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फिल्मी गानों पर नहीं, लोकगीतों पर नाच-गाकर मनाई लोहड़ी

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लोकगीतों पर नाच-गाकर मनाई लोहड़ी
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यमुनानगर। डीजे पर फिल्मी गाने पर नाच-गाकर लोहड़ी मनाने के ट्रेंड में लोकगीतों का चलन कम होने लगा है। बड़े-बुजुर्गों को छोड़ पर्व से जुड़े लोकगीत हर कोई भूलने लगा है। ऐसे में कहीं लोकगीत और त्योहार की सादगी लुप्त न हो, इसी को ध्यान में रख हुडा सेक्टर-17 में महिलाओं ने सेय नो टू डीजे वाली लोहड़ी का स्लोगन देकर सिर्फ लोकगीतों पर नाच-गाकर लोहड़ी मनाई। साथ ही एक-दूसरे को लोहड़ी पर्व की बधाई दी व मूंगफली-रेबड़ी का आनंद लिया।
कार्यक्रम का आयोजन अग्रवाल वैश्य महिला समिति ने कराया। इसमें समिति समेत सेक्टर की करीब 50 महिलाओं ने हिस्सा लिया। इसमें महिलाएं पर्व से जुड़े लोकगीत प्रीपेयर करके आईं। सभी ने बारी-बारी से बुलंद आवाज में एक-एक लोकगीत गाकर सुनाया। समिति की प्रधान रितू गुप्ता ने सुंदर मुंदरिये...लोक गीत गाकर लोहड़ी जलाई और सभी महिलाओं में मुंगफलियां व रेबड़ियां बांटीं। महिलाओं ने सामूहिक रूप से पंजाबी लोकगीतों पर नाच-गाकर गिद्दा डाला। मौके पर समिति की अनीता जैन, रीतू गर्ग, सारिका जिंदल, रेनू अग्रवाल, अंजू मित्तल, डोली बंसल, सुनीता सिंगला, वीनू गर्ग, रीतू गर्ग, निशा बंसल, साक्षी, सारिका गुप्ता, मंजू जैन, सुमन गुप्ता, शम्मी बंसल, मोनिका सिंघल, नीरू गर्ग, रजनी गर्ग आदि मौजूद रहे।
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सादगी से ही त्यौहारों की शान
समिति की प्रधान रितू गर्ग ने कहा कि त्योहारों की शान सादगी में है। पुराने कल्चर को हमें नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि इसी से सभी धर्मों व वर्गों के लोग जोड़े हुए हैं। नए ट्रेंड में डीजे पर फिल्मी गानों पर नाच-गाकर लोहड़ी मनाई जाती है, जिससे लोकगीत लुप्त होने को हैं। इसी को देखते हुए समिति की ओर से सादगी भरे अंदाज में पंजाबी लोकगीतों पर नाच-गाकर लोहड़ी मनाई गई, क्योंकि यही इस त्यौहार की पहचान है। इसे बरकरार रखने के लिए समाज को प्रयास करते रहना है।
फोटो-21 व 23
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