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मोक ड्रील कर पीठ न थपथपाएं, इन हालात में भूकंप से कैसे बचाओंगे बताएं?

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मॉकड्रिल कर पीठ न थपथपाएं, इन हालात में भूकंप से कैसे बचाओगे बताएं?
भूकंप से बचाव को लेकर जिला प्रशासन की मॉकड्रिल से हकीकत से कौसों दूर
कई कॉलोनियों और भीड़-भाड़ वाले बाजारों में भूकंप से बचाव के न प्रबंध न तैयारी
तंग गलियों में बने मकानों, दुकानों व गोदामों तक नहीं पहुंच सकती दमकल व एंबुलेंस
बिना नक्शा पास हुए और 4 इंची दीवारों पर बड़ी चुनौती की तरह खड़े हैं सैकड़ों भवन
राहुल शर्मा
यमुनानगर। भूकंप से बचाव को लेकर जिला प्रशासन की मॉकड्रिल से हकीकत कोसों दूर है। यह नाटकीय अभ्यास ऐसे पांच सार्वजनिक स्थानों पर हुआ, जहां भूकंप से बचाव के तय मापदंड के अनुसार भवन बने हुए हैं। जबकि ट्विनसिटी में कई रिहायशी कॉलोनियों व भीड़भाड़ वाले बाजारों में भूकंप जैसी आपदा में बचाने को न कोई प्रबंध है और न ही प्रशासन की कोई तैयारी है। तंग गलियों में बने मकानों, दुकानों व गोदामों तक दमकल व एंबुलेंस पहुंच भी नहीं सकती है। यहीं नहीं बिना नक्शा पास कराए और महज चार इंची दीवारों पर सैकड़ों भवन भी भूकंप जैसी आपदा में बड़ी चुनौती की तरह खड़े हैं।
ट्विनसिटी में शामिल जगाधरी शहर कई दशकों पुराना बसा होने के कारण आउटर एरिया को छोड़ अंदर की सभी कॉलोनियां व बाजार तंग गलियों में हैं। इसी तरह यमुनानगर में छोटी लाइन पर संतनगर, रेलवे स्टेशन के समीप जमना गली, देवी मंदिर कॉलोनी, खेड़ा मोहला, न्यू मार्केट जैसे दर्जनों कॉलॉनियों व बाजारों के उदाहरण हैं, जहां आने-जाने को रास्ते तंग होने से हर वक्त जाम की स्थिति रहती है। गलियां इतनी तंग हैं कि यहां दमकल, एंबुलेंस व पीसीआर का पहुंचना भी मुमकिन नहीं है वहीं, कई बाजारों में अतिक्रमण भी आपदा की स्थिति में रोड़ा साबित हो सकता है। उक्त कॉलोनियों व बाजारों में हजारों रिहायशी मकानों सहित सैकड़ों दुकानों व गोदामों के होने के बाद भी आपदा से बचने को यहां कोई प्रबंध नहीं हैं। न तो यहां आपदा बचाव को सुरक्षा उपकरण रखने जरूरी समझे गए और न कभी लोगों को जागरूक किया गया।
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तय मापदंडों का नहीं रखता कोई ख्याल, ताश के पत्तों की तरह न ढह जाए भवन-
यमुनानगर-जगाधरी में काफी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्होंने बिना नक्शा पास कराए भवन खड़े कर डाले हैं। उनकी ओर से भवन बनाते वक्त भूकंप जैसी आपदा के मद्देनजर तय मापदंडों का कोई ख्याल नहीं रखा जाता है। ऐसे हालात ज्यादातर अवैध कॉलोनियों में नजर आते हैं, जहां महज 4 इंची दीवारों पर ही भवन खड़े हो गए हैं, जो पांच-छह रियेक्टर के भूकंप पर ताश के पत्तों की तरह ढह सकते हैं। यह एक प्रशासनिक चूक है, चूंकि बिना नक्शा के तैयार किए भवनों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, इसलिए लोग नक्शा पास कराना जरूरी नहीं समझते हैं।

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इधर...डेंजर घोषित भवनों को नोटिस देने तक सिमटी कार्रवाई:
यमुनानगर-जगाधरी में दर्जनों ऐसे भवन भी हैं, जिसे नगर निगम की ओर से डेंजर घोषित किया जा चुका है। हालांकि नगर निगम की ओर से कई बार उनके मालिकों को नोटिस दिए गए, बावजूद इसके इन भवनों की मरम्मत नहीं कराई गई। जगाधरी में रेलवे बाजार, गोमती मोहल्ला, पटरी मोहल्ला, राजावाली गली, बैलगड़ान, लोहरान मोहल्ला, चिडिय़ा मंदिर रोड, सुथरिया मोहल्ला, तेलीयान गली, झिवरवाली गली और देवीभवन बाजार समेत यमुनानगर में जमुना गली में भी पुराने मकानों की भरमार है। अधिकांश मकान ऐसे हैं, जो सौ साल से भी ज्यादा पुराने और जर्जर हालत में तंग गलियों में खड़े हैं। इनको गिराने के बजाए नगर निगम की कार्रवाई नोटिस देने तक सिमटी हुई है। जबकि ये भवन भूकंप जैसी आपदा में गिरकर कभी भी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं।

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निगम ने हादसों से भी नहीं लिया कोई सबक:
2010 में जगाधरी के हनुमान गेट के समीप एक पुराना मकान ढह जाने से एक बच्ची की मौत हो गई थी। जबकि दो बच्चियां गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब बच्चियां स्कूल से छुट्टी के बाद लौट रही थीं। इसी तरह 2010 में ही रूपनगर कॉलोनी में पुराने मकान की छत गिरने से एक महिला की मौत हो गई थी। हादसों के बावजूद भी नगर निगम सबक लेता नहीं दिख रहा है। जबकि म्यूनिसिपल एक्ट के तहत पुराने जर्जर मकानों को नगर निगम द्वारा तोड़ा जा सकता है।

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पढ़े-लिखों के बीच नहीं, सलम एरिया में हो मॉकड्रिल:
वार्ड नंबर-4 से पार्षद प्रमोद सेठी ने बताया कि प्रशासन की ओर से भूकंप बचाव की मॉकड्रिल ऐसे स्थानों पर की गई, जहां भवन भूकंप बचाव के तय मापदंड के मुताबिक ही तैयार हैं। इस दौरान आसपास पढ़े-लिखे लोग ही मौजूद थे, जिन्हें भूकंप की स्थिति में क्या किया जाता है, पहले ही मालूम था। मॉकड्रिल सलम एरिया और तंग गलियों और पुराने भवनों के पास की जानी चाहिए थी, ताकि सही मायने में यह पता चलता कि प्रशासन भूकंप जैसी स्थिति के लिए कितना तैयार है। साथ ही आपदा में कैसे जान-माल का बचाव करना है, इस बारे ऐसे लोगों को पता चल पाता, जिन्हें कुछ जानकारी नहीं है।
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निगम की ओर से दिए जाते हैं नोटिस:
नगर निगम के बिल्डिंग इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक (वार्ड 1 से 6) व विवेक बेनीवाल (वार्ड 7 से 13) ने बताया कि जो लोग नक्शा पास नहीं कराते उन्हें नोटिस दिए जाते हैं, अगर तब भी फाइन देकर नक्शा पास न कराया जाए तो भवनों को गिराने का भी प्रावधान है। शहर में डेंजर घोषित भवनों की मरम्मत को लेकर भी नोटिस दिए जाते हैं।
फोटो-6 से 10
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