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प्राइवेट अस्पतालों में कैश हो रहा है डेंगू का डर

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डेंगू के डर को कैश करा रहे प्राइवेट अस्पताल
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- प्राइवेट अस्पतालों से भेजी गई 144 संदिग्धों के केस में से महज 12 हुए कंफर्म, सरकारी अस्पताल के 105 केस में से 11 हुए कंफर्म
- सरकारी अस्पतालों में डेंगू टेस्ट मुफ्त, जानकारी के अभाव में प्राइवेट लैब जा रहे बुखार पीड़ित
यमुनानगर। जिले में डेंगू के डर को प्राइवेट अस्पताल कैश कराने में जुटे हैं, नतीजतन मोटी कमाई की फिराक में ज्यादातर बुखार के मरीजों को डेंगू का संदिग्ध बताकर इलाज किया जा रहा है। हाल यह है कि, प्राइवेट अस्पतालों से भेजे गए 144 संदिग्ध केस में से अब तक महज 12 केस ही कंफर्म हो पाए हैं। इनमें से अधिकतर केस यमुनानगर और जगाधरी अर्बन एरिया के हैं। प्रोफेसर कॉलोनी में सबसे अधिक तीन केस मिले हैं, जबकि गोबिंदपुरी और द्वारिका पुरी में दो-दो पीड़ित सामने आए हैं।
इन दिनों प्राइवेट अस्पतालों में बड़ी संख्या में बुखार पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं, मोटी कमाई के फेर में इनमें से ज्यादातर को डेंगू पीड़ित होना बताया जा रहा है। टेस्ट और इलाज के नाम पर उनसे मोटी फीस वसूली जा रही है। यहां तक की मरीजों की जांच प्राइवेट लैब में कराई जा रही है। इसके मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी प्राइवेट अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने यहां आने वाले संदिग्ध डेंगू बुखार पीड़ितों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दें। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन संदिग्ध डेंगू पीड़ितों के रक्त की जांच सरकारी लैब में कराई जाती है। फिलहाल इस सीजन में प्राइवेट अस्पतालों की ओर से 144 संदिग्ध डेंगू मरीजों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी गई। सरकारी लैब में इनके रक्त की जांच केे बाद केवल 12 को ही डेंगू कंफर्म हुआ है।
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प्राइवेट लैब के लिए निर्धारित है डेंगू टेस्ट की फीस
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक डेंगू की पहचान के लिए जो टेस्ट किया जाता है उसे एलाइजा कहते हैं। जगाधरी सिविल अस्पताल में एलाइजा टेस्ट मुफ्त किया जाता है। प्राइवेट अस्पतालों व प्राइवेट लैब में एलाइजा टेस्ट के लिए अधिकतम छह सौ रुपये फीस निर्धारित की गई है। कोई भी प्राइवेट अस्पताल या लैब इससे अधिक फीस नहीं ले सकता। यदि कोई डेंगू टेस्ट की इससे अधिक फीस लेता है तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दें। स्वास्थ्य विभाग की ओर से उस अस्पताल या लैब के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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डेंगू से ज्यादा वायरल के मरीज
इन दिनों सरकारी अस्पतालों में भी वायरल बुखार के केस काफी संख्या में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में आने वाले संदिग्ध बुखार पीड़ितों को डेंगू टेस्ट कराया जाता है। इस सीजन में सरकारी अस्पतालों की ओर से अब तक 105 संदिग्ध बुखार पीड़ितों का डेंगू टेस्ट कराया गया, जिसमें से केवल 11 को ही डेंगू कंफर्म हुआ है। वायरल होने पर भी पीड़ित के शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है, इसे ही डेंगू मान लिया जा रहा है। मुकंद लाल सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय दहिया ने बताया कि इन दिनों डेेंगू से ज्यादा वायरल बुखार का प्रकोप है। किसी भी प्रकार का बुखार होने पर केवल क्रोसिन ही लें और डाक्टर से जांच करवाएं। बुखार पीड़ित को तरल आहार जरूर देते रहें।
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डेंगू के लक्षण-
- अचानक तेज सिर दर्द व बुखार का होना।
-मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना।
-आंखों के पीछे दर्द होना, जो कि आंखों को घुमाने से बढ़ता है।
जी मिचलाना एवं उल्टी होना।
-गंभीर मामलों में नाक, मुंह, मसूड़ों से खून आना अथवा त्वचा पर चकत्ते उभरना।
-वर्जन-
इन दिनों वायरल का प्रकोप काफी अधिक है। वायरल बुखार में भी प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। इसलिए केवल प्लेटलेट्स कम होने पर इसे डेंगू बुखार नहीं माना जा सकता। यदि किसी को बुखार है तो जगाधरी सरकारी अस्पताल में जाकर एलाइजा टेस्ट जरूर कराएं ताकि पता चल सके कि उसे डेंगू है या नहीं। प्राइवेट लैब में एलाइजा टेस्ट के लिए छह सौ रुपये फीस निर्धारित की गई है। यदि कोई इससे अधिक फीस लेता है तो स्वास्थ्य विभाग को शिकायत दें।
डॉ राजेंद्र प्रसाद, सिविल सर्जन
फोटो-1,2
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