देश के लोगों का पेट भरने वाले किसानों के विरुद्ध इस प्रकार के बड़े मामले नहीं बनाने चाहिए। उन्होेंने कहा कि प्रशासन को अब चाहिए कि किसानों की ट्रैक्टर ट्रालियां भी वापस कर दे।