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पेज एक का एंकर:- यहां बेटियों के जन्म पर होता कुआं पूजन व बजती थाली

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बेटियों के जन्म पर होता है कुआं पूजन और बजती हैं थालियां
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यमुनानगर। बेटा-बेटी के बीच भेद करने जैसी सोच न रख गांव अर्जुन माजरा के ग्रामीण बेटियों को बेटों से बढ़कर सम्मान देने लगे हैं। तभी यहां बेटियों के जन्म पर कुआं पूजन होने लगा है और थाली भी बजाई जाती है। इसी तरह बीते छह माह में जन्मीं आठ बेटियों का वीरवार को कुआं पूजन कर उन्हें आकर्षक उपहार भी दिए गए। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास विभाग की सीडीपीओ सीमा प्रसाद की अध्यक्षता में हुआ।
बता दें कि 987 की आबादी वाले गांव अर्जुन माजरा में 5515 पुरुष व 472 महिलाएं हैं। यहां 2016 में 8 लड़कों पर चार लड़कियां जन्मी थीं। यानि लड़कों के मुकाबले चार लड़कियां कम जन्मीं, गांव के इस लिंगानुपात को देख महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसमें सुधार के लिए फोकस किया। आंगनबाड़ी व आशा वर्कर्स सहित सरपंच व पंचों ने रैली, नुक्कड़ सभाओं व अन्य जागरूकता कार्यक्रमों को कर ग्रामीणों को बेटियों का महत्व बताया। ग्रामीणों द्वारा बेटों की तरह बेटियों के जन्म पर भी कुआं पूजन व थाली बजाने की रसम अदा की जाने लगी। इसका असर लिंगानुपात में सुधार के रूप में नजर आया, चूंकि इस वर्ष 10 लड़कों पर 8 लड़कियों के जन्म लिया। यानि 2016 में जहां लड़कों के मुकाबले चार लड़कियां कम जन्मी थी वहीं, अब लड़कों के मुकाबले दो लड़कियों की संख्या कम हैं।
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आठ बेटियों के परिजनों ने रस्म अदा की : गांव में बीते आठ माह के दौरान जन्मीं वंशिका, यश्वी, नितिका, कुंजन व चार (जिनके अभी नाम नहीं रखे गए) का कुआं पूजन कराया गया। सिर पर कलश लेकर शामिल सभी बेटियों की माताओं से विधिवतपूर्वक रस्म अदा कराई गई। इस दौरान बेटियों के परिजनों में रामूर्ति, बलराम, रेनू, सुनील, गीता, गुरप्रीत, सीमा, संजय, कुसुमलता, रवि कुमार, रजनी, सुनील रेशमा, रींकू, उषा व विक्रम मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि बेटियां किसी भी सूरत में बेटों से कम नहीं है, बल्कि बेटा एक घर तो बेटियां दो घरों को बढ़ाने व संवारने का काम करती हैं। इस दौरान जिला बाल संरक्षण यूनिट के लीगल अधिकारी रंजन शर्मा ने यौन उत्पीड़न से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम 2012 एवं किशोर न्याय अधिनियम 2015 बारे अवगत कराया। मौके पर सुपरवाइजर सोनिया, किरण व पंकेश मौजूद रहे।

गांव की एमकॉम पास सोनम को बनाया ब्रांड एंबेस्डर : महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से कार्यक्रम के दौरान गांव की सबसे पढ़ी-लिखी सोनम को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत गांव से ब्रांड एंबेस्डर बनाया गया, जोकि एमकॉम कर चुकी हैं। ताकि सोनम को देख अन्य लड़कियां भी पढ़-लिखकर काबिल बन सकें और ग्रामीण भी बेटियों को पढ़ाने-लिखाने के प्रति जागरूक हों। सोनम ने मौके पर उपस्थित सभी ग्रामीणों को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की शपथ दिलाई कि वह बेटियों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें भी बेटों की तरह पढ़ा-लिखकर काबिल बनाएंगे।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ एक सार्थक प्रयास है। गांव के लिंगानुपात में बीते वर्ष से अब तक काफी सुधार हुआ है। इसमें और भी सुधार करने का प्रयास किया जा रहा है।
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-बलवीर सिंह, सरपंच, अर्जुन माजरा।

गांव के लो-सेक्स रेश्यो में सुधार के लिए ग्रामीणों को बेटियों को बचाने व पढ़ाने बारे लगातार जागरूक किया जा रहा है। इसका असर लिंगानुपात में सुधार के रूप में हुआ वहीं, अब गांव में ग्रामीण बेटों की तरह बेटियों के जन्म पर भी कुआं पूजन की रस्म अदा करते हैं।
- सरीता चौहान, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग।
फोटो-19 व 20
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