तीन साल में सड़कों हादसों में गई 770 की जान, 1305 हुए घायल
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिले में सड़क का सफर साल-दर साल खतरनाक हो रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन सालों में सड़क हादसों के 1461 मामले दर्ज हुए। इनमें 770 मौतें हुई, जबकि 1305 घायल हुए। जिले में साल-दर-साल सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से वर्ष 2017 सबसे बुरा रहा। वर्ष 2016 के मुकाबले वर्ष 2017 में 91 अधिक मौतें हुई। पिछले तीन सालों में भी सबसे अधिक मौतें वर्ष 2017 में हुई हैं।
तीन सालों में सड़क हादसों का ब्योरा
-वर्ष 2015 में जिले में सड़क दुर्घटनाओं के कुल 468 मामले दर्ज किए गए। इनमें 237 व्यक्तियों की जान गई, जबकि कुल 409 व्यक्ति घायल हुए।
-वर्ष 2016 में सड़क दुर्घटनाओं के 478 मामले दर्ज किए गए। इनमें 209 व्यक्तियों की जान गई और 466 घायल हुए।
-वर्ष 2017 में सड़क दुर्घटनाओं के 515 मामले दर्ज किए गए। इनमें 312 की मौत हुई और 430 घायल हुए।
ओवरलोड वाहन भी जानलेवा
यमुनानगर जिले में खनन व प्लाईवुड भले ही जिले के विकास को गति दे रहे हैं, लेकिन एक सच यह भी है कि इनकी वजह से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। खनन जोन से ओवरलोड रेत-बजरी लादकर सड़कों पर दौड़ने वाले डंपर व ट्रक से आए-दिन सड़कों पर जानलेवा हादसे हो रहे हैं। रेत-बजरी से लदे भारी वाहनों से अधिकतर जानलेवा हादसे नेशनल हाइवे पर हुए हैं। इसके बावजूद हाइवे पर ना तो रेत-बजरी के वाहनों की स्पीड कम हुई है और न ही ओवरलोड।
अधिकतर ट्रैक्टर-ट्राली चालकों के पास नहीं होता लाइसेंस
ट्रैक्टर-ट्रालियों से होने वाले सड़क हादसों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ट्रैक्टर ट्रालियों से होने वाले हादसों में यह बात सामने आई है कि अधिकतर ट्रैक्टर-ट्राली चालकों के पास लाइसेंस नहीं होता है। खनन सामग्री और पाप्लर, सफेदा व प्लाई पत्ते से लदी सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रालियों रोज सड़कों पर दौड़ती नजर आती हैं। शहरी क्षेत्र मेें ट्रैक्टर-ट्रालियों के सड़कों पर खराब होने से आए-दिन सड़क जाम भी लगता है।
जानलेवा हादसों के बाद भी हेलमेट से परहेज
दो मोटरसाइकिल की भिड़ंत के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। सालभर में मोटरसाइकिलों की भिड़ंत में 10 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। अधिकतर मामलों में मोटरसाइकिल पर ट्रिपल राइडिंग के साथ-साथ बाइक स्पीड में चलाने की बात सामने आई है। खास बात यह है कि मोटरसाइकिलों की भिड़ंत में मरने वालों और घायलों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था। जानकारों का मानना है कि मोटरसाइकिलों की भिड़ंत मेें मौत होने की संभावना कम होती है। लेकिन सिर पर हेलमेट न पहनने के कारण सड़क पर गिरने से बाइक सवार के सिर पर चोट लग जाती है। इससे उसकी जान चली जाती है। सड़क हादसों में मोटरसाइकिल सवारों की मौतें होने के बावजूद दुपहिया वाहन सवार हेलमेट पहनने से परहेज कर रहे हैं।
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अधिकतर सड़क हादसों में वाहन चालकों की लापरवाही सामने आती है। अक्सर वाहन चालक शराब पीकर वाहन चलाते हैं, जो हादसे का कारण बनता है। बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चलाने वालों के हर महीने चालान काटे जाते हैं। इसके बावजूद सभी लोग हेलमेट पहनकर वाहन नहीं चलाते।
- निर्मल सिंह, एसएचओ ट्रैफिक