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पवित्र सरोवरों में आस्था की डुबकी के लिए उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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पांच लाख श्रद्धालुओं ने तीन सरोवरों में लगाई आस्था की डुबकी
- हरियाणा के अलावा पंजाब, यूपी से पहुंचे श्रद्धालु
- पांच किलोमीटर के क्षेत्र में दिखा श्रद्धालुओं का सैलाब
- ठंड भी श्रद्धालुओं की आस्था के आगे हुई नतमस्तक-
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। कार्तिक पूर्णिमा पर कपालमोचन के पवित्र कपालमोचन, ऋणमोचन व सूरजकुंड सरोवरों में पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने तीन सरोवरों में पवित्र स्नान किया। मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से पाप व ऋणों से मुक्ति मिलती है। हरियाणा के अलावा पंजाब, यूपी से भी खासी संख्या में श्रद्धालु पवित्र स्नान करने पहुंचे। पांच किलोमीटर के क्षेत्र में चल रहे कपालमोचन मेले में चारों ओर श्रद्धालुओं का सैलाब नजर आ रहा था। रात 12 बजने से आधा घंटे पहले तक पवित्र सरोवर सूने पड़े थे और श्रद्धालु सरोवरों के किनारे व कपालमोचन गुरुद्वारे में दीपदान करते नजर आए। घड़ी की सुईयां एक सीध मेें आते ही श्रद्धालु अपने-अपने टैंट व कमरों से निकलकर सरोवरों की ओर बढ़ चले। आधे घंटे के भीतर तीनों सरोवरों पर हर तरफ श्रद्धालु ही श्रद्धालु नजर आने लगे। श्रद्धालुओं में बुजुर्ग महिलाएं सबसे अधिक रहीं, जो भीड़ में गुम होने की आशंका में एक-दूसरे का हाथ पकड़ मानव श्रृंखला की शक्ल में एक से दूसरे सरोवर की ओर जाती दिखीं। सरोवरों का ठंडा पानी श्रद्धालुओं की आस्था को लेश मात्र भी डिगा नहंीं पाया। आठ साल के बच्चे से लेकर 80 साल के बुजुर्ग भी सरोवरों में स्नान के लिए आतुर दिखें।
इनसर्ट-
सिखों ने मंदिरों में शीश झुकाया, गुरुद्वारे में हिंदू श्रद्धालुओं ने टेका माथा
- मेले में सैकड़ों मुस्लिमों ने लगाई दुकानें
मेले में झलका सभी धर्मों का सांप्रदायिक सद्भाव
गुरदीप सिंह सोढी
यमुनानगर। कपालमोचन मेले में सांप्रदायिक सद्भाव की झलक साफ नजर आती है। इस प्राचीन हिंदू तीर्थ स्थल पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं में सबसे अधिक संख्या पंजाब के सिख श्रद्धालुओं की होती है। सिख श्रद्धालु न सिर्फ पवित्र सरोवरों में स्नान करते हैं, बल्कि मंदिरों में पूरे श्रद्धाभाव से शीश झुकाते हैं। वहीं, हिंदू श्रद्धालु कपालमोचन गुरुद्वारे में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेकते हैं। मेले में सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम दुकानें लगाते हैं।
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सभी धर्मों की इस पवित्र तीर्थ स्थल के प्रति वर्षों से प्रगाढ़ आस्था है। कपालमोचन सरोवर के किनारे स्थित सफेद गऊ बच्छा घाट के मंदिरों के प्रति सिख श्रद्धालुओं की असीम आस्था है। वह मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ दीपदान करते हैं। उधर, कपालमोचन गुरुद्वारे में हिंदू श्रद्धालु भी माथा टेकने अवश्य जाते हैं। मेला क्षेत्र में लगने वाली दुकानों में मुस्लिम दुकानदारों की संख्या अधिक रहती है। इस बार भी मेला सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल बना हुआ है। बरनाला से आए कीरत सिंह ने बताया कि उसके दादा-परदादा भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन कपालमोचन के पवित्र सरोवरों में स्नान के लिए आते थे। जव वह छोटे थे तो अपने दादा के साथ गऊ बच्छा घाट पर माथा टेकते थे। उनके निधन के बाद कीरत सिंह हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर यहां जरूर आते है। सहारनपुर से आए पत्थर का सामान बेचने वाले असलम ने बताया कि वह करीब 22 वर्षों से मेले में दुकान लगा रहे हैं।
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बॉक्स
पीड़ी खरीदन नाल वद्दी है पीढ़ी:
कपालमोचन मेल में पीड़ी खरीदने की सदियों पुरानी परंपरा है। महिलाएं इसे आज भी निभा रही हैं। ऐसी मान्यता है कि कपालमोचन मेेले में पीड़ी खरीदने से पीढ़ी (वंश) आगे बढ़ता रहता है। इसके चलते मेले में सैकड़ों की संख्या में पीड़ी की दुकानें लगती हैं। मेले में पीड़ी खरीदने वाली मानसा की बलबीर कौर कहती है-साडी बेबे कहंदी सी कि कपालमोचन मेले विच पीढ़ी खरीदन नाल वंश अग्गे वद्दा है। ओ हमेशा मेले च आके पीढ़ी खरीद के लै जांदी सी, हुण मैं वी पीढ़ी खरीद के लै जांदी आ...। मेले में पीड़ी की दुकान लगाने वाले सहारनपुर के वसीम ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पहले तक उसकी करीब डेढ़ हजार पीड़ियां बिक चुकी हैं।
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