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हादसों के बाद भी नहीं सुधर रहे हालात...आखिर स्कूल बसों में म्यूजिक सिस्टम का क्या काम?

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हादसों के बाद भी नहीं सुधर रहे हालात... आखिर स्कूल बसों में म्यूजिक सिस्टम का क्या काम?
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शुक्रवार को अंबाला में स्कूल बस पलटने से बच्ची व कंडक्टर की मौत व 20 बच्चे हुए घायल
हादसे के दौरान चालक की ओर से तेज आवाज में म्यूजिक सिस्टम चलाए जाने की कही गई बात
शहर की स्कूल बसों में म्यूजिक सिस्टम तो नहीं... ट्रैफिक पुलिस ने चलाया विशेष अभियान
अभियान के तहत 20 बसों की जांच में पांच के खामियां मिलने पर किए चालान
दो बसों में लगे मिले म्यूजिक सिस्टम, एक पर नेमप्लेट नहीं तो अन्य दो में मापदंड पूरे नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर।
अंबाला सिटी में शुक्रवार सुबह हुए स्कूल बस हादसे के बाद ट्रैफिक पुलिस ने शहर के स्कूलों की बसों के हालात जानने को विशेष अभियान चलाया। चूंकि अंबाला में हुए हादसे की वजह बच्चों द्वारा चालक के तेज आवाज में म्यूजिक सिस्टम चलाए जाने को बताया गया। इसी को मद्देनजर रख ट्रैफिक पुलिस ने स्कूल बसों में म्यूजिक सिस्टम तो नहीं लगा, इस पर नजर रखी। दोपहर में स्कूलों की छुट्टी के बाद बच्चों को घर छोड़ने व छोड़कर लौट रहीं बसों को रोककर जांच की गई। इस दौरान करीब 20 बसों में से पांच में खामियां मिलने पर उनके चालान कर दिए गए। इनमें दो बसों में म्यूजिक सिस्टम लगे मिले। एक पर नेम प्लेट नहीं तो अन्य दो में मापदंड पूरे नहीं थे। ट्रैफिक पुलिस की टीम ने चालान के साथ चालकों को तुरंत प्रभाव से इन सिस्टम को बस से उतरवाने के निर्देश दिए।
बता दें कि अंबाला सिटी में नारायणगढ़ रोड पर एनसीसी स्कूल बस साइकिल सवार के सामने आ जाने पर पलट गई। हादसे में एक बच्ची व कंडक्टर की मौत हो गई, जबकि बस में सवार करीब 20 बच्चे घायल हो गए। बच्चों के मुताबिक हादसे के वक्त चालक ने बस में तेज आवाज में म्यूजिक सिस्टम चला रखा था। हादसे के बाद शहर में निजी स्कूलों की बसों के हालात जानने के लिए ट्रैफिक थाना प्रभारी निर्मल सिंह के नेतृत्व में ट्रैफिक पुलिस ने अभियान चलाया। इसके तहत दोपहर में स्कूलों की छुट्टी के बाद कन्हैया साहिब चौक व जगाधरी बस स्टैंड चौक पर स्कूलों बसों की रोककर जांच की गई।
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स्कूल बस में म्यूजिक सिस्टम होना सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के खिलाफ
ट्रैफिक थाना प्रभारी निर्मल सिंह ने बताया कि ड्राइविंग करते वक्त म्यूजिक सिस्टम चलाया जाता है तो ध्यान बंटने से हादसे की आशंका बढ़ जाती है। स्कूल बस में म्यूजिक सिस्टम होना, सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के खिलाफ है। इसी को मद्देनजर रख बसों की जांच की गई। 20 बसों में से 2 में म्यूजिक सिस्टम लगे मिले, जिनके चालान कर चालकों को उतरवाने के निर्देश दे दिए हैं। इसके अलावा एक बस पर नेम प्लेट व दो बसों में मापदंड पूरे न मिलने पर चालान किए गए। उनका यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि बच्चों का घर से स्कूल व स्कूल से घर आने-जाने का सफर सुरक्षित बने।
फोटो-4 व 5

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इनसर्ट
ये कब सुधरेंगे?
क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाकर चल रहे ऑटो चालक, प्रतिबंध के बाद भी ड्राइवर के दोनों ओर लगी सीट
इन्हें न नियमों की परवाह न जान जाने का डर, ट्रैफिक पुलिस द्वारा कई बार कार्रवाई के बाद फिर वही हालात
यमुनानगर (ब्यूरो)। ऑटो पर घर से स्कूल और स्कूल से घर आ-जा रहे बच्चों का सफर सुरक्षित नहीं बन पा रहा है। चूंकि चालक पैसों के लालच में क्षमता से अधिक बच्चों को ऑटो में बैठाकर चल रहे हैं वहीं, प्रतिबंध के बाद भी ड्राइवर सीट के दोनों ओर से सीट नहीं हटवा रहे। हालांकि इसको लेकर ट्रैफिक पुलिस कई बार चालान करने की कार्रवाई कर चुकी है। बावजूद इसके ऑटो चालक नहीं सुधर रहे।
ट्विनसिटी में करीब चार दर्जन प्राइवेट स्कूल हैं। इन स्कूलों के अधिकतर बच्चे प्राइवेट वाहनों में स्कूल आते-जाते हैं। इनमें ऑटो से स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है। इतना ही नहीं ऑटो चालक बच्चों को अगली सीट पर अपने दोनों और बैठाकर चल रहे हैं। जबकि बीते सालों में प्रदेश में स्कूली वाहनों के हादसों के बाद जिला प्रशासन द्वारा ऑटो चालकों पर सख्ती कर ऑटो में ड्राइविंग सीट के साथ की सीटें हटाने व पीछे सीटों पर क्षमता अनुसार सवारी बैठाने के आदेश दिए थे। यह नियम कुछ समय तक ही प्रभावी रहे।

चार के बजाए होते 10-15 बच्चे, सुरक्षा के प्रबंध अधूरे
ऑटो में स्कूली बच्चों को घर से स्कूल व स्कूल से घर लाने-ले जाने के लिए मापदंड तय किए गए हैं। अगर ऑटो में सुरक्षा के सभी प्रबंध हों तो थ्री सीटर ऑटो में ज्यादा से ज्यादा चार स्कूली बच्चों को बैठाया जा सकता है। इसके अलावा चालक सीट के साथ दोनों ओर से सीट हटाना (ताकि आगे बच्चों को न बैठाया जा सके) व फॉग सीजन में चारों ओर सेव गार्ड व रिफ्लेक्टर लगाना जरूरी है। सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी में भी स्कूली बच्चों को लाने- ले जाने वाले वाहनों के लिए कुछ मानक तय किए गए हैं। लेकिन शहर में ऑटो में 10 से 15 स्कूली बच्चों को ले जाया जा रहा है। इसमें दो से तीन बच्चे चालक के साथ दोनों ओर बनी सीटों पर बैठे होते हैं, जबकि ऑटो की खिड़की में फट्टे पर भी एक-दो बच्चे बैठा दिए जाते हैं। इसके अलावा अधिकतर ऑटो में सेव गार्ड व रिफ्लेक्टर भी नहीं लगे हैं।
बॉक्स
अभिभावकों का तर्क-ऑटो में भेजना हमारी मजबूरी-
शास्त्री कॉलोनी के राजेश कुमार, राजेंद्र, गुरजंट सिंह ने कहा कि साधन व समय की कमी के चलते ऑटो से बच्चों को स्कूल भेजना उनकी मजबूरी है। वे भी नहीं चाहते कि बच्चों को कोई परेशानी हो, किंतु स्कूल बसों की कमी के कारण उनके पास अन्य कोई विकल्प नहीं रह जाता है। स्वयं के पास स्कूल छोड़ने व वहां से लाने के लिए समय के अभाव में भी अभिभावकों को अपने बच्चों को ऑटो में भेजना पड़ता है।
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वर्जन
डाइविंग सीट के दोनों ओर से सीट हटाने को लेकर और क्षमता से अधिक सवारी बैठाने वाले ऑटो चालकों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
निर्मल सिंह, प्रभारी, ट्रैफिक थाना। फोटो-17 से 21
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