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निजी अस्पताल बंद, सरकारी अस्पताल में बढ़ा मरीजों का दबाव

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निजी अस्पताल बंद, सरकारी अस्पताल में बढ़ा मरीजों का दबाव
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हरियाणा क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के विरोध में प्राइवेट अस्पतालों की हड़ताल के चलते हुई परेशानी
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर दिन भर प्राइवेट अस्पताल व क्लीनिक रहे बंद
-आईएमए से जुड़े डॉक्टरों ने जिमखाना क्लब से जिला सचिवालय तक निकाला रोष मार्च
एक्ट में संशोधन किए जाने को लेकर स्वास्थ्य मंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। हरियाणा क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के विरोध में शुक्रवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से जुड़े निजी अस्पताल व क्लीनिक के डॉक्टर हड़ताल पर रहे। हड़ताल के दौरान शहर भर के प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी नहीं की गई। जिससे ट्विनसिटी के दोनों अस्पतालों में मरीजों का दबाव अधिक रहा। हालांकि एनएचएम कर्मचारियों के वापस लौटने व अस्पताल प्रशासन की तैयारी के चलते मरीजों को परेशानी का सामना कम करना पड़ा। दोपहर के समय आईएमए से जुड़े सभी डॉक्टर जिमखाना क्लब में एकत्रित हुए। डॉक्टरों ने जिमखाना से जिला सचिवालय तक रोष मार्च निकाला। इसके बाद स्वास्थ्यमंत्री के नाम डीसी को ज्ञापन दिया।
पूर्व से प्रस्तावित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े डॉक्टरों की शुक्रवार को हड़ताल रही। हड़ताल के दौरान अस्पताल व क्लीनिक बंद रहे। ट्विनसिटी के करीब 90 अस्पतालों में मरीजों की जांच नहीं की गई और दिन भर ओपीडी बंद रखी गई। जिससे मरीजों को सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। आईएमए पदाधिकारियों के अनुसार जिले के 80 प्रतिशत मरीज निजी अस्पताल में जाते है। हड़ताल के चलते निजी अस्पतालों में आने वाले मरीज सिविल अस्पताल यमुनानगर व जगाधरी में पहुंचे। सिविल अस्पतालों में निजी अस्पतालों के मरीज भी पहुंचने से यहां मरीजों का दबाव और बढ़ गया। इससे ओपीड़ी, पर्ची काऊंटर, दवा वितरण व लैब में मरीजों की भीड़ लग गई। इससे डॉक्टरों पर भी काम का दबाव बढ़ गया। दोपहर दो बजे तक ओपीड़ी व दवा वितरण केंद्रों पर भीड़ लगी हुई थी। हालांकि हड़ताल पर गए एनएचएम कर्मचारियों और अस्पताल द्वारा पहले से किए गए इंतजामों के चलते मरीजों को ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा।
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सड़क पर उतरे डॉक्टर :
आईएमए से जुड़े प्राइवेट अस्पतालों के संचालक व चिकित्सक हड़ताल के चलते शुक्रवार को सड़कों पर उतर गए। आईएमए के बैनर तले डॉक्टर जिमखाना क्लब पर एकत्रित हुए। यहां से सड़क पर उतर रोष मार्च निकालते हुए डॉक्टर पंचायत भवन से नेशनल हाईवे होते हुए जिला सचिवालय पहुंचे और डीसी को स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
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एक्ट लागू हुआ तो हो जाएंगे छोटे अस्पताल व क्लीनिक बंद :
आईएमए ने ज्ञापन में कहा कि वर्ष 2010 में केंद्र की तत्कालीन सरकार ने क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू किया था। जिसके लागू होने से छोटे अस्पतालों एवं क्लीनिक्स को काफी नुकसान हुआ। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014 में एक अपना क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट जारी किया था। उस एक्ट में कुछ कमियां थी। जिसके बाद अक्तूबर 2015 में सरकार ने आईएमए के प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सलाह करके उसमें बदलाव किया था। लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा अब फिर से वर्ष 2010 में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने की सोच रही है। यदि यह एक्ट दोबारा लागू हो गया तो आधे से ज्यादा छोटे अस्पताल व क्लीनिक बंद हो जाएंगे।
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एक्ट में किया जाए संशोधन :
आईएमए के प्रधान डॉ. धीरेंद्र कुमार सोनी ने कहा कि वह एक्ट के तहत काम करना चाहते हैं। बशर्ते इस एक्ट में संशोधन किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से क्लीनिकल इस्टेब्लिस्ट एक्ट में संशोधन किए जाने की मांग की। इस अवसर पर डॉ. योगेश जिंदल, डॉ. हर्ष शर्मा, डॉ. राजन शर्मा, डॉ. नवीन सभरवाल व डॉ. नरेंद्र्र कश्यप आदि मौजूद थे।
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मरीजों को नहीं हुई परेशानी : सीएमओ
निजी अस्पतालों की हड़ताल से सिविल अस्पताल में आए मरीजों को परेशान नहीं होने दिया गया है। पूरी तत्परता से मरीजों की जांच की गई। अस्पताल में पहले से ही इंतजाम कर लिए गए थे। वहीं, हड़ताल पर गए एनएचएम कर्मियों के लौटने से मरीजों को कोई दिक्कत नहीं हुई।
- डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ, यमुनानगर।
फोटो : 34 से 42
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