दिव्यांग दिखाने के लिए टांग पर मुर्गे की चमड़ी लगाकर बच्चों से मंगवाई जा रही थी भीख
यमुनानगर। भीख मांगने के लिए लोग नए नए तरीके अपना रहे हैं। दिव्यांग बनकर कुछ लोग ऐसी हमदर्दी भरी कहानी सुनाते हैं कि लोग पैसे देने पर मजबूर हो जाते हैं। ऐसा ही खुलासा शुक्रवार को हुआ। जब जिला बाल संरक्षण की टीम ने व्हील चेयर पर बैठ भीख मांग रहे चार बच्चों को पकड़ा। मेडिकल में चारों बच्चे फिट पाए गए। जांच में बच्चों ने दिव्यांग दिखने के लिए टांग को जला हुआ दिखाने के लिए मुर्गें का खून, चमड़ी व आटा लगाया हुआ था। बच्चों से टीम पूछताछ कर रही है। ये बच्चे हर रोज बाजार में भीख मांगते थे। बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति इन बच्चों से ऐसा कर भीख मंगवाता था। चारों बच्चों को बालकुंज छछरौली भेज दिया गया है।
स्वस्थ बच्चों को कोई भीख नहीं देता है। ऐसे में इन बच्चों ने भीख मांगने का बड़ा नायाब तरीका निकाला था। बच्चों की टांगों पर मुर्गे की चमड़ी, खून व आटा चिपका देते थे। जिससे लगे उसकी टांग जली हुई है और वह दिव्यांग है। इसके बाद एक बच्चा व्हील चेयर पर उसे बिठा कर पीछे से धक्का देकर शहर में भीख मांगते थे। ये बच्चे लोगों को ऐसी हमदर्द भरी कहानी सुनाते थे कि लोग पैसे देने पर मजबूर हो जाते थे। दूसरे व्यक्ति को लगता था कि बच्चे की हालत खराब है। बीते कुछ दिनों से उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश सचिव संजय मित्तल व कुछ अन्य लोगों को इन बच्चों पर शक था। शक के चलते उन्होंने रेस्क्यू कर चारों बच्चों को पकड़ा और मौके पर बाल संरक्षण टीम को बुलाया गया। बाल संरक्षण के लीगल अधिकारी रंजन शर्मा, प्रोटेक्शन आफिसर प्रीति, गुरप्रीत, दीपक, गौरव, पंडित अखिलेश, अजय मौके पर पहुंचे। टीम ने जब बच्चों को देख तो उनकी हालत देख कर लग रहा था कि बच्चों की टांग व शरीर के कुछ हिस्से जले हुए हैं। एंबुलेंस के माध्यम से उन्हें ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया। यहां बच्चों का मेडिकल कराया गया तो वे बिल्कुल फिट निकले। जांच करने पर पता चला कि उनकी टांगों पर जो जला हुआ भाग था, वह हकीकत में नहीं, बल्कि उनकी टांग पर मुर्गे की खाल, मुर्गे का खून व आटा लगाया हुआ था, इससे ऐसा लगता है कि बच्चों की टांग जली हुई है। लेकिन मेडिकल जांच में बच्चों की टांग सही निकली और वह अपने पैरों पर चल भी रहे थे। यह दिखावा केवल भीख मंगवाने के लिए किया गया है।
कई दिन से आ रहे थे बच्चे
उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश सचिव संजय मित्तल ने बताया कि उनकी दुकान छोटी लाइन संत नगर गोपाल मंदिर के नजदीक है। कई दिनों से दो व्हील चेयर में कई बच्चे भीख मांगने के लिए आ रहे थे। उन्हें देख कर लगता था कि बच्चों की टांगें व शरीर आग से जला हुआ है और वह चलने में असमर्थ है। उसने बच्चों को बुलाया और उन्हें नाश्ता करवाया, इस दौरान उनसे बातचीत की। इस दौरान उन्हें शक हुआ कि बच्चे दिखावा कर रहे हैं। उन्होंने टीम को बुलाकर बच्चों को उनके हवाले किया। पूछताछ में पता चला कि बच्चे दूसरे राज्य के हैं।
जांच करने पर जुड़ सकती है कड़ियां
मित्तल ने बताया कि बच्चों ने बातचीत में बताया कि कोई बाहर का व्यक्ति आकर उनसे भीख मंगवाता है और वह पूरा दिन भीख मांग कर पैसे उसे देते हैं। यह सब बच्चे रेलवे फाटक के नजदीक बस्ती में रहते हैं। इन बच्चों का समूह बड़ा है, यदि विभाग चाहे तो सही प्रकार से जांच करे और बच्चों से भीख मंगवाने वाले गिरोह की कड़ियां खुल सकती है।
बाल कुंज भेज बच्चे
जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. रिचा बुद्धिराजा ने बताया कि उन्होंने बच्चों का मेडिकल करवाया। इसमें वे फिट निकले। फिट होने पर अब वह मामले की जांच कर रहे है। इस संबंध में उन्होंने थाना शहर यमुनानगर में शिकायत दी है। इसके अलावा बच्चों को बाल कुंज भेज दिया गया है। बच्चों से भीख कौन मंगवाता था, पूछताछ के बाद उसके खिलाफ भी कार्रवाई करवाई जाएगी।
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