सूरज की लुकाछिपी, कंपकंपाए लोग
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी का जिले में व्यापक असर दिखने लगा है। 5वें दिन भी धुंध व बादलों के आगोश में छिपे सूरज का लुकाछिप्पी का खेल जारी रहा। बीते दिनों से न्यूनतम पारा 4-5 डिग्री बना हुआ है वहीं, अब बर्फीली हवाएं भी चलने लगी हैं। इंसान के अलावा पशु-पक्षी तक हाड़कंपाती ठंड से बेहाल दिखाई दे रहे हैं। दोपहर में कुछ देर निकली धूप नर्म पड़ गई है। लिहाजा, दिन में भी हर किसी की कंपकंपी छूट रही है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
बता दें कि दिसंबर माह तक मौसम का मिजाज सामान्य बना रहा। दिन में तेज धूप की वजह से रात की ठंड का अहसास भी कम हुआ। नए साल के साथ सर्दी ने तेवर दिखाने शुरू किए, जो अब तक जारी है। जनवरी के पांच दिनों में तीन दिन सूरज पूरी तरह एबसेंट रहा है वहीं, दो दिन दोपहर में निकली कुछ देर की धूप भी नर्म पड़ गई। पारे में गिरावट के साथ कड़ाके की ठंड लगातार बढ़ती जा रही है। मौसम विज्ञानी पहाड़ों पर बर्फबारी को ठंड बढने की वजह मान रहे हैं। शुक्रवार की सुबह लोगों ने बिस्तर छोड़ा तो धुंध के अलावा शरीर में तश्तर चुभने का अहसास कराती शीतलहर से सामना हुआ। एक तरफ धुंध सड़क पर चलने वाले वाहनों के लिए स्पीड ब्रेकर साबित हुई वहीं, दूसरी ओर बर्फीली हवा ने हाड़ कंपाने का काम किया। ठंड का सितम देख लोग घरों व दफ्तरों में कैद रहने को मजबूर है। जरूरी काम से जिन्हें निकलना पड़ता है, उनका दिन ठिठुरते हुए बीतता है। दिनभर धुंध व बादलो के बीच चली लुकाछिप्पी में कड़ी मशक्कत के बाद भी सूरज अपनी चमक नहीं बिखेर पाया। दिन में भी ठंड से राहत को लोग अलाव व हीटर का सहारा लेते नजर आए। कहीं लोग ठंड में चाय की चुस्कियां लेते भी दिखे। लुढ़के पारे के बीच दिन में पांच किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से चलने वाली बर्फीली हवाओं ने हड्डियां तक कंपाती रहीं। शाम गहराते ही ठंड फिर से कहर बरपाने लगी और शहर की सड़कों पर दिखने वाले लोग भी अपने घरों में जा दुबके।
किसानों की खिली बांछें, बेहतर उत्पादन की आस: मौसम में बढ़ी ठंडक के बाद जिले के किसानों की बांछें खिल गई हैं। रबी सीजन की गेहूं को खेती के लिए यह स्थिति वरदान साबित होगी। किसानों को उम्मीद है कि यदि मौसम इसी तरह मेहरबान रहा तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन तो बढ़ेगा ही, साथ ही सफल की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। प्रगतिशील किसान राकेश, संजीव ने बताया कि गेहूं की फसल की बिजाई के बाद ठंड का बढना फसल के लिए लाभदायक होता है। ठंड बढने व फसल में पहला पानी देने के बाद बीज में जल्द फुटाव होता हे। फुटाव के साथ ही पौधे की बढ़त भी तीव्र गति से होती है। पिछले सीजन में ठंड व बारिश देर से होने के कारण किसानों को अपेक्षित फायदा नहीं हो पाया था। ठंड बढना व धुंध गिरना रबी की फसल के लिए फायदेमंद है। उधर, कृषि विशेषज्ञ डॉ. बीआर कांबोज के मुताबिक रबी सीजन में इस समय ठंड का बढना गेहूं, सरसों व गन्ने की फसल के लिए फायदेमंद होता है। ठंड बढने के बाद अब यदि बारिश होती है तो किसानों को कई गुना फायदा होगा। पौध अधिक तीव्र गति से बढ़ेगा तो साथ ही किसानों को सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।